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संघ ने विहिप को सौंपी काशी आंदोलन की कमान
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 09 Oct 2015 01:49 AM IST
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काशी में साधु-संतों पर हुए लाठीचार्ज के बाद मूर्ति विसर्जन आंदोलन की जिम्मेदारी सर संघचालक मोहन भागवत ने विश्व हिंदू परिषद को सौंपी है। साथ ही, भाजपा को पूरे आंदोलन से अलग रहने की हिदायत दी है।
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अन्याय प्रतिकार यात्रा के दौरान भारी बवाल होने के बाद काशी पहुंचे संघ प्रमुख ने गुरुवार को विसर्जन के मुद्दे पर कहा कि यूपी सरकार को इस मसले पर काशी की धार्मिक भावना से कोर्ट को अवगत कराना चाहिए था। गंगा निर्मलीकरण के लिए हम सब प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गंगा में मूर्ति विसर्जन के मसले का शास्त्र सम्मत समाधान तलाशने के लिए जल्द ही काशी में धर्म संसद बुलाएंगे। साथ ही, गंगा में प्रतिमा विसर्जन का मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे। पंडाल आयोजकों को गंगा में प्रतिमा विसर्जन के लिए राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
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उधर, शहर के प्रबुद्धजनों का कहना है कि गंगा और काशी की गरिमा का ध्यान रखकर ही कोई भी काम हो। ताकि देश और दुनिया में काशी की ख्याति पर बट्टा न लगने पाए। वहीं, गोदौलिया बवाल के मामले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गुरुवार को पांच और लोग गिरफ्तार किए गए।
साथ ही, उपद्रवकारियों के तौर पर 100 चिह्नित किए गए। एसएसपी ने कहा है कि इन सभी को सांप्रदायिक गुंडा घोषित कर इनका फोटो शहर में जगह-जगह चस्पा कराया जाएगा। जबकि गिरफ्तार कंाग्रेस विधायक अजय राय सहित 15 की जमानत अर्जी पर सुनवाई की तिथि कोर्ट ने 15 अक्तूबर निर्धारित की।
महमूरगंज स्थित संघ कार्यालय में गुरुवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पूरे दिन अलग-अलग लोगों से मुलाकात की। बैठक कर उन्होंने स्थानीय प्रचारकों से संतों पर हुए लाठीचार्ज के पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि संतों पर लाठीचार्ज किसके कहने पर हुआ।
इस पूरे आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद, भाजपा, शिवसेना सहित अन्य हिंदूवादी संगठनों की क्या भूमिका रही। प्रचारकों से उन्होंने इस बारे में भी पूछा कि आखिर इस पूरे आंदोलन में भाजपा कैसे पिछड़ गई और कांग्रेस ने अपने लिए जमीन तैयार कर ली। शुरुआत में ही इस आंदोलन पर गंभीरता न बरते जाने पर संघ प्रमुख ने कड़ी नाराजगी जताई। भागवत राम मंदिर के आंदोलन के दौरान के कारसेवकों से भी मिले।