{"_id":"6a988804255e6a84c401065e","slug":"the-brilliance-of-purvanchals-craftsmanship-to-shine-in-european-markets-textile-exporters-gain-the-mantra-for-global-competitiveness-varanasi-news-c-20-vns1056-1529007-2026-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: यूरोपीय बाजारों में गूंजेगी पूर्वांचल के हुनर की चमक, वस्त्र निर्यातकों को मिला वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मंत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: यूरोपीय बाजारों में गूंजेगी पूर्वांचल के हुनर की चमक, वस्त्र निर्यातकों को मिला वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मंत्र
विज्ञापन
टेक्सटाइल कमेटी की हुई कार्यशाला को संबोधित करते आशीष सोनी । अमर उजाला
पूर्वांचल के पारंपरिक वस्त्र उद्योग, हथकरघा और हस्तशिल्प को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा। वस्त्र मंत्रालय (भारत सरकार) के अधीन वस्त्र समिति की ओर से संचालित टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीईएफसी) की ओर से बुधवार को मलदहिया स्थित एक होटल में बुनकरों, वस्त्र निर्माताओं व उद्यमियों को इसकी जानकारी दी गई।
कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत स्थानीय बुनकरों, कालीन निर्माताओं और वस्त्र उद्यमियों को मिलने वाले नए अवसरों से जोड़ना था। शुभारंभ मुख्य अतिथि वस्त्र आयुक्त वृंदा मनोहर देसाई, वस्त्र समिति के सचिव कार्तिकेय ढांडा ने किया। मुख्य अतिथि वृंदा मनोहर देसाई ने कहा कि बदलते दौर में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए केवल परंपरा पर्याप्त नहीं है, बल्कि कड़े अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे वैश्विक मांग के अनुरूप तकनीकी उन्नयन करें और सरकारी नीतियों का अधिकतम लाभ उठाएं।
भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव कुमार वार्ष्णेय, संयुक्त डीजीएफटी (वाराणसी) आलोक द्विवेदी, कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब और ईयूपीईए के कोषाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने भी विचार रखे। वस्त्र समिति के सहायक निदेशक अम्बरीश सिंह ने यूरोपीय बाजारों में टैरिफ रियायतों और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन आवश्यकताओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं, निजी बैंक (लखनऊ) के क्षेत्रीय प्रमुख आशीष सोनी और डीजीएफटी प्रतिनिधियों ने निर्यातकों के लिए वित्तीय योजनाओं, ब्रांडिंग और एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाले नीतिगत प्रोत्साहनों की जानकारी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत स्थानीय बुनकरों, कालीन निर्माताओं और वस्त्र उद्यमियों को मिलने वाले नए अवसरों से जोड़ना था। शुभारंभ मुख्य अतिथि वस्त्र आयुक्त वृंदा मनोहर देसाई, वस्त्र समिति के सचिव कार्तिकेय ढांडा ने किया। मुख्य अतिथि वृंदा मनोहर देसाई ने कहा कि बदलते दौर में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए केवल परंपरा पर्याप्त नहीं है, बल्कि कड़े अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे वैश्विक मांग के अनुरूप तकनीकी उन्नयन करें और सरकारी नीतियों का अधिकतम लाभ उठाएं।
विज्ञापन
भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव कुमार वार्ष्णेय, संयुक्त डीजीएफटी (वाराणसी) आलोक द्विवेदी, कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब और ईयूपीईए के कोषाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने भी विचार रखे। वस्त्र समिति के सहायक निदेशक अम्बरीश सिंह ने यूरोपीय बाजारों में टैरिफ रियायतों और अंतरराष्ट्रीय अनुपालन आवश्यकताओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं, निजी बैंक (लखनऊ) के क्षेत्रीय प्रमुख आशीष सोनी और डीजीएफटी प्रतिनिधियों ने निर्यातकों के लिए वित्तीय योजनाओं, ब्रांडिंग और एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाले नीतिगत प्रोत्साहनों की जानकारी दी।
विज्ञापन