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एसटीपी बनने तक दवा से की जाएगी नालों की सफाई
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 02 Aug 2016 02:05 AM IST
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बाराबंकी में शहर स्थित जमुरिया नाले में बह रहा फैक्ट्रियों का केमिकल।
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा और असि नदी के उद्धार केलिए केंद्र सरकार ने तेज गति से काम शुरू कर दिया है। तय किया गया है कि दीनापुर और गोइठहां में जब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) चालू नहीं हो जाता, तब तक गंगा में गिर रहे नालों और असि में बह रहे सीवेज को दवा के जरिये साफ किया जाएगा। काशी मेें असि समेत नौ नालों की दवा के जरिए सफाई करने पर 50-60 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के एडिशनल डायरेक्टर और वैज्ञानिक पवन किशोर झा ने सोमवार को इस बाबत महापौर रामगोपाल मोहले से मुलाकात की। बताया, देश के 144 बड़े नाले हैं, जो सीधे गंगा और प्रमुख नदियों में गिर रहे हैं। इस मद में पांच सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस काम के लिए जिस कंपनी को टेंडर मिला है, ट्रायल के तौर पर उसे असि नदी में बह रहे सीवेज को साफ करने केलिए कहा गया था। कंपनी 20 जून से दवा छोड़ रही थी। इसकी मॉनीटरिंग आईआईटी बीएचयू कर रहा था। आईआईटी बीएचयू की मॉनीटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक दवा से पानी साफ हुआ है और दुर्गंध कम हुई है। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद दवा छोड़ने का काम शुरू फिर होगा।
इस दौरान महापौर ने बताया कि नौ अगस्त को एनएमसीजी के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। बैठक में दवा से नालों की सफाई करने वाली कंपनी की कार्यप्रणाली का अध्ययन और मूल्यांकन किया जाएगा। उसके बाद ही कंपनी को इस काम की पूरी तरह से जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बैठक में नमामि गंगे के मिशन डायरेक्टर रजत भार्गव और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहेंगे। मेयर रामगोपाल मोहले ने बताया कि सात जुलाई को दशाश्वमेध घाट पर नमामि गंगे परियोजना के शुभारंभ के अवसर पर गंगा के साथ ही असि नदी के पुनरुद्धार के लिए पायलट प्रोजेक्ट की भी शुरूआत हो गई थी।
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नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के एडिशनल डायरेक्टर और वैज्ञानिक पवन किशोर झा ने सोमवार को इस बाबत महापौर रामगोपाल मोहले से मुलाकात की। बताया, देश के 144 बड़े नाले हैं, जो सीधे गंगा और प्रमुख नदियों में गिर रहे हैं। इस मद में पांच सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस काम के लिए जिस कंपनी को टेंडर मिला है, ट्रायल के तौर पर उसे असि नदी में बह रहे सीवेज को साफ करने केलिए कहा गया था। कंपनी 20 जून से दवा छोड़ रही थी। इसकी मॉनीटरिंग आईआईटी बीएचयू कर रहा था। आईआईटी बीएचयू की मॉनीटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक दवा से पानी साफ हुआ है और दुर्गंध कम हुई है। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद दवा छोड़ने का काम शुरू फिर होगा।
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इस दौरान महापौर ने बताया कि नौ अगस्त को एनएमसीजी के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। बैठक में दवा से नालों की सफाई करने वाली कंपनी की कार्यप्रणाली का अध्ययन और मूल्यांकन किया जाएगा। उसके बाद ही कंपनी को इस काम की पूरी तरह से जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बैठक में नमामि गंगे के मिशन डायरेक्टर रजत भार्गव और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहेंगे। मेयर रामगोपाल मोहले ने बताया कि सात जुलाई को दशाश्वमेध घाट पर नमामि गंगे परियोजना के शुभारंभ के अवसर पर गंगा के साथ ही असि नदी के पुनरुद्धार के लिए पायलट प्रोजेक्ट की भी शुरूआत हो गई थी।
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