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जिस ट्रांसफार्मर में आएगी फाल्ट, उसी क्षेत्र की गुल होगी बिजली
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आने वाले दिनों में शहर की बिजली व्यवस्था भी स्मार्ट हो जाएगी। स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर से सभी शहरी उपकेंद्र जुड़ेंगे। किसी ट्रांसफार्मर से बत्ती गुल होने पर केवल उस ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की ही बिजली जाएगी। यह सब स्मार्ट सिटी के तहत होगा। इसे स्काडा सिस्टम (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वेजीशन) से अपग्रेड करना है। इस कार्य में 71.50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जिसका 75 प्रतिशत स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वित्तीय सहयोग तथा शेष 25 प्रतिशत कार्यदायी संस्था पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम वहन करेगा।
स्मार्ट सिटी और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम शहर की बिजली व्यवस्था को हाईटेक व नो-ट्रिपिंग करने की तैयारी में जुटा है। बिजली व्यवस्था अब स्काडा सिस्टम से कंट्रोल होगी। इसके तहत अगर किसी फीडर के अंतर्गत फॉल्ट या कटौती होती है तो स्काडा उसे ऑटोमैटिक दूसरे फीडर से जोड़कर आपूर्ति शुरू कर देगा। वर्तमान में फाल्ट आने पर सब स्टेशन या फीडर बंद हो जाता है।
क्या है स्काडा सिस्टम
- स्काडा सिस्टम एक कंट्रोल रूम से चालित होगा, कम्यूनिकेशन, सर्वर, यूपीएस आदि रूम बनाए जाएंगे
- सिस्टम से उपकेंद्रों, फीडरों, ट्रांसफॉर्मरों एवं पोल के साथ वितरण लाइनों को आरएमयू (रिंग मेन यूनिट) से एक-दूसरे में जोड़ा जाएगा
- शहर के 1400 स्थानों आरएमयू लगाए जाएंगे, हर आरएमयू का अलग-अलग कोड नंबर होगा, इन्ही स्थानों पर दर्जनों टॉवर लगेंगे
स्काडा में ऐसे होती है निगरानी
स्काडा में स्थापित कमरे में कंप्यूटर स्क्रीन पर उपभोक्ताओं की गतिविधियों और बिजली व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाएगी। किसी क्षेत्र में फॉल्ट आने पर उसकी जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर तत्काल दिखेगी। जिस किस कोड नंबर के आरएमयू वाले क्षेत्र में फाल्ट है। वहां कंट्रोल अफसर क्षेत्र के संबंधित अभियंता को सूचना देगा और फाल्ट दूर होने तक निगरानी करता रहेगा।
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स्मार्ट सिटी के तहत बिजली व्यवस्था हाईटेक होगी। इसके लिए कार्यवाही चल रही है। यह योजना अभी टेंडर प्रक्रिया में हैं। आने वाले दिनों में बिजली व्यवस्था भी बेहतर होगी। -गौरांग राठी, सीईओ स्मार्ट सिटी
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स्मार्ट सिटी और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम शहर की बिजली व्यवस्था को हाईटेक व नो-ट्रिपिंग करने की तैयारी में जुटा है। बिजली व्यवस्था अब स्काडा सिस्टम से कंट्रोल होगी। इसके तहत अगर किसी फीडर के अंतर्गत फॉल्ट या कटौती होती है तो स्काडा उसे ऑटोमैटिक दूसरे फीडर से जोड़कर आपूर्ति शुरू कर देगा। वर्तमान में फाल्ट आने पर सब स्टेशन या फीडर बंद हो जाता है।
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क्या है स्काडा सिस्टम
- स्काडा सिस्टम एक कंट्रोल रूम से चालित होगा, कम्यूनिकेशन, सर्वर, यूपीएस आदि रूम बनाए जाएंगे
- सिस्टम से उपकेंद्रों, फीडरों, ट्रांसफॉर्मरों एवं पोल के साथ वितरण लाइनों को आरएमयू (रिंग मेन यूनिट) से एक-दूसरे में जोड़ा जाएगा
- शहर के 1400 स्थानों आरएमयू लगाए जाएंगे, हर आरएमयू का अलग-अलग कोड नंबर होगा, इन्ही स्थानों पर दर्जनों टॉवर लगेंगे
स्काडा में ऐसे होती है निगरानी
स्काडा में स्थापित कमरे में कंप्यूटर स्क्रीन पर उपभोक्ताओं की गतिविधियों और बिजली व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाएगी। किसी क्षेत्र में फॉल्ट आने पर उसकी जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर तत्काल दिखेगी। जिस किस कोड नंबर के आरएमयू वाले क्षेत्र में फाल्ट है। वहां कंट्रोल अफसर क्षेत्र के संबंधित अभियंता को सूचना देगा और फाल्ट दूर होने तक निगरानी करता रहेगा।
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स्मार्ट सिटी के तहत बिजली व्यवस्था हाईटेक होगी। इसके लिए कार्यवाही चल रही है। यह योजना अभी टेंडर प्रक्रिया में हैं। आने वाले दिनों में बिजली व्यवस्था भी बेहतर होगी। -गौरांग राठी, सीईओ स्मार्ट सिटी