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आयोजन: बीएचयू में पहली बार मना थाई नया साल, बुद्ध को सुगंधित जल अर्पित; कई देशों के छात्रों ने की हिस्सेदारी

Wed, 15 Apr 2026 02:17 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 15 Apr 2026 02:17 AM IST
सार

भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दिखाता है। होली और जल-अर्पण से समानता रखता है, जो बौद्ध धर्म के माध्यम से दोनों देशों के बीच स्थापित सभ्यतागत संबंधों को सामने लाता है।

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Thai New Year celebrated for first time at BHU fragrant water offered to Buddha in varanasi
बीएचयू में पहली बार मना थाई नया साल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू में भगवान बुद्ध से जुड़ा और थाईलैंड का पारंपरिक नववर्ष उत्सव सोंगक्रान मनाया गया। परिसर स्थित सिद्धार्थ विहार अंतरराष्ट्रीय छात्रावास में भारत के साथ ही थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, इंडोनेशिया के छात्र-छात्राओं ने दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाली साझा बौद्ध विरासत पर सहमति जताई। एकता, अंतर-सांस्कृतिक सम्मान का संकल्प लिया गया। इस उत्सव के 57वें वर्ष में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी भी पहुंचे।

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शुद्धिकरण और अतीत के पापों को काटने के प्रतीक सोंगक्रान पालि और संस्कृत के ‘संक्रांति’ शब्द से निकला है। भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दिखाता है। होली और जल-अर्पण से समानता रखता है, जो बौद्ध धर्म के माध्यम से दोनों देशों के बीच स्थापित सभ्यतागत संबंधों को सामने लाता है। यह पर्व बाकी दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कई नामों से मनाया जाता है।
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कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि सांस्कृतिक संवाद एक-दूसरे के बीच और इसमें खुलेपन की भावना होनी चाहिए, न कि सांस्कृतिक श्रेष्ठता का भाव। उन्होंने यह भी कहा कि जो भगवान बुद्ध की भूमि भारत को अंतरराष्ट्रीय छात्रों और भिक्षु-विद्यार्थियों का स्वागत करना चाहिए। कई देशों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत कर संस्थागत प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए।
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सुगंधित जलों का होता है इस्तेमाल
यह कार्यक्रम बीएचयू के थाई समुदाय, पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग और सिद्धार्थ विहार अंतरराष्ट्रीय छात्रावास के सहयोग से किया गया। भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर सुगंधित जल अर्पण कर पारंपरिक विधि से इसकी शुरुआत हुई। थाई भिक्षु अनंतचाई का स्वागत भाषण हुआ। यह उत्सव होली के जैसे है, लेकिन इसमें रंगों का नहीं बल्कि सुगंधित जल का इस्तेमाल होता है। धन्यवाद ज्ञापन प्रशासनिक वार्डन प्रो. अख्तर अली ने किया। अंतरराष्ट्रीय केंद्र के प्रो. राजेश सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार यादव आदि मौजूद रहे।

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