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गंगा की लहरों पर प्रधानमंत्री के सारथी बने क्रूज के दो मास्टर
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दो दिवसीय दौरे पर काशी आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अधिकतर समय मां गंगा की गोद में ही व्यतीत किया। इस दौरान गंगा की लहरों पर सवार प्रधानमंत्री के सारथी अलकनंदा और विवेकानंद क्रूज के दो मास्टर बने। यही नहीं, सोमवार रात 12 बजे जब प्रधानमंत्री विवेकानंद क्रूज से उतरे तो मास्टर सहित क्रूज के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री के धन्यवाद कहने से क्रूज के निदेशक सहित सभी कर्मी आह्लादित हैं।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के लिए प्रधानमंत्री मोदी खिड़किया घाट पर सुबह 11.40 बजे पहुंचे और अलकनंदा क्रूज से ही ललिता घाट आए। इस दौरान महज ढाई घंटे ही प्रधानमंत्री धाम में रहे, उसके बाद वह दोबारा ललिता घाट से अलकनंदा क्रूज से शाम 4.05 बजे रविदास घाट पहुंचे। एक घंटे की यात्रा अलकनंदा क्रूज से करने के बाद उतरते वक्त प्रधानमंत्री ने क्रूज के मास्टर स्वजीत मंडल को धन्यवाद दिया। बरेका में लगभग डेढ़ घंटे के विश्राम के बाद प्रधानमंत्री दोबारा शाम साढ़े छह बजे के बाद रविदास घाट आए और यहां विवेकानंद क्रूज पर 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ गंगा आरती, आतिशबाजी और लेजर शो सहित घाटों की आभा को निहारा। रात 12 बजे जब पुन: रविदास घाट पर आकर विवेकानंद क्रूज से प्रधानमंत्री उतरे तो क्रूज के मास्टर ननतू सरकार के सारथी बने रहने को लेकर के लिए अभार जताया।
गर्व है कि प्रधानमंत्री के हम तीसरी बार सारथी बने
अलकनंदा क्रूज के मास्टर स्वजीत मंडल ने बताया कि प्रधानमंत्री को जलयात्रा कराने का तीसरी बार सौभाग्य मिला। चूंकि हमारे केबिन के बगल से ही होकर प्रधानमंत्री ऊपरी मंजिल पर पहुंचे, इस दौरान जब वह ऊपर से नीचे उतरे तो हाथ हिलाकर धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रधानमंत्री की सादगी का कोई जोड़ नहीं है। गर्व है कि हम उनके सारथी बने।
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प्रधानमंत्री के सादगी का हो गया कायल
विवेकानंद क्रूज के मास्टर ननतू सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक समय हमारे क्रूज पर ही बिताया। इस दौरान दो घंटे घाटों का भ्रमण करने के बाद चार घंटे तक मुख्यमंत्रियों के संग उनकी बैठक चली। कोलकाता निवासी ननतू ने बताया कि जीवन में पहली बार प्रधानमंत्री को छह घंटे से अधिक समय तक क्रूज पर भ्रमण कराया। प्रधानमंत्री ने जाते वक्त मुझे धन्यवाद दिया। उनकी इस सादगी का मैं कायल हो गया।
पीएम ने क्रूज की व्यवस्थाओं को जाना
अलकनंदा व विवेकानंद क्रूज को संचालित कराने वाले निदेशक विकास मालवीय ने बताया कि यह तीसरा अवसर था कि प्रधानमंत्री को जल यात्रा कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने क्रूज की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को जाना। विकास मालवीय ने बताया कि नदी में चलने वाले क्रूज पर मास्टर होते हैं और समुद्र में चलने वाले क्रूज पर कैप्टन तैनात होते हैं।
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श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के लिए प्रधानमंत्री मोदी खिड़किया घाट पर सुबह 11.40 बजे पहुंचे और अलकनंदा क्रूज से ही ललिता घाट आए। इस दौरान महज ढाई घंटे ही प्रधानमंत्री धाम में रहे, उसके बाद वह दोबारा ललिता घाट से अलकनंदा क्रूज से शाम 4.05 बजे रविदास घाट पहुंचे। एक घंटे की यात्रा अलकनंदा क्रूज से करने के बाद उतरते वक्त प्रधानमंत्री ने क्रूज के मास्टर स्वजीत मंडल को धन्यवाद दिया। बरेका में लगभग डेढ़ घंटे के विश्राम के बाद प्रधानमंत्री दोबारा शाम साढ़े छह बजे के बाद रविदास घाट आए और यहां विवेकानंद क्रूज पर 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ गंगा आरती, आतिशबाजी और लेजर शो सहित घाटों की आभा को निहारा। रात 12 बजे जब पुन: रविदास घाट पर आकर विवेकानंद क्रूज से प्रधानमंत्री उतरे तो क्रूज के मास्टर ननतू सरकार के सारथी बने रहने को लेकर के लिए अभार जताया।
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गर्व है कि प्रधानमंत्री के हम तीसरी बार सारथी बने
अलकनंदा क्रूज के मास्टर स्वजीत मंडल ने बताया कि प्रधानमंत्री को जलयात्रा कराने का तीसरी बार सौभाग्य मिला। चूंकि हमारे केबिन के बगल से ही होकर प्रधानमंत्री ऊपरी मंजिल पर पहुंचे, इस दौरान जब वह ऊपर से नीचे उतरे तो हाथ हिलाकर धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रधानमंत्री की सादगी का कोई जोड़ नहीं है। गर्व है कि हम उनके सारथी बने।
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प्रधानमंत्री के सादगी का हो गया कायल
विवेकानंद क्रूज के मास्टर ननतू सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक समय हमारे क्रूज पर ही बिताया। इस दौरान दो घंटे घाटों का भ्रमण करने के बाद चार घंटे तक मुख्यमंत्रियों के संग उनकी बैठक चली। कोलकाता निवासी ननतू ने बताया कि जीवन में पहली बार प्रधानमंत्री को छह घंटे से अधिक समय तक क्रूज पर भ्रमण कराया। प्रधानमंत्री ने जाते वक्त मुझे धन्यवाद दिया। उनकी इस सादगी का मैं कायल हो गया।
पीएम ने क्रूज की व्यवस्थाओं को जाना
अलकनंदा व विवेकानंद क्रूज को संचालित कराने वाले निदेशक विकास मालवीय ने बताया कि यह तीसरा अवसर था कि प्रधानमंत्री को जल यात्रा कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने क्रूज की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को जाना। विकास मालवीय ने बताया कि नदी में चलने वाले क्रूज पर मास्टर होते हैं और समुद्र में चलने वाले क्रूज पर कैप्टन तैनात होते हैं।