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आंगन में सुहाने लगी ‘नन्ही चिरैया’ की चहचहाहट

Thu, 24 Feb 2022 12:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:16 AM IST
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The chirping of 'Little Chiriya' started in the courtyard
ओ री चिरैया, नन्हीं सी चिड़िया, अंगना में फिर आजा रे.....। बेटियां जब अपनों के बीच कम होने लगीं तो गीतकार स्वानंद किरकिरे ने इस गीत के जरिये भ्रूण हत्या जैसे अपराध पर लोगों को झकझोरा। समय बदला, कानून की सख्ती हुई और लोग भी समझने लगे। काशी के लिए खुशखबर है कि अब आंगन में लोगों को ‘नन्ही चिरैया’ की चहचहाहट सुहाने लगी है।
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पिछले पांच साल में बेटियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। एडिशनल सीएमओ डॉ. एके मौर्या ने बताया कि लोगों में जागरूकता बढ़ी तो बेटियों की जन्म दर भी बढ़ने लगी। भ्रूण लिंग जांच करने वालों को सजा मिलने पर इस काले धंधे पर अंकुश लगने से भी फर्क पड़ा। जागरूकता के चलते महिला-पुरुष लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकडे़ से इसका खुलासा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015- 2016 में एक हजार पुरुष बच्चों के सापेक्ष 936 बच्चियों का जन्म हुआ। तो वहीं वर्ष 2020-2021 में 1000 बेटों पर 965 बेटियों ने जन्म लिया।
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बेटियां अभिशाप नहीं, ईश्वर की सौगात
काशी की डॉ. शिप्रा ने अपने मैटर्निटी होम में बेटियों के जन्म पर पूरा शुल्क उपहार में छोड़ देना का संकल्प लिया। कई बार ऐसे भी मौके आए जब लगातार बेटियों के जन्म से खर्च को लेकर संकट भी खड़ा हो गया। इसमें कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने मदद का प्रस्ताव दिया, लेकिन संकल्पों में बंधी चिकित्सक ने इसे ठुकराते हुए खुद से किया वादा पूरा किया। इसमें उनकी मदद की उनके चिकित्सक पति डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने। डॉ. शिप्रा के इस अभियान के लिए उन्हें पीएम मोदी के साथ गुजरात सरकार ने भी सम्मानित किया है।
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कायम की मिसाल, बेटी के जन्म पर गाया सोहर
अखरी गांव के कृपाशंकर के आंगन में 30 साल के बाद बिटिया के जन्म पर उसका स्वागत गुलाब की पंखुड़ियों व सोहर से किया गया था। बेटी के जन्म पर परिवारवालों ने आरती उतारकर और फीता काटकर उसका गृह प्रवेश कराया था। पोती के आगमन की खुशी में दादा अजय पांडेय ने शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर में बिटिया के हाथों से स्पर्श कराने के बाद पंचवटी पौधा भी लगवाया था।
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