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पांचवीं पीढ़ी सहेज रही बनारस के काष्ठ कला की धरोहर

Thu, 21 Jan 2021 01:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2021 01:20 AM IST
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The fifth generation is saving the heritage of wood art of Banaras
वाराणसी। बनारसी काष्ठ कला की पहचान और चमक सात समुंदर पार तक है। जीआई उत्पाद प्रदर्शनी में वूडेन लेकर वेयर को काफी पसंद किया जा रहा है। लकड़ी का बैग जो अब तक किसी देश में नहीं बना था उसे बनारस में तैयार किया गया है। इस बैग की तारीफ पिछले साल टीएफसी में आयोजित ओडीओपी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी। आधुनिकता के इस दौर में भी खोजवा के कश्मीरीगंज निवासी शिल्पी गोदावरी सिंह (81 वर्ष) के साथ परिवार की 5वीं पीढ़ी वूडेन लेकर वेयर व खिलौने को जिंदा रखे हुए है।
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इनके तैयार किए हुए लकड़ी के उत्पाद में यूकेलिप्टस लकड़ी से बना हुआ हैंड बैग काफी आकर्षक है। इसे तैयार करने में 9 दिन लगे हैं। इसके अलावा 27 इंच का लकड़ी लैंप भी खास है। शिल्पी गोदावरी सिंह के नाती राज कुंदेर बताते हैं कि लकड़ी के विभिन्न तरीके से 250 उत्पाद तैयार किए गए हैं। लॉकडाउन से पहले अमेरिका, जापान, रूस आदि देशों में लकड़ी के उत्पाद हर माह भेजे जा रहे थे। लॉकडाउन के बाद दिवाली के दौरान सिंगापुर में लकड़ी का फोटो फ्रेम, नेकलेस आदि भेजा गया था।
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कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके गोदावरी सिंह बताते हैं कि बनारस में लकड़ी के खिलौने का काम वर्ष 1956 में दादा स्वर्गीय श्यामलाल ने शुरू किया था। इसके बाद पिता छेदी सिंह ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। अब खुद इस काम को करने के साथ ही बेटे नरेंद्र, दीपक और नाती राज कुंदेर व पोते कृष्णा ने भी इस हुनर को अपना लिया है।
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1970 में हुआ था जापान को पहला निर्यात
लकड़ी से बने खिलौने व अन्य उत्पादों की मांग इस समय विदेशों में भी है। गोदावरी सिंह ने बताया कि 1970 में जापान को पहली बार लकड़ी के खिलौने का निर्यात किया गया था। उस समय लकड़ी की माला जापान को भेजी गई थी। बड़ा लालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में पिछले साल 16 फरवरी को ओडीओपी योजना के तहत काशी एक रूप अनेक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री का आगमन हुआ था। प्रधानमंत्री के कदम वूडेन स्टाल पर टंगे हैंड बैग देख रुक गए। गोदावरी सिंह बताते हैं कि उस समय प्रधानमंत्री ने हाथों में लेकर हैंड बैग को देखा था और सराहा था।
मिल चुके हैं कई अवार्ड
1970 में कनाडा के प्रधानमंत्री ने गोल्ड मेडल दिया था
2004-05 में स्टेट अवार्ड मिला था
2005 में उत्तर प्रदेश की झांकी को नई दिल्ली में तीसरा स्थान मिला था
2006 में लकड़ी खिलौना के भीष्म पितामह की उपाधि वस्त्र मंत्रालय द्वारा
2007 में काशी गौरव सम्मान
2016 में कर्तव्य बोध सम्मान
2017 में हरियाणा राज्यपाल द्वारा कलामणि अवार्ड मिला था
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