UP: दूसरी युवती की एंट्री ने ऋषभ को बनाया छोटी का कातिल, नौ जून को गला दबाकर मारा था; सूटकेस में मिला था शव
छोटी उपाध्याय हत्याकांड को ऋषभ ने दूसरी युवती की एंट्री के बाद अंजाम दिया। वह अप्रैल माह से हत्या की योजना बना रहा था। नौ जून को गला दबाकर मारा था। इसके बाद शव को सूटकेस में छिपाकर वाराणसी लाया था। यहां तीन अगस्त को मकान मालिक ने दरवाजा खुलवाया तो सूटकेस से छोटी का शव मिला।
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Varanasi News: दादर नगर हवेली में पत्नी छोटी उपाध्याय (20) की हत्या कर शव सूटकेस में छिपाने के आरोपी ऋषभ कुमार सिंह के मोबाइल से सिलवासा पुलिस को कई अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं। कर्ज, सामाजिक दबाव झेलने के साथ ही वाराणसी की एक युवती के संपर्क में आने के बाद से ऋषभ ने छोटी से दूरी बनानी शुरू कर दी थी।
अप्रैल में ही छोटी को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी। हत्या के इरादे से ही उसे मई में दादर नगर हवेली में किराये के मकान में कमरा लेकर रहने लगा था। 10 दिन बाद ही 9 जून को गला दबाकर छोटी की हत्या की और फिर शव को प्लास्टिक में पैक कर सूटकेस में बंद कर वाराणसी भाग आया था। लगभग दो महीने बाद तीन अगस्त को मकान मालिक ने दरवाजा खुलवाया तो सूटकेस से छोटी का शव मिला।
सिलवासा पुलिस और एसटीएफ वाराणसी इकाई की छानबीन में सामने आया था कि बिहार नेवादा रोह थाना क्षेत्र के सिउर गांव निवासी छोटी उपाध्याय और ऋषभ कुमार सिंह दो साल से परिवार से अलग थे। ऋषभ के परिजनों ने तो उससे नाता तोड़ लिया था और बेटा मानने से इन्कार कर दिया था। इस लिहाज से वह दो साल से घर नहीं गया।
वहीं, छोटी उपाध्याय अपनी शादी के एक साल बाद ही पहले पति को छोड़कर गांव के ही प्रेमी ऋषभ कुमार सिंह के साथ भाग गई थी। तब से उसके भी घर के दरवाजे बंद हो गए। परिजनों ने अपनाने से इंन्कार कर दिया। इधर, वह ऋषभ पर लगातार गांव जाने के लिए दबाव बना रही थी। ऋषभ के पास कोई चारा नहीं था। वह आर्थिक रूप से बहुत टूट चुका था।
मंडुवाडीह थाना क्षेत्र की एक युवती के संपर्क में भी वह इन दिनों आ गया था। ऋषभ ने अपने एक परिचित से 20 हजार रुपये कर्ज भी लिया था। पैसा लेकर दादरा नगर हवेली चला गया। मई के अंतिम सप्ताह में दो महीने का एडवांस मकान मालिक को दिया था। उसकी योजना थी कि किराये के मकान में छोटी की हत्या कर वह आराम से भाग निकलेगा। चूंकि छोटी के परिवार वाले भी उसकी तलाश अब नहीं कर रहे थे। खोजबीन नहीं होने के कारण वह बच सकता है।
चांदपुर स्थित फैक्ट्री में वह नाम बदलकर मजदूरी कर रहा था। हालांकि मकान मालिक से मिले दोनों के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर के जरिये सिलवासा पुलिस ने ऋषभ को खोज निकाला। महेशपुर में किराये के मकान में वह रहता था।