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वाराणसी: सौंदर्य लहरी के सौंदर्य स्वर से गूंजा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का प्रांगण

Mon, 28 Mar 2022 01:00 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 28 Mar 2022 01:00 PM IST
सार

प्राच्य विद्या का परिसर रविवार को वैदिक मंत्रों और सौंदर्य लहरी के पाठ से गूंज उठा। पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल ने स्वरों से साधना की तो मैदान में मौजूद 10 हजार बटुक व विद्यार्थियों ने भी साधना के यज्ञ में अपने-अपने स्वराें की आहुतियां अर्पित कीं।

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The courtyard of Sampurnanand Sanskrit University resonated with the beauty of Soundarya Lahiri
पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्राच्य विद्या का परिसर रविवार को वैदिक मंत्रों और सौंदर्य लहरी के पाठ से गूंज उठा। पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल ने स्वरों से साधना की तो मैदान में मौजूद 10 हजार बटुक व विद्यार्थियों ने भी साधना के यज्ञ में अपने-अपने स्वराें की आहुतियां अर्पित कीं।

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संपूर्ण परिसर में सौंदर्य लहरी के पाठ के दौरान निर्मित मंत्रों के स्वरों का आभामंडल हर किसी को दैवीय आभास करा रहा था। रविवार को वेदांत भारती और श्रीशंकराचार्य वांग्मय सेवा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान में दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक अखिल भारतीय विराट संत सम्मेलन और आदि शंकराचार्य द्वारा रचित सौंदर्य लहरी पाठ का आयोजन हुआ।
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अनुराधा पौडवाल के मंच पर आने के साथ ही वैदिक परंपराओं के अनुरूप मंत्रोच्चारण से शुभारंभ कर आयोजन की शुरुआत हुई। अनुराधा पौडवाल ने इस दौरान बच्चों से प्रार्थना कराई। अनुराधा पौडवाल ने काशी पंचमक प्रार्थना प्रस्तुत किया तो परिसर वैदिक परंपराओं की अनुगूंज से अभिप्राणित हो उठा।

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इसके बाद युवतियों और छात्रों संग वेद पाठियों ने सौंदर्य लहरी पाठ शुरू किया तो पूरा माहौल धर्म अध्यात्म की सुर-सरिता में अभिसिंचित हो उठा। इस दौरान डॉ. शैलेंद्र दीक्षित, डॉ. अनिल किजवेड़ेकर, डॉ. माधवी तिवारी, सीमा शुक्ला, राजेश त्रिवेदी, यज्ञनारायण, डॉ. दिग्विजय त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

जिसमें संप्रदाय भेद ना हो वही है जगद्गुरु

The courtyard of Sampurnanand Sanskrit University resonated with the beauty of Soundarya Lahiri
संत समागम एवं सौंदर्य लहरी पारायण महोत्सव - फोटो : अमर उजाला

श्री शंकराचार्य वांग्य सेवा परिषद एवं वेदांत भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय संत समागम एवं सौंदर्य लहरी पारायण महोत्सव के दूसरे दिन स्वामी यतींद्रानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन सर्व समावेशी है। शंकराचार्य प्रणीत अद्वैत दर्शन सभी मत संप्रदाय को जोड़ता है। जिसमें संप्रदाय भेद न हो वही जगद्गुरु है। परमात्मानंद सरस्वती महाराज आदि शंकराचार्य का मोक्ष दर्शन यथार्थ है। उन्होंने ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट प्रतिमा एवं अनुसंधान केंद्र स्थापना का प्रस्ताव रखा।

अभयानंद सरस्वती ने कहा कि अद्वैत दर्शन सनातन है। संकट में भारतीय समाज संत की ओर आकांक्षा भरी निगाह से देखता है। संत समाज को अद्वैत परंपरा संरक्षण के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। भाष्य ग्रंथ का संरक्षण स्वाध्याय और प्रवचन से होता है। ज्ञानेश्वर पुरी महाराज ने कहा कि आज भी भारत अद्वैत परंपरा के बल पर विश्वगुरु है। इस दौरान स्वामी निर्भयानंद, पद्मश्री ब्रह्मेशानंद, श्याम चैतन्यपुरी, विश्वेश्वरानंद गिरी आदि ने सभा को संबोधित किया।

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