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खुल गए मां कामाख्या मंदिर के पट, भक्तों ने किए दर्शन
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श्री कामाख्या मंदिर के पट तीन दिन के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। इसके साथ ही अंबूवाची योग पर्व में माता की 108 परिक्रमा कर दरबार में हाजिरी लगाई। भक्तों में माता के अभिषेक का जल प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। 52 शक्तिपीठों में से एक श्री कामरूप कामाख्या देवी मंदिर जो नील पर्वत पर असम के गुवाहाटी में स्थित है उनका प्रतिरूप ही काशी में स्थित श्री कामाख्या देवी मंदिर है। मंदिर में माता का विग्रह श्री महामुद्रा यंत्र के रूप में स्थापित है।
श्री कामाख्या देवी का मुख्य पर्व श्री अंबूवाची योग पर्व 22 से आरंभ हुआ। इसमें मातृ श्री के गर्भगृह के पट को रात में पूजा-अर्चना के बाद बंद कर दिया गया। गर्भगृह के पट्ट बंद होने से पूर्व श्री महामुद्रा यंत्र पर वस्त्र चढ़ाए जाते हैं जो गर्भगृह के पट्ट खुलने के बाद प्रसाद रूप में भक्तों के बीच वितरित किया जाएगा। रविवार को दोपहर दो बजे मंदिर का कपाट खुला। इसके बाद श्रद्धालुओं को तीन जुलाई को अंबूवाची पर्व के दौरान पूजित लाल वस्त्र का वितरण किया जाएगा। पूजित लाल वस्त्र एवं अभिषेक का पवित्र जल धार्मिक क्रियाओं, तांत्रिक पूजा और दुखों के निवारण में अत्यंत उपयोगी है। प्रधान पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि माता का यह मंदिर भगवान श्री राम और श्री कृष्ण से भी पुराना है। काशी में श्री कामाख्या मंदिर स्थापित होने का उद्धरण भविष्य पुराण में भी मिलता है।
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श्री कामाख्या देवी का मुख्य पर्व श्री अंबूवाची योग पर्व 22 से आरंभ हुआ। इसमें मातृ श्री के गर्भगृह के पट को रात में पूजा-अर्चना के बाद बंद कर दिया गया। गर्भगृह के पट्ट बंद होने से पूर्व श्री महामुद्रा यंत्र पर वस्त्र चढ़ाए जाते हैं जो गर्भगृह के पट्ट खुलने के बाद प्रसाद रूप में भक्तों के बीच वितरित किया जाएगा। रविवार को दोपहर दो बजे मंदिर का कपाट खुला। इसके बाद श्रद्धालुओं को तीन जुलाई को अंबूवाची पर्व के दौरान पूजित लाल वस्त्र का वितरण किया जाएगा। पूजित लाल वस्त्र एवं अभिषेक का पवित्र जल धार्मिक क्रियाओं, तांत्रिक पूजा और दुखों के निवारण में अत्यंत उपयोगी है। प्रधान पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि माता का यह मंदिर भगवान श्री राम और श्री कृष्ण से भी पुराना है। काशी में श्री कामाख्या मंदिर स्थापित होने का उद्धरण भविष्य पुराण में भी मिलता है।
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