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बड़े पर्दे पर जीवंत होगी कथक क्वीन की जीवन यात्रा
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कथक क्वीन सितारा देवी की 101वीं जयंती पर उनके चाहने वालों को उनके जीवन यात्रा बड़े पर्दे पर जीवंत होगी। सितारा देवी के बेटे रंजीत बारूत ने इसकी घोषणा कर दी है। सितारा देवी की 102वीं जयंती पर सितारा देवी के प्रशंसकों को उनकी बायोपिक देखने को मिलेगी। संभावना है कि सितारा देवी की नातिन ही बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाएंगी।
सितारा देवी की बेटी जयंतीमाला मिश्रा फिल्म का निर्देशन करेंगे और स्क्रिप्ट रंजीत बारूत ने तैयार की है। जयंती माला मिश्रा ने बताया कि फिल्म में सितारा देवी की जीवनयात्रा के सभी पहलू शामिल होंगे। फिल्म पूरी तरह से बनारस पर ही आधारित होगी। 1920 में कोलकाता में जन्म, तीन साल की उम्र में बनारस आगमन, पं. शंभु महाराज तथा पंडित बिरजू महाराज के पिता पं. अच्छन महाराज से नृत्य की आरंभिक शिक्षा ग्रहण करने, 11 वर्ष की उम्र में ही फिल्म नगरी मुंबई के लिए प्रस्थान करने के प्रसंग फिल्म में होंगे।
मात्र बीस वर्ष की उम्र में चंबल के डाकुओं से घिरने के बाद उन्होंने अपने नृत्य कौशल से डाकुओं को अपने आगे नतमस्तक होने पर विवश कर दिया था। यह घटना वर्ष 1940 के आसपास की है। वर्ष 1965 में पं. किशन महाराज के साथ दिल्ली के एक कार्यक्रम में सेना के एक जवान की फरमाइश पर उन्होंने बिना किसी तैयारी के अपने घुंघरूओं से मशीनगन की तड़तड़ाहट निकाल दी थी।
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सितारा देवी को भारत सरकार ने दो बार पद्मभूषण देने की घोषणा की, लेकिन दोनों ही बार उन्होंने इंकार कर दिया। उनके इनकार के कारणों का खुलासा भी फिल्म करेगी। सितारा देवी के शिष्य व नाती विशाल कृष्णा ने बताया कि फिल्म में सितारा देवी के अलग-अलग उम्र के हिसाब से किरदार निभाने के लिए हर उम्र की कथक नृत्यांगनाओं को मुंबई में ऑडिशन के लिए बुलाया गया है। सितारा देवी की बायोपिक की घोषणा के बाद फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों ने ट्वीट करके हर्ष व्यक्त किया है।
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सितारा देवी की बेटी जयंतीमाला मिश्रा फिल्म का निर्देशन करेंगे और स्क्रिप्ट रंजीत बारूत ने तैयार की है। जयंती माला मिश्रा ने बताया कि फिल्म में सितारा देवी की जीवनयात्रा के सभी पहलू शामिल होंगे। फिल्म पूरी तरह से बनारस पर ही आधारित होगी। 1920 में कोलकाता में जन्म, तीन साल की उम्र में बनारस आगमन, पं. शंभु महाराज तथा पंडित बिरजू महाराज के पिता पं. अच्छन महाराज से नृत्य की आरंभिक शिक्षा ग्रहण करने, 11 वर्ष की उम्र में ही फिल्म नगरी मुंबई के लिए प्रस्थान करने के प्रसंग फिल्म में होंगे।
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मात्र बीस वर्ष की उम्र में चंबल के डाकुओं से घिरने के बाद उन्होंने अपने नृत्य कौशल से डाकुओं को अपने आगे नतमस्तक होने पर विवश कर दिया था। यह घटना वर्ष 1940 के आसपास की है। वर्ष 1965 में पं. किशन महाराज के साथ दिल्ली के एक कार्यक्रम में सेना के एक जवान की फरमाइश पर उन्होंने बिना किसी तैयारी के अपने घुंघरूओं से मशीनगन की तड़तड़ाहट निकाल दी थी।
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सितारा देवी को भारत सरकार ने दो बार पद्मभूषण देने की घोषणा की, लेकिन दोनों ही बार उन्होंने इंकार कर दिया। उनके इनकार के कारणों का खुलासा भी फिल्म करेगी। सितारा देवी के शिष्य व नाती विशाल कृष्णा ने बताया कि फिल्म में सितारा देवी के अलग-अलग उम्र के हिसाब से किरदार निभाने के लिए हर उम्र की कथक नृत्यांगनाओं को मुंबई में ऑडिशन के लिए बुलाया गया है। सितारा देवी की बायोपिक की घोषणा के बाद फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों ने ट्वीट करके हर्ष व्यक्त किया है।