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ठंडई में मिलेगी फूलों की खुशबू, फलों की मिठास
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Tue, 22 Mar 2016 02:08 AM IST
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ठंडई
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बनारसी खानपान के चर्चे दुनिया में मशहूर हैं। चौखंभा की मलाई हो या ठठेरी बाजार की फूलों, फलों की ठंडई। इसकी मिठास और खुशबू के लोग सात समंदर पार तक दीवाने हैं। जिस तरह देश-दुनिया के किसी कोने से आने वाले लोग सुबह-ए-बनारस की छटा, गंगा आरती और बाबा के दर्शन करना नहीं भूलते, उसी तरह बनारस की ठंडई का स्वाद लेना भी उनकी चाहत का एक हिस्सा होता है। होली पर बनारस की मशहूर गलियों में ठंडई के एक से एक फ्लेवर आ गए हैं। फूलों, फलों के साथ पान की ठंडई खास होगी।
अपनी नाजोअदा के लिए मशहूर बनारस में होली पर ठंडई की खास वेराइटी पर्यटकों, श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। इस ठंडई को इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, अमेरिका, कनाडा, दक्षिण कोरिया के पर्यटक खूब पसंद कर रहे हैं। गायघाट निवासी वसंत शंकर पाठक की ठठेरी बाजार के मोती कटरा में ठंडई की मशहूर दुकान पर इन दिनों रात के 12 बजे तक शौकीनों की भीड़ लग रही है। वसंत बताते हैं कि यह उनकी तीसरी पीढ़ी है। दादा शंभूनाथ पाठक भी ठंडई ही बनाते थे।
उनके हाथ ही ठंडई तब भी विदेश जाती थी। होली के लिए इनके पास गुजराती, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी और सिंधी समाज के कई परिवारों ने अलग-अलग बैराइटी के आर्डर दिए हैं। शाम चार बजे वसंत जब अपनी दुकान पर आते हैं तो रात तक उन्हें फिर फुर्सत नहीं रहती। इसी तरह गोदौलिया चौराहे की एक साथ आठ दुकानों के सामने तो ठंडई के शौकीनों की वजह से ही जाम लगा रहता है।
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अपनी नाजोअदा के लिए मशहूर बनारस में होली पर ठंडई की खास वेराइटी पर्यटकों, श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। इस ठंडई को इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, अमेरिका, कनाडा, दक्षिण कोरिया के पर्यटक खूब पसंद कर रहे हैं। गायघाट निवासी वसंत शंकर पाठक की ठठेरी बाजार के मोती कटरा में ठंडई की मशहूर दुकान पर इन दिनों रात के 12 बजे तक शौकीनों की भीड़ लग रही है। वसंत बताते हैं कि यह उनकी तीसरी पीढ़ी है। दादा शंभूनाथ पाठक भी ठंडई ही बनाते थे।
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उनके हाथ ही ठंडई तब भी विदेश जाती थी। होली के लिए इनके पास गुजराती, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी और सिंधी समाज के कई परिवारों ने अलग-अलग बैराइटी के आर्डर दिए हैं। शाम चार बजे वसंत जब अपनी दुकान पर आते हैं तो रात तक उन्हें फिर फुर्सत नहीं रहती। इसी तरह गोदौलिया चौराहे की एक साथ आठ दुकानों के सामने तो ठंडई के शौकीनों की वजह से ही जाम लगा रहता है।
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