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भय से खाली हो गई थीं गलियां, चौराहों पर पसरा था सन्नाटा

Tue, 07 Jun 2022 01:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 01:30 AM IST
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The streets were empty of fear, there was silence at the intersections
2006 में संकट मोचन मंदिर और कैंट स्टेशन पर ब्लास्ट के बाद काशी में जगह-जगह बम मिलने की अफवाह फैली थी। दो धमाके के बाद तीसरा कूकर बम दशाश्वमेध मार्ग स्थित जम्मू कोठी के सामने मिला था, जिसे बाबू लाल मिस्त्री ने डिफ्यूज किया था। इसके बाद गोदौलिया सहित विभिन्न प्रमुख स्थानों पर बम मिलने की अफवाह ने रफ्तार पकड़ ली। रात भर पुलिस की गाड़ियां हूटर बजाते हुए सूचनाओं पर इधर उधर दौड़तीं रहीं।
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घायलों की चीख पुकार और अफरातफरी भरे माहौल में लोग इस कदर भयभीत थे कि अगला बम विस्फोट न जाने कहां हो जाए। अधिकतर लोग उस शाम जल्दी घर पहुंच गए थे। रतजग्गा करने वाली काशी सन्नाटे में चली गई थी। देर रात तक चौराहों पर खुली रहने वाली चाय की दुकानें, गुलजार रहने वाली अड़ी भाग खड़ी हुई थी। डेढ़ दशक पूर्व इतनी आधुनिकता नहीं थी कि लोग मोबाइल पर एक दूसरे का हालचाल जान सके। ऐसे में हर मन भयभीत था। सशंकित मन से लोग पूरी रात जागते रहे।
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एंबुलेंस पड़ गई थी कम, ऑटो चालक बने मददगार
संकट मोचन मंदिर के बाद कैंट स्टेशन पर बम धमाके के बाद घायलों को अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस की संख्या कम पड़ गई थी। ऑटो वालों ने कमान संभाली और घायलों को निशुल्क अस्पताल भिजवाया। खून से सने घायलों को फर्श से उठाकर ऑटो वालों ने बीएचयू, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में भर्ती कराया। पुलिस के साथी बने ऑटो वालों की मदद कैंट स्टेशन पर कुलियों ने भी की। कैंट स्टेशन बम धमाके के बाद मांस के लोथड़े दीवारों, छतों और पंखों में अटके पड़े थे। सर्कुलेटिंग एरिया में खड़े ऑटो चालक सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे। रेलवे से लेकर मंडलीय अस्पताल में बेड कम पड़ गए थे।
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कैट स्टेशन पर खून से लाल हो गई थीं दीवारें
कैंट रेलवे स्टेशन पर बम धमाके ने रेल मंत्रालय को हिलाकर रख दिया था। परेड कोठी में बैटरी की दुकान चलाने वाले शंभू अग्रहरी कहते हैं कि धमाका ऐसा था कि दुकान तक आवाज आई थी। ऐसा लगा कि स्टेशन पर क्या हो गया। कुछ ही क्षण में लोगों के भागने और दौड़ने का जो क्रम शुरू हुआ कि वह पूरी रात लगा रहा। धमाके के तुरंत बाद स्टेशन पर पहुंचा था, वहां का मंजर भयावह था। स्टेशन की छत पर किसी का हाथ, यात्री हाल में टंगे पंखे पर किसी का पैर अटका हुआ था। पर्यटन बूथ के पास धमाके से फर्श दो से तीन फीट गहरा गया था। दीवारें खून से रंग गई थी। दृश्य देख समझ नहीं आया कि क्या करें। छोटे-छोटे बच्चे यात्रियों के शव के पास बिलख रहे थे। बहुत ही हृदय विदारक घटना थी। वलीउल्लाह को फांसी से उन आत्माओं को शांति मिलेगी।

अधिवक्ता ने सबसे पहले दी थी एसएसपी को सूचना
महमूरगंज निवासी अधिवक्ता और सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विवेक शंकर तिवारी बताते हैं कि धमाके की सूचना सबसे पहले कार्यवाहक एसएसपी परेश पांडेय को दी थी। विवेक बताते हैं कि बेटे का मुंडन संस्कार कार्यक्रम दो दिन बाद था। निमंत्रण कार्ड बांटने के लिए लंका के साकेत नगर कॉलोनी जा रहा था। जैसे ही कॉलोनी के मोड़ पर पहुंचा था कि एक धमाका हुआ। कुछ ही देर बाद दूसरा धमाका हुआ तो लगा कि कुछ हो गया और गाड़ी वहीं रोक दी। कुछ ही देर में लोगों को भागते, दौड़ते देखा तो तुरंत संकट मोचन मंदिर के पास छेली लाल की दुकान पर खड़ा हो गया। वहीं, से पुलिस अधीक्षक ग्रामीण परेश पांडेय को फोन कर घटना की जानकारी दी। उस समय शहर के कार्यवाहक एसएसपी परेश पांडेय ही थे। दस मिनट के अंदर एसएसपी फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे।
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