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जीवन में मंगल का उत्तर विज्ञान नहीं, अध्यात्म के पास
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भागवत भाष्कर साध्वी आस्था भारती ने कहा कि मंगल ग्रह की खोज तो विज्ञान ने की लेकिन जीवन में मंगल कैसे आए, इसका उत्तर उसके पास भी नहीं है। आज विज्ञान अपनी चरम सीमा पर है, परंतु सुख सुविधा के साधनों का ढेर लगाने वाले विज्ञान के होने पर भी हमारे जीवन में अशांति बनी हुई है। इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल अध्यात्म ही दे सकता है।
रविवार को नरिया स्थित रामनाथ चौधरी शोध संस्थान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के छठे दिन साध्वी आस्था भारती ने कहा कि गुरुदेव आशुतोष महाराज कहते हैं कि सिर्फ नेत्रों को मूंदकर बैठ जाना ही ध्यान नहीं है, इसके लिए सच्चिदानंद परमात्मा रूपी ध्येय का अंतर में प्रकट होना आवश्यक है। केवल विचारों को सुनने मात्र से कुछ नहीं होगा, उस पर अमल, मनन की डगर पर चले बिना परिवर्तन की मंजिल नहीं मिल सकती। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के दौरान बधाई व सोहर गीत पर श्रद्धालु झूम उठे। पंडाल को रंग बिरंगे गुब्बारों एवं फूलों से सजाया गया था। कथाव्यास आस्था भारती ने कहा कि ईश्वर दर्शन होने पर जीवन का हर दिन आनंद उत्सव बन जाता है। इस दौरान अरविंद भालोटिया, बैजनाथ भालोटिया ने सपत्नीक आरती उतारी।
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रविवार को नरिया स्थित रामनाथ चौधरी शोध संस्थान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के छठे दिन साध्वी आस्था भारती ने कहा कि गुरुदेव आशुतोष महाराज कहते हैं कि सिर्फ नेत्रों को मूंदकर बैठ जाना ही ध्यान नहीं है, इसके लिए सच्चिदानंद परमात्मा रूपी ध्येय का अंतर में प्रकट होना आवश्यक है। केवल विचारों को सुनने मात्र से कुछ नहीं होगा, उस पर अमल, मनन की डगर पर चले बिना परिवर्तन की मंजिल नहीं मिल सकती। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के दौरान बधाई व सोहर गीत पर श्रद्धालु झूम उठे। पंडाल को रंग बिरंगे गुब्बारों एवं फूलों से सजाया गया था। कथाव्यास आस्था भारती ने कहा कि ईश्वर दर्शन होने पर जीवन का हर दिन आनंद उत्सव बन जाता है। इस दौरान अरविंद भालोटिया, बैजनाथ भालोटिया ने सपत्नीक आरती उतारी।
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