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Gyanvapi Case : ज्ञानवापी में मंदिर की बात सदियों पुरानी, कमीशन की कार्यवाही में सच आ चुका है सामने

Fri, 27 May 2022 09:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी 
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 27 May 2022 09:33 AM IST
सार

अंजुमन के आवेदन के खिलाफ वादी पक्ष ने अदालत में दाखिल किया 10 पेज का जवाब। वादी पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बताया, ईशान कोण में स्थित श्रृंगार गौरी भी एक प्रमाण है। 

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The temple in Gyanvapi is centuries old, the truth has come to the fore in the commission proceedings
Gyanvapi Masjid Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी वाद की पोषणीयता पर चल रही सुनवाई के बीच बृहस्पतिवार को वादी पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से ऑर्डर 7 रूल 11 पर दिए गए आवेदन पर 10 पेज का जवाब दाखिल किया। इसमें उन्होंने दावा किया है कि ज्ञानवापी में मंदिर की बात तो सदियों पुरानी है और हाल ही में कमीशन की कार्यवाही में भी सच सामने आ चुका है। उन्होंने ईशान कोण में स्थित मां श्रृंगार गौरी के मंदिर को भी प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत करते हुए दावा किया है कि हिंदु धर्म में विग्रह स्थापित होते हैं।

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जिला जज की अदालत में दाखिल जवाब में 42 बिंदुओं में अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने वाद को सुनने योग्य बताते हुए मामले में आगे की कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने आर्डर 7 रुल 11 के सात मामलों का भी जिक्र करते हुए अपना पक्ष रखा है।

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किताब में अंजुमन इंतजामिया के अवैधानिक कब्जे का  जिक्र

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के मामला खारिज करने की मांग के आवेदन का बिंदुवार जवाब देते हुए बताया, डॉ. एएस अल्टेकर की किताब हिस्ट्री ऑफ बनारस में साफ है कि यहां पूजा-अर्चना के प्रमाण उपलब्ध हैं। इसके साथ ही इस किताब में अंजुमन इंतजामिया के अवैधानिक कब्जे का भी जिक्र किया गया है। 

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हाल में हुई कमीशन की कार्यवाही को भी जवाब में शामिल करते हुए कहा है कि सभी प्रमाण हिंदू धर्म के पक्ष में हैं और साफ है कि यहां मंदिर तोड़कर वर्तमान निर्माण स्थापित है। अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वाद खारिज करने से साफ इनकार किया और सुनवाई का आदेश पारित किया है।

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ऐसे में सभी तथ्यों को देखते हुए अंजुमन इंतजामिया कमेटी के आवेदन को निरस्त कर दिया जाए। यहां बता दें कि जिला जज की अदालत में सबसे पहले मुस्लिम पक्ष के उस आवेदन पर सुनवाई की जा रही है, जिसमें उन्होंने वाद को खारिज करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने विशेष उपासना अधिनियम 1991 का हवाला देते हुए सात बिंदुओं में अपनी बात कही है।




स्वयंभू शिवलिंग से छेड़छाड़ को सीआरपीएफ ने पकड़ा
वादी पक्ष के अधिवक्ता विष्णु जैन ने मस्जिद परिसर में मौजूद साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दावा किया सीआरपीएफ ने इसे पकड़ा है। उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर में मौजूद चकरी को लेकर लोग फव्वारा का हिस्सा बताते हुए लेकर जा रहे थे। सीआरपीएफ ने उन्हें पकड़कर सामान स्टोर में रखवाया। उन्होंने मांग की कि पूरे परिसर की निगरानी चाक चौबंद होनी चाहिए। 

बिसेन ने भी लगाया छेड़छाड़ का आरोप

विश्व वैदिक सनातन संघ के संस्थापक जितेंद्र सिंह बिसेन ने चौक थाने में शिकायती पत्र देकर ज्ञानवापी परिसर में मंदिर का दावा किया है और कहा कि इसके स्वरूप से लगातार छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

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