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संक्रमित इंजेक्शन से पांच मरीजों की आंख की रोशनी खतरे में

Mon, 01 Feb 2016 02:19 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला Updated Mon, 01 Feb 2016 02:19 AM IST
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The five patients infected injection eyesight at risk

सर सुंदरलाल अस्पताल बीएचयू के नेत्र विभाग में संक्रमित इंजेक्शन लगाए जाने की वजह से पांच मरीजों की आंख की रोशनी खतरे में पड़ गई है।

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 आंख के परदे में सूजन आने की शिकायत लेकर आए सात मरीजों को ये इंजेक्शन लगाया गया था, जिनमें से पांच मरीजों ने अपनी एक आंख की रोशनी चली जाने की समस्या घरवालों से बताई।
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 रविवार को उनके परिवार वालों ने इंजेक्शन देने वाले बीएचयू चिकित्सक के खिलाफ लंका थाने में तहरीर दी। उधर, चिकित्सक का कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
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दवा कंपनी द्वारा संक्रमित इंजेक्शन बेचा गया है। सभी के आंख की पूरी रोशनी वापस आ जाएगी।
बीते 28 जनवरी को बीएचयू अस्पताल के नेत्र विभाग में सात मरीजों को डॉ. ओपीएस मौर्या के परामर्श पर एवेस्टीन इंजेक्शन लगाया गया था।
जिनकी आंखों के परदे (रेटिना) में सूजन की शिकायत होती है, उन्हें ये इंजेक्शन लगाया जाता है। इस इंजेक्शन की एक किट से दस मरीजों को सूई लगाई जाती है।
 सात मरीजों के तीमारदारों ने मिलकर 23,500 रुपये में इंजेक्शन की एक किट बीएचयू परिसर के बाहर लंका स्थित दवा की एक दूकान से खरीदी। 28 जनवरी को इंजेक्शन लगवाने के बाद मरीज अपने-अपने घर चले गए थे।
मगर, 29 जनवरी को सात में से पांच मरीज अपनी एक आंख की रोशनी जाने की शिकायत लेकर फिर से डॉक्टर के पास पहुंचे। तब डॉ. ओपीएस मौर्या ने आईएमएस बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से इंजेक्शन की जांच कराई।
डॉ. मौर्या का कहना है कि जांच रिपोर्ट में इंजेक्शन में ग्राम निगेटिव बैसिलाई नामक खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया। इससे आंख की रोशनी जाने की आशंका अधिक रहती है। इसी की वजह से मरीजों को दिक्कत हुई है।
इस पूरे मामले में उन्होंने इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी की गलती के चलते ही उसमें यह बैक्टीरिया विकसित हुआ है।

हालांकि, उनका कहना है कि मरीजों की आंख पूरी तरह से ठीक हो जाएगी। उधर, मरीजों के परिवार वालों का आरोप है कि जब डॉक्टर से आंख की रोशनी जाने की शिकायत की गई तो वे हमें निजी अस्पताल में दिखाने की सलाह देने लगे।
 उन्होंने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत लेकर मरीज लंका थाने पहुंचे और डॉक्टर के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।

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