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Varanasi News: पुरानी पेंशन बहाली और रेलों के निजीकरण की लड़ाई रहेगी जारी
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ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ( एआईआरएफ) का शताब्दी वर्ष सोमवार से शुरू हुआ। यूनियन के सदस्यों ने कैंट स्थित कार्यालय में समारोह मनाया। जिलाध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि शताब्दी वर्ष मेंं पुरानी पेंशन बहाली व रेलवे के निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने यूनियन की उपलब्धियों की चर्चा की और कहा कि आज ही दिन 1924 में यूनियन का गठन हुआ था। उस दौरान रेलवे में छोटी बड़ी कई यूनियनें थीं। फेडरेशन की आवाज को ब्रिटिश सरकार ने दबा दिया था। इसके बाद बिखरी हुई यूनियन एक हुई। 1960 में पांच रुपये महंगाई भत्ते की मांग के लिए हड़ताल हुई। इसमें पांच कर्मचारियों की मौत हो गई थी।
डीए फार्मूले को स्वीकार कराने के लिए भी लंबा आंदोलन चला था। इसमेें नौ कर्मियों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद संगठन पीछे नहीं हटा। बोनस के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। 1974 में 20 लाख रेल कर्मचारी थे। अब 12.50 लाख कर्मचारी हैं। आज ट्रेनोंं की संख्या 22 हजार है। कोरोना काल में 10 लाख से अधिक रेल कर्मचारी रोजाना काम पर रहे। उनकी कोशिश रही कि ऑक्सीजन की कमी न होने पाए। फल व सब्जी की आपूर्ति को बरकरार रहे। प्रवासी मजदूरों को घर तक पहुंचाया जाए। मुख्य कार्यक्रम लंदन में इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के मुख्यालय पर हुआ। इस कार्यक्रम से सभी लोग वर्चुअली जुड़े। कार्यक्रम में उपेंद्र पाठक, शिवलाल, राजकुमार, राजेंद्र श्रीवास्तव, प्रमोद आदि मौजूद रहे।
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इनसेट
डीएलडब्ल्यू मेंस यूनियन ने केक काटकर मनाया शताब्दी वर्ष
डीएलडब्ल्यू मेंस यूनियन की ओर से ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन का शताब्दी समारोह केक काटकर मनाया गया। बरेका में आयोजित कार्यक्रम में जोनल सेक्रेटरी डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि फेडरेशन के गठन कर्मचारियों के हित में काम के लिए हुआ है। जो फेडरेशन की ओर से लगातार किया जा रहा है। महामंत्री अरविंद कुमार ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन कर्मचारियों के लिए काम कर रहा है। इस दौरान अजय कुमार, अविनाश पाठक, अखिलेश कुमार, राजेश सिंह, अमित यादव आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने यूनियन की उपलब्धियों की चर्चा की और कहा कि आज ही दिन 1924 में यूनियन का गठन हुआ था। उस दौरान रेलवे में छोटी बड़ी कई यूनियनें थीं। फेडरेशन की आवाज को ब्रिटिश सरकार ने दबा दिया था। इसके बाद बिखरी हुई यूनियन एक हुई। 1960 में पांच रुपये महंगाई भत्ते की मांग के लिए हड़ताल हुई। इसमें पांच कर्मचारियों की मौत हो गई थी।
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डीए फार्मूले को स्वीकार कराने के लिए भी लंबा आंदोलन चला था। इसमेें नौ कर्मियों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद संगठन पीछे नहीं हटा। बोनस के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। 1974 में 20 लाख रेल कर्मचारी थे। अब 12.50 लाख कर्मचारी हैं। आज ट्रेनोंं की संख्या 22 हजार है। कोरोना काल में 10 लाख से अधिक रेल कर्मचारी रोजाना काम पर रहे। उनकी कोशिश रही कि ऑक्सीजन की कमी न होने पाए। फल व सब्जी की आपूर्ति को बरकरार रहे। प्रवासी मजदूरों को घर तक पहुंचाया जाए। मुख्य कार्यक्रम लंदन में इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के मुख्यालय पर हुआ। इस कार्यक्रम से सभी लोग वर्चुअली जुड़े। कार्यक्रम में उपेंद्र पाठक, शिवलाल, राजकुमार, राजेंद्र श्रीवास्तव, प्रमोद आदि मौजूद रहे।
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डीएलडब्ल्यू मेंस यूनियन ने केक काटकर मनाया शताब्दी वर्ष
डीएलडब्ल्यू मेंस यूनियन की ओर से ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन का शताब्दी समारोह केक काटकर मनाया गया। बरेका में आयोजित कार्यक्रम में जोनल सेक्रेटरी डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि फेडरेशन के गठन कर्मचारियों के हित में काम के लिए हुआ है। जो फेडरेशन की ओर से लगातार किया जा रहा है। महामंत्री अरविंद कुमार ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन कर्मचारियों के लिए काम कर रहा है। इस दौरान अजय कुमार, अविनाश पाठक, अखिलेश कुमार, राजेश सिंह, अमित यादव आदि मौजूद रहे।