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Varanasi News: बीएचयू में नीदरलैंड के प्रोफेसर बोले - गंगा नदी, गलियां, घाट और मंदिर ही काशी को गढ़ते हैं

Fri, 09 Jan 2026 02:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 02:03 AM IST
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The Ganges River, streets, ghats and temples are what shape Kashi, says a professor from the Netherlands at BHU
गंगा नदी, गलियां, घाट और मंदिर ही काशी को गढ़ते हैं। इस शहर को सांस्कृतिक फ्लेवर में ढालते हैं। नीदरलैंड्स के लीडेन विश्वविद्यालय के प्रो. प्रलय कानुंगो ने बीएचयू में हिंदूस्केप पर बात की। पंडित दीनदयाल उपाध्याय चेयर के इस वाराणसी का हिंदूस्केप: निर्माण, परिवर्तन और प्रतिद्वंद्विता विषय पर उन्होंने कहा कि यह अर्जुन अप्पादुरई द्वारा दिए गए रिलिजियस्केप (धार्मिक परिदृश्य) की अवधारणा के तहत आती है। हिंदूस्केप धर्म आधारित सीमाओं के भीतर कार्य करता है न कि एक स्वतंत्र श्रेणी के रूप में। उन्होंने व्याख्यान की शुरुआत में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और दर्शन को बताया। प्रो. कानुंगो ने गंगा नदी, घाटों, मंदिरों, गलियों और धार्मिक अनुष्ठानों की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये तत्व काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को गढ़ते हैं। उन्होंने इस्लामोस्केप के उद्भव, औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक काल में शहर के पुनर्निर्माण और धार्मिक परिदृश्य में आए बदलावों को बताया। व्याख्यान में काशी को अविमुक्त क्षेत्र बताते हुए मणिकर्णिका घाट के आध्यात्मिक महत्व और मोक्ष की अवधारणा बताई। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। संचालन चेयर के समन्वयक प्रो. तेज प्रताप सिंह ने किया।
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