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Varanasi News: नाक कटी तो लिखा गया लंका के संहार का विधान, छल से हुआ सीताहरण

Sun, 11 Oct 2026 01:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:18 AM IST
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The severing of the nose paved the way for the destruction of Lanka Sita was abducted through deceit.
श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम काशी की लीला में शनिवार को भरत मनावन के प्रसंग का मंचन करत
वाराणसी। रामनगर की रामलीला के 16वें दिन शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध, सीताहरण और रावण-जटायु युद्ध की लीला संपन्न हुई। वहीं, श्री आदि रामलीला लाट भैरव में चित्रकूट की पावन पृष्ठभूमि पर भरत मनावन और भाइयों के मिलन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
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रामनगर की लीला की शुरुआत पंचवटी प्रसंग से हुई। वन में श्रीराम और लक्ष्मण के रूप पर मोहित होकर शूर्पणखा ने सुंदर स्त्री का वेश धरकर विवाह का प्रस्ताव रखा। दोनों भाइयों द्वारा ठुकराए जाने पर क्रोधित होकर वह अपने असली राक्षसी रूप में आ गई और माता सीता की ओर झपटी। इस पर श्रीराम के संकेत पर लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए। अपमानित शूर्पणखा की गुहार पर बदला लेने पहुंचे खर-दूषण और उनकी सेना का प्रभु श्रीराम ने संहार कर दिया।
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इसके बाद शूर्पणखा ने लंका जाकर रावण को अपनी व्यथा सुनाई। रावण ने मामा मारीच के साथ मिलकर कपटपूर्ण योजना बनाई। मारीच स्वर्ण मृग बनकर पंचवटी पहुंचा। माता सीता के आग्रह पर श्रीराम मृग के पीछे गए। उनके बाण से आहत मारीच ने लक्ष्मण के स्वर में पुकार लगाई। सीता जी के कहने पर लक्ष्मण भी वन की ओर चले गए। इसी अवसर का लाभ उठाकर साधु के वेश में आए रावण ने छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लिया। मार्ग में गिद्धराज जटायु ने सीता जी की रक्षा के लिए रावण से भीषण युद्ध किया, किंतु रावण ने खड्ग से उनके पंख काट दिए।
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उधर, चिरईगांव के टूड़ी नगर, जाल्हूपुर में भी सीताहरण और जटायु प्रसंग का प्रभावी मंचन हुआ। काशी के लाट भैरव वरुणा संगम की रामलीला में भक्ति और प्रेम का अनूठा दृश्य देखने को मिला। भरत जी श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंचे। ‘भरत राम की मिलनी लखि, बिसरे सबही अपान’ चौपाई के गायन के बीच जैसे ही श्रीराम अपने अनुज भरत से गले मिले, पूरा परिसर भावुक हो उठा। आरती और प्रभु के जयकारों के साथ सभी स्थानों पर शनिवार की लीला को विराम दिया गया।
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