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शीर्ष विवि की सूची में भारत के साथ भेदभाव
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:51 AM IST
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छात्रसंघ उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया, काशी विद्यापीठ के वीसी पृथ्वीश नाग और छात्रसंघ अध्यक्ष आयुषी श्रीमाली को किया गया सम्मानित।
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विश्व के विश्वविद्यालयों में गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं होता है। यही वजह है कि दुनिया के टॉप-200 विश्वविद्यालयों में भारत के किसी विश्वविद्यालय को जगह नहीं मिल पाती। शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची बनाने में भारत के साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन करने वाली एजेंसी में 70 फीसदी लोग अमेरिकी होते हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया ने मंगलवार को काशी विद्यापीठ छात्रसंघ उद्घाटन समारोह में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि शीर्ष विश्वविद्यालयों में भारतीय संस्थानों को स्थान इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि एक प्रचलित धारणा के तहत मूल्यांकन अंग्रेजी को आधार मानकर ही किया जाता है।
विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययनपीठ सभागार में बोलते हुए कठेरिया ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जल्द ही विश्व स्तर के दस निजी और दस सरकारी विश्वविद्यालय खोले जाएंगे। इस साल बजट में इसकी घोषणा हो चुकी है। नए विश्वविद्यालय खोले जान की प्रक्रिया चल रही है। छात्रसंघ पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कठेरिया ने कहा कि चुनाव में भागीदारी के साथ-साथ पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है जिसे दूर करने के उद्देश्य से ही प्रधानमंत्री ने अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाया है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने काशी विद्यापीठ के स्थापना से जुड़े इतिहास की चर्चा करते हुए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिलाए जाने की मांग रखी। इस पर मंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इससे पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आयुषी श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. केके सिंह और धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष डॉ. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने किया। कार्यक्रम में एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, छात्रसंघ उपाध्यक्ष अशोक यादव, महामंत्री नीरज पांडेय, पुस्तकालय मंत्री अमित यादव, विद्यार्थी परिषद महानगर मंत्री दिनेश दीक्षित, रविभान सिंह, अनित पटेल सहित कई लोग रहे।
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विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययनपीठ सभागार में बोलते हुए कठेरिया ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जल्द ही विश्व स्तर के दस निजी और दस सरकारी विश्वविद्यालय खोले जाएंगे। इस साल बजट में इसकी घोषणा हो चुकी है। नए विश्वविद्यालय खोले जान की प्रक्रिया चल रही है। छात्रसंघ पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कठेरिया ने कहा कि चुनाव में भागीदारी के साथ-साथ पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है जिसे दूर करने के उद्देश्य से ही प्रधानमंत्री ने अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाया है।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने काशी विद्यापीठ के स्थापना से जुड़े इतिहास की चर्चा करते हुए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिलाए जाने की मांग रखी। इस पर मंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इससे पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आयुषी श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. केके सिंह और धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष डॉ. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने किया। कार्यक्रम में एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, छात्रसंघ उपाध्यक्ष अशोक यादव, महामंत्री नीरज पांडेय, पुस्तकालय मंत्री अमित यादव, विद्यार्थी परिषद महानगर मंत्री दिनेश दीक्षित, रविभान सिंह, अनित पटेल सहित कई लोग रहे।
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