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Varanasi News: साल भर का श्रद्धालुओं का चढ़ावा, धनतेरस पर बन जाता है मां अन्नपूर्णा का खजाना
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29 अक्तूबर से दो नवंबर तक मां अन्नपूर्णा के मंदिर से मिलेगा अन्न-धन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बाबा विश्वनाथ को अन्न-धन की भिक्षा देने वाली मां अन्नपूर्णा के दरबार में पांच दिनों तक देश भर के श्रद्धालु उमड़ेंगे। लगातार दूसरे साल पांच दिनों तक मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को अन्न और धन का खजाना भी मिलेगा। इस बार श्रद्धालुओं को चांदी के सिक्के भी खजाने के रूप में बांटे जाएंगे।
अन्न और धन की बढ़ोतरी की कामना से श्रद्धालु इसे श्रद्धा के साथ लेने के लिए 24 घंटे पहले से ही कतार में लग जाते हैं। धनतेरस से अन्नकूट तक श्रद्धालुओं को अन्नपूर्णा मंदिर से खजाना बांटने की तैयारी चल रही है। मंदिर से मिलने वाला खजाने के रूप में मिलने वाला एक रुपये का सिक्का और लावा लेने के लिए देश भर से श्रद्धालु काशी आते हैं। माता के मंदिर में साल भर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सिक्कों को खजाने के रूप में ही बांटा जाता है। इस बार श्रद्धालुओं को चांदी के सिक्के भी वितरित किए जाएंगे। मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि आठ पीढि़यों से खजाना वितरण की परंपरा अनवरत चली आ रही है। मंदिर में अन्नकूट के भोग के लिए तैयारियां दशहरे से ही शुरू हो चुकी हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बाबा विश्वनाथ को अन्न-धन की भिक्षा देने वाली मां अन्नपूर्णा के दरबार में पांच दिनों तक देश भर के श्रद्धालु उमड़ेंगे। लगातार दूसरे साल पांच दिनों तक मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को अन्न और धन का खजाना भी मिलेगा। इस बार श्रद्धालुओं को चांदी के सिक्के भी खजाने के रूप में बांटे जाएंगे।
अन्न और धन की बढ़ोतरी की कामना से श्रद्धालु इसे श्रद्धा के साथ लेने के लिए 24 घंटे पहले से ही कतार में लग जाते हैं। धनतेरस से अन्नकूट तक श्रद्धालुओं को अन्नपूर्णा मंदिर से खजाना बांटने की तैयारी चल रही है। मंदिर से मिलने वाला खजाने के रूप में मिलने वाला एक रुपये का सिक्का और लावा लेने के लिए देश भर से श्रद्धालु काशी आते हैं। माता के मंदिर में साल भर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सिक्कों को खजाने के रूप में ही बांटा जाता है। इस बार श्रद्धालुओं को चांदी के सिक्के भी वितरित किए जाएंगे। मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि आठ पीढि़यों से खजाना वितरण की परंपरा अनवरत चली आ रही है। मंदिर में अन्नकूट के भोग के लिए तैयारियां दशहरे से ही शुरू हो चुकी हैं।
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