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शक और गलतफहमी से बिखरे रिश्तों के घाव भर रहा ‘मरहम’
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बदलते सामाजिक ताने-बाने ने परिवार की मजबूत डोर पर भी चोट की है। मामूली विवादों में शक, गलत फहमियों की वजह से रिश्तों में दरार बढ़ रही है। ऐसे में परिवार बिखर जाते हैं, लेकिन इन गलत फहमियों को दूर कर फिर से रिश्ते में मजबूती लाने का काम कर रहा है महिला सहायता प्रकोष्ठ। इस साल प्रकोष्ठ ने 168 परिवारों को टूटने से बचाया है। दोनों पक्षों की काउंसिलिंग के जरिए दांपत्य जीवन में विवादों का निपटारा किया जा रहा है। काउंसिलिंग रूपी मरहम से घाव भरने के बाद ये परिवार खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
शिवपुर की एक महिला ने शिकायत थी कि पति ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। घर बुलाने को तैयार नहीं हैं। वहीं, यह मामला जब महिला सहायता प्रकोष्ठ के पास पहुंचा तो प्रभारी नीलम सिंह ने आमने-सामने बैठकर दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की और विवाद सुलझ गया। नीलम सिंह बताती हैं कि रोज महिलाएं पारिवारिक विवादों को लेकर आती हैं। कुछ विवादों का कारण शक होता है। तो कुछ परिवार वालों द्वारा लगाए गए आरोप विकराल रूप ले लेते हैं। शिकायत मिलने के बाद प्रयास होता है कि मामले का निस्तारण आपसी सहमति से हो जाए।
अब तक आ चुकी हैं 633 शिकायतें
महिला सहायता प्रकोष्ठ में इस वर्ष 633 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। 237 मामले पहले से न्यायालय में विचाराधीन हैं। वहीं, 168 मामलों को सुलझा लिया गया।
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शिवपुर की एक महिला ने शिकायत थी कि पति ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। घर बुलाने को तैयार नहीं हैं। वहीं, यह मामला जब महिला सहायता प्रकोष्ठ के पास पहुंचा तो प्रभारी नीलम सिंह ने आमने-सामने बैठकर दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की और विवाद सुलझ गया। नीलम सिंह बताती हैं कि रोज महिलाएं पारिवारिक विवादों को लेकर आती हैं। कुछ विवादों का कारण शक होता है। तो कुछ परिवार वालों द्वारा लगाए गए आरोप विकराल रूप ले लेते हैं। शिकायत मिलने के बाद प्रयास होता है कि मामले का निस्तारण आपसी सहमति से हो जाए।
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अब तक आ चुकी हैं 633 शिकायतें
महिला सहायता प्रकोष्ठ में इस वर्ष 633 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। 237 मामले पहले से न्यायालय में विचाराधीन हैं। वहीं, 168 मामलों को सुलझा लिया गया।