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धीरे-धीरे गायब हो रहीं धरोहर, सात स्मारकों का पता नहीं
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कला, संस्कृति और धर्म की नगरी काशी विश्व के प्राचीनतम शहरों में से एक है। बनारस ने देश को राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ दिया है। विश्व की धरोहर सूची में यहां के गंगा घाट, संगीत और सारनाथ भी शामिल हैं। बावजूद इसके बनारस की धरोहर की हालत ज्यादा बेहतर नहीं है। राष्ट्रीय महत्व के स्मारक वाराणसी और मिर्जापुर में सबसे अधिक हैं, लेकिन रखरखाव व जानकारी के अभाव में अब यह धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं। अभी तक राष्ट्रीय महत्व के सात स्मारक गायब हो चुके हैं।
भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की सूची में वाराणसी के 19 राष्ट्रीय महत्व के स्मारक दर्ज हैं। इसमें से मौके पर सात का तो पता ही नहीं है। वहीं सारनाथ में तीन, राजघाट में दो, संस्कृत विश्वविद्यालय में एक, राजेंद्र प्रसाद घाट की वेधशाला, पंचगंगा घाट स्थित धरहरा की हालत कुछ ठीक है। बाकी चार स्मारकों की हालत खराब है।
काशी की धरोहरों पर शोध कर रहे मिलिंद श्रीवास्तव, नागेश पांडेय और नित्यानंद राय ने बताया कि तिलमापुर, राजनारायणपार्क स्थित विक्टोरिया मेमोरियल, चौबेपुर कैथी के पास चंद्रावती स्थित किले की हालत बहुत खराब है। यही स्थिति रही तो ये ऐतिहासिक राष्ट्रीय महत्व के स्मारक विलुप्त हो जाएंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वेबसाइट से पता चलता है कि पूर्वांचल के 15 जिलों में 112 राष्ट्रीय महत्व के स्मारक हैं। इसमें से 19 वाराणसी में हैं।
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वेबसाइट पर चेतगंज स्थित मजार का जिक्र है लेकिन मौके पर यह कहां है किसी को पता नहीं है। चंद्रावती में फायर मौजैक ब्रिक फोर्ट के अवशेष का जिक्रहै लेकिन इसकी ऐतिहासिकता और राष्ट्रीय महत्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वेबसाइट पर गंज व बरईपुर स्थित अति प्राचीन बुद्धिस्ट साइट जिसे चौखंडी स्तूप के नाम से जाना जाता है और यह सड़क से ही नजर आता है। हातिमपुर के बारे में कोई यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह बनारस में कहां है। यूरोपियन अधिकारियों की मजार भी मौके पर नहीं है। लेफ्टिनेंट कर्नल पोग्संस टांब, म्युटनी मान्यूमेंट्स भी मौके से गायब है।
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भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की सूची में वाराणसी के 19 राष्ट्रीय महत्व के स्मारक दर्ज हैं। इसमें से मौके पर सात का तो पता ही नहीं है। वहीं सारनाथ में तीन, राजघाट में दो, संस्कृत विश्वविद्यालय में एक, राजेंद्र प्रसाद घाट की वेधशाला, पंचगंगा घाट स्थित धरहरा की हालत कुछ ठीक है। बाकी चार स्मारकों की हालत खराब है।
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काशी की धरोहरों पर शोध कर रहे मिलिंद श्रीवास्तव, नागेश पांडेय और नित्यानंद राय ने बताया कि तिलमापुर, राजनारायणपार्क स्थित विक्टोरिया मेमोरियल, चौबेपुर कैथी के पास चंद्रावती स्थित किले की हालत बहुत खराब है। यही स्थिति रही तो ये ऐतिहासिक राष्ट्रीय महत्व के स्मारक विलुप्त हो जाएंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वेबसाइट से पता चलता है कि पूर्वांचल के 15 जिलों में 112 राष्ट्रीय महत्व के स्मारक हैं। इसमें से 19 वाराणसी में हैं।
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वेबसाइट पर चेतगंज स्थित मजार का जिक्र है लेकिन मौके पर यह कहां है किसी को पता नहीं है। चंद्रावती में फायर मौजैक ब्रिक फोर्ट के अवशेष का जिक्रहै लेकिन इसकी ऐतिहासिकता और राष्ट्रीय महत्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वेबसाइट पर गंज व बरईपुर स्थित अति प्राचीन बुद्धिस्ट साइट जिसे चौखंडी स्तूप के नाम से जाना जाता है और यह सड़क से ही नजर आता है। हातिमपुर के बारे में कोई यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह बनारस में कहां है। यूरोपियन अधिकारियों की मजार भी मौके पर नहीं है। लेफ्टिनेंट कर्नल पोग्संस टांब, म्युटनी मान्यूमेंट्स भी मौके से गायब है।