फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   The 'future' of the country sitting on the floor in the cold of cold

कड़ाके की ठंड में अर्श की चाह में फर्श पर बैठा देश का ‘भविष्य’

Tue, 28 Dec 2021 01:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 01:24 AM IST
विज्ञापन
The 'future' of the country sitting on the floor in the cold of cold
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय में सोमवार को अव्यवस्था का खामियाजा देश के भविष्य को भुगतना पड़ा। जब काउंसिंलिंग के बाद प्रमाणपत्रों की जांच के लिए संकाय पहुंचे छात्रों को जमीन पर बैठना पड़ा। उन्हें कक्षाओं में बिठाने को लेकर कोई इंतजाम नहीं दिखे। ये स्थिति तब थी जब विश्वविद्यालयों की तरफ से ही छात्रों को बुलाया गया था। प्रशासन को पता था कि सोमवार को छात्र पहुंचेंगे। बावजूद उनके बैठने की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। वहीं, संकाय की तरफ से बताया गया कि काउंसिंलिंग के साथ साथ प्रमाणपत्रों की जांच की वजह से छात्रों की संख्या ज्यादा हो गई थी। कॉलेज से आई टीम ने सही से निगरानी नहीं की।
विज्ञापन

कला संकाय में सोमवार को विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में दाखिले के लिए काउंसिलिंग के साथ ही प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाना था। दूरदराज से छात्र अभिभावकों संग सुबह सात बजे से ही पहुंचने लगे। आमतौर पर काउंसिलिंग के दौरान छात्रों को कमरों में बिठाया जाता है। उनकी रैंक के अनुसार प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाता है। इस तरह की स्थिति तब है जब कला संकाय में बड़ी संख्या में कमरे भी है और छात्रों के बैठने की व्यवस्था भी है, लेकिन सोमवार को अलग ही नजर दिखा। सुरक्षा गार्ड भी वहां तैनात थे, वह कुर्सी पर बैठकर छात्रों को बारी बारी से अंदर भेजते रहे। छात्र भी क्या करते, जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
विज्ञापन

यह बोले अभिभावक
अपनी नातिन की काउंसिलिंग के लिए सुबह छह बजे ही आ गए। जिस तरह की भीड़ है, उस हिसाब से व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन कहीं कुछ नहीं दिखा। कम से कम कमरे में बिठाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

- राजेंद्र यादव, गाजीपुर
देश में उत्कृष्ट संस्थानों में शामिल बीएचयू में दाखिले के दौरान इस तरह की अव्यवस्था होगी, ऐसा कभी सोचा ही नहीं था। बच्ची को लेकर सुबह आए। 8.30 बजे का समय दिया गया था, 11 बजे काउंसिलिंग शुरू हुई।
- चंद्रशेखर पांडेय, बिहार
काउंसिलिंग जैसा कार्य तो पहले से तय होता है। व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त थी। बच्चियां घंटों खड़ी रहीं, कुछ तो बेहोश हो गईं। कभी सर्वर डाउन तो कभी लंच ब्रेक के नाम पर काउंसिलिंग ठप रही।
- दीनदयाल गुप्ता, लहरतारा
न मास्क न सामाजिक दूरी
बढ़ते कोरोना के मामलों को देखकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोगों से कोविड प्रोटोकॉल के पालन की अपील कर चुके हैं। इसके बाद भी कला संकाय में कोई असर नहीं दिखा। छात्र छात्राओं ने सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया। अधिकांश बिना मास्क के नजर आए। सुरक्षा कर्मी, हो या शिक्षक हर कोई इधर से आ जा रहा था, लेकिन किसी की नजर नहीं पड़ी।

काउंसिलिंग में छात्रों के साथ अभिभावक भी पहुंचे थे। इस वजह से पांच हजार से अधिक लोगों की भीड़ हो गई थी। शुरू में थोड़ी सी समस्या जरूर रही, लेकिन बाद में प्रॉक्टोरियल बोर्ड को जानकारी देकर व्यवस्था दुरुस्त कराई गई। संकाय में क्लास रूम भी है और छात्रों के बैठने की व्यवस्था भी है। इसके बाद भी छात्र जमीन पर क्यों बैठे, यह समझ से परे हैं। संकाय की ओर से सहयोग किया गया। लगता है कि कॉलेज से जुड़े लोगों ने सही तरीके से मॉनीटरिंग नहीं की। इस वजह से ही ऐसा हुआ। - प्रो. विजय बहादुर सिंह, संकाय प्रमुख, कला संकाय
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed