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आजमगढ़ः हथियाई नहीं, बेची गई आतंकी अबू सलेम की जमीन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 14 Mar 2018 03:21 PM IST
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अबू सलेम
- फोटो : file photo
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मुंबई बमकांड के आरोपी सजायाफ्ता अबू सलेम ने मुंबई जेल से डीएम, एसपी को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि आजमगढ़ के सरायमीर निवासी कुछ जालसाज और मनबढ़ फर्जी कागजात के आधार पर उसकी पुश्तैनी जमीन हड़प रहे हैं।
पुलिस ने जब इस मामले की जांच पड़ताल की तो पता चला कि सलेम जिस पर आरोप लगा रहा है, उन लोगों ने वर्ष 2000 में ही जमीन का बैनामा कराया है। दस्तावेज में सलेम का भाई हाशिए का गवाह है।
मुंबई के सेंट्रल जेल खारघर से अबू सलेम की ओर से डीएम, एसपी सहित अन्य को भेजा गया शिकायती रजिस्टर्ड पत्र तो नहीं मिला, लेकिन उसके वकील के जरिए मामला सुर्खियों में आने पर मंगलवार को प्रभारी निरीक्षक सरायमीर ने दोनों पक्षों को बुलाकर उनके रिकार्ड देखे। प्रभारी निरीक्षक ने गहनता से जांच कराने के लिए एसडीएम निजामाबाद को पत्र लिखा है।
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प्रभारी निरीक्षक सरायमीर रामनरेश यादव के मुताबिक अबू सलेम जिस जमीन को अपना बता रहा है, वह जमीन आराजी नंबर 738/2 गंभीरपुर थाना क्षेत्र के छाऊ गांव निवासी नूर आलम पुत्र नसीर की थी।
इसमें से 54 कड़ी जमीन 15 मई 2000 को निजामाबाद थाना क्षेत्र के फरिहां गांव निवासी मोहम्मद नफीस अहमद, शौकत आदि ने बैनामा कराया है। जमीन का बैनामा कराने के बाद वर्ष 2001 में मकान का निर्माण कराकर मार्बल और बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान चला रहा है।
जमीन के दस्तावेज में सलेम का भाई अबू हाकिम हाशिए का गवाह है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि अबू सलेम का आरोप पुलिस की जांच में निराधार मिला है। इसकी गहनता से जांच कराने के लिए एसडीएम निजामाबाद को पत्र लिखा गया। इससे उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
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पुलिस ने जब इस मामले की जांच पड़ताल की तो पता चला कि सलेम जिस पर आरोप लगा रहा है, उन लोगों ने वर्ष 2000 में ही जमीन का बैनामा कराया है। दस्तावेज में सलेम का भाई हाशिए का गवाह है।
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मुंबई के सेंट्रल जेल खारघर से अबू सलेम की ओर से डीएम, एसपी सहित अन्य को भेजा गया शिकायती रजिस्टर्ड पत्र तो नहीं मिला, लेकिन उसके वकील के जरिए मामला सुर्खियों में आने पर मंगलवार को प्रभारी निरीक्षक सरायमीर ने दोनों पक्षों को बुलाकर उनके रिकार्ड देखे। प्रभारी निरीक्षक ने गहनता से जांच कराने के लिए एसडीएम निजामाबाद को पत्र लिखा है।
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प्रभारी निरीक्षक सरायमीर रामनरेश यादव के मुताबिक अबू सलेम जिस जमीन को अपना बता रहा है, वह जमीन आराजी नंबर 738/2 गंभीरपुर थाना क्षेत्र के छाऊ गांव निवासी नूर आलम पुत्र नसीर की थी।
इसमें से 54 कड़ी जमीन 15 मई 2000 को निजामाबाद थाना क्षेत्र के फरिहां गांव निवासी मोहम्मद नफीस अहमद, शौकत आदि ने बैनामा कराया है। जमीन का बैनामा कराने के बाद वर्ष 2001 में मकान का निर्माण कराकर मार्बल और बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान चला रहा है।
जमीन के दस्तावेज में सलेम का भाई अबू हाकिम हाशिए का गवाह है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि अबू सलेम का आरोप पुलिस की जांच में निराधार मिला है। इसकी गहनता से जांच कराने के लिए एसडीएम निजामाबाद को पत्र लिखा गया। इससे उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।