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Varanasi News: धर्मचारिका यात्रा पर निकले 250 बौद्ध भिक्षु, बुद्धं शरणं गच्छामि... के गूंजे मंत्र
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सारनाथ से निकली धर्मचारिका यात्रा में शामिल बौद्ध भिक्षु। संवाद
सारनाथ। भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मोपदेश स्थली सारनाथ से सोमवार को नौ दिवसीय धर्मचारिका यात्रा शुरू हुई। यात्रा में ''बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि'' का जाप करते हुए पूर्वांचल के 250 से अधिक बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। यात्रा के दौरान भिक्षु भगवान बुद्ध के शांति, मैत्री और करुणा के संदेश का प्रचार-प्रसार करते हुए आगे बढ़े। भगवा और पीले वस्त्रधारी भिक्षुओं का मार्ग में लोगों ने श्रद्धापूर्वक अभिवादन किया। हालांकि कई स्थानों पर खराब सड़कों के कारण उन्हें कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। नौ दिनों में भिक्षु करीब 90 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे।
धर्मचारिका यात्रा सोमवार सुबह सारनाथ के शक्तिपीठ स्थित धम्म शिक्षण संस्थान से निकाली गई। धम्म शिक्षण संस्थान के प्रभारी भिक्षु चन्दिमा थेरो के नेतृत्व में भिक्षुओं ने प्रार्थना सभागार में भगवान बुद्ध की धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा की प्रतिमा के समक्ष धम्म सुत्त का पाठ किया। इसके बाद हाथों में धम्म ध्वज लेकर यात्रा पर रवाना हुए। यात्रा रिंग रोड होते हुए पहले पड़ाव चांदमारी स्थित तथागत पब्लिक स्कूल पहुंची। वहां बौद्ध भिक्षुओं ने अध्ययन-अध्यापन के साथ धम्म देशना के माध्यम से लोगों को भगवान बुद्ध के उपदेशों से अवगत कराया।
चन्दिमा थेरो ने कहा कि भगवान बुद्ध के संदेशों से ही विश्व में शांति स्थापित हो सकती है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के मैत्री और करुणा के मार्ग पर चलकर उपासक और उपासिकाएं अपने जीवन में बुद्धत्व की ओर अग्रसर हो सकते हैं तथा समाज और विश्व को शांति का संदेश दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा शिवपुरी वाटिका (शिवपुर), गौतम बुद्ध इंटर कॉलेज (लोहता), बीएलडब्ल्यू, सिर गोवर्धन (रविदास मंदिर), संत कबीर प्राकट्य स्थल (लहरतारा), अशोका इंस्टीट्यूट (पहड़िया) और चिरईगांव होते हुए 28 जुलाई को थाई बौद्ध विहार, सारनाथ पहुंचेगी। 29 जुलाई को दोपहर दो बजे धमेक स्तूप के पास सभी बौद्ध भिक्षु पूजा करेंगे। इसके बाद मूलगंधकुटी विहार में धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्र का पाठ एवं दीपदान किया जाएगा। यात्रा में हर आयु वर्ग के भिक्षु शामिल हैं।
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10 से अधिक जिलों के बौद्ध भिक्षु हुए शामिल
धम्म शिक्षण संस्थान की ओर से निकाली गई धर्मचारिका यात्रा में पूर्वांचल के गाजीपुर, मऊ, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया, वाराणसी, गोरखपुर, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर सहित 10 से अधिक जिलों के बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। इनमें श्रीलंका और तिब्बत सहित अन्य देशों के बौद्ध भिक्षु भी शामिल हैं। अधिकांश भिक्षु रविवार को ही सारनाथ पहुंच गए थे।
रोज करेंगे 10 किलोमीटर की पदयात्रा, 4-5 घंटे चलेंगे
धर्मचारिका यात्रा में शामिल बौद्ध भिक्षु प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। चन्दिमा थेरो ने बताया कि यात्रा प्रतिदिन सुबह नौ बजे शुरू होगी और दोपहर एक से दो बजे के बीच अगले पड़ाव तक पहुंचेगी। दोपहर बाद सूर्यास्त से पहले भोजन ग्रहण किया जाएगा, क्योंकि बौद्ध परंपरा में सूर्यास्त से पहले भोजन करने का नियम है, जिसका पालन सभी बौद्ध अनुयायी करते हैं।
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धर्मचारिका यात्रा सोमवार सुबह सारनाथ के शक्तिपीठ स्थित धम्म शिक्षण संस्थान से निकाली गई। धम्म शिक्षण संस्थान के प्रभारी भिक्षु चन्दिमा थेरो के नेतृत्व में भिक्षुओं ने प्रार्थना सभागार में भगवान बुद्ध की धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा की प्रतिमा के समक्ष धम्म सुत्त का पाठ किया। इसके बाद हाथों में धम्म ध्वज लेकर यात्रा पर रवाना हुए। यात्रा रिंग रोड होते हुए पहले पड़ाव चांदमारी स्थित तथागत पब्लिक स्कूल पहुंची। वहां बौद्ध भिक्षुओं ने अध्ययन-अध्यापन के साथ धम्म देशना के माध्यम से लोगों को भगवान बुद्ध के उपदेशों से अवगत कराया।
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चन्दिमा थेरो ने कहा कि भगवान बुद्ध के संदेशों से ही विश्व में शांति स्थापित हो सकती है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के मैत्री और करुणा के मार्ग पर चलकर उपासक और उपासिकाएं अपने जीवन में बुद्धत्व की ओर अग्रसर हो सकते हैं तथा समाज और विश्व को शांति का संदेश दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा शिवपुरी वाटिका (शिवपुर), गौतम बुद्ध इंटर कॉलेज (लोहता), बीएलडब्ल्यू, सिर गोवर्धन (रविदास मंदिर), संत कबीर प्राकट्य स्थल (लहरतारा), अशोका इंस्टीट्यूट (पहड़िया) और चिरईगांव होते हुए 28 जुलाई को थाई बौद्ध विहार, सारनाथ पहुंचेगी। 29 जुलाई को दोपहर दो बजे धमेक स्तूप के पास सभी बौद्ध भिक्षु पूजा करेंगे। इसके बाद मूलगंधकुटी विहार में धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्र का पाठ एवं दीपदान किया जाएगा। यात्रा में हर आयु वर्ग के भिक्षु शामिल हैं।
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10 से अधिक जिलों के बौद्ध भिक्षु हुए शामिल
धम्म शिक्षण संस्थान की ओर से निकाली गई धर्मचारिका यात्रा में पूर्वांचल के गाजीपुर, मऊ, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया, वाराणसी, गोरखपुर, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर सहित 10 से अधिक जिलों के बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। इनमें श्रीलंका और तिब्बत सहित अन्य देशों के बौद्ध भिक्षु भी शामिल हैं। अधिकांश भिक्षु रविवार को ही सारनाथ पहुंच गए थे।
रोज करेंगे 10 किलोमीटर की पदयात्रा, 4-5 घंटे चलेंगे
धर्मचारिका यात्रा में शामिल बौद्ध भिक्षु प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। चन्दिमा थेरो ने बताया कि यात्रा प्रतिदिन सुबह नौ बजे शुरू होगी और दोपहर एक से दो बजे के बीच अगले पड़ाव तक पहुंचेगी। दोपहर बाद सूर्यास्त से पहले भोजन ग्रहण किया जाएगा, क्योंकि बौद्ध परंपरा में सूर्यास्त से पहले भोजन करने का नियम है, जिसका पालन सभी बौद्ध अनुयायी करते हैं।