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काशी विश्वनाथ मंदिर में परंपरा टूटने पर मंदिर प्रशासन और महंत परिवार आमने-सामने
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:11 PM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : amarujala
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर अव्यवस्था वीआईपी दर्शन के कारण नहीं हुई थी, बल्कि मंदिर के अर्चकों और महंत परिवार की ओर से यजमानों को दर्शन कराना इसकी वजह है। गुरुवार को स्थिति स्पष्ट होने के बाद महंत परिवार और मंदिर प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।
महंत परिवार का आरोप है कि पुलिस ने दर्शनार्थियों और पुजारियों के साथ अभ्रदता की, वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि उन्होंने ही अपने यजमानों को दर्शन कराने के लिए मंदिर की परंपरा से खिलवाड़ किया है। मामले में सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
महाशिवरात्रि पर बुधवार सुबह मंदिर में होने वाली चौथे चरण की आरती दो घंटे विलंब से पूरी हुई। इस दौरान कई भक्तों व पुजारियों के साथ दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया है। ऐसा काशी विश्वनाथ मंदिर के 238 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है।
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पढ़ेंः काशी विश्वनाथ मंदिर में टूटी 238 साल पुरानी परंपरा
सप्तऋषि आरती के अर्चकों द्वारा की जाने वाली चारों प्रहर की आरती के दौरान बाबा के विवाह की व्यवस्था भी उन्हीं अर्चकों द्वारा देखी जाती है लेकिन रात्रि साढ़े ग्यारह बजे प्रथम प्रहर की आरती की समप्ति के बाद अर्चकों ने जब अपने-अपने यजमानों को दर्शन कराने शुरू किए तो पूरी व्यवस्था बेपटरी हो गई।
रात्रि ढाई बजे समाप्त होने वाली दूसरे प्रहर की आरती करीब सवा तीन बजे पूरी की जा सकी। चौथे चरण की आरती शुरू होने तक यह विलंब दो घंटे तक पहुंच गया। ऐसे में पांच बजे भोर की बजाय चौथे चरण की आरती सुबह सात बजे शुरू हुई।
तीसरे चरण की आरती के बाद उस मंदिर में स्थिति और भी बिगड़ गई, जब मंदिर के एक कुछ कर्मचारियों ने मंगला आरती के नाम पर दर्शनार्थियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करा दिया।
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महंत परिवार का आरोप है कि पुलिस ने दर्शनार्थियों और पुजारियों के साथ अभ्रदता की, वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि उन्होंने ही अपने यजमानों को दर्शन कराने के लिए मंदिर की परंपरा से खिलवाड़ किया है। मामले में सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
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महाशिवरात्रि पर बुधवार सुबह मंदिर में होने वाली चौथे चरण की आरती दो घंटे विलंब से पूरी हुई। इस दौरान कई भक्तों व पुजारियों के साथ दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया है। ऐसा काशी विश्वनाथ मंदिर के 238 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है।
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पढ़ेंः काशी विश्वनाथ मंदिर में टूटी 238 साल पुरानी परंपरा
सप्तऋषि आरती के अर्चकों द्वारा की जाने वाली चारों प्रहर की आरती के दौरान बाबा के विवाह की व्यवस्था भी उन्हीं अर्चकों द्वारा देखी जाती है लेकिन रात्रि साढ़े ग्यारह बजे प्रथम प्रहर की आरती की समप्ति के बाद अर्चकों ने जब अपने-अपने यजमानों को दर्शन कराने शुरू किए तो पूरी व्यवस्था बेपटरी हो गई।
रात्रि ढाई बजे समाप्त होने वाली दूसरे प्रहर की आरती करीब सवा तीन बजे पूरी की जा सकी। चौथे चरण की आरती शुरू होने तक यह विलंब दो घंटे तक पहुंच गया। ऐसे में पांच बजे भोर की बजाय चौथे चरण की आरती सुबह सात बजे शुरू हुई।
तीसरे चरण की आरती के बाद उस मंदिर में स्थिति और भी बिगड़ गई, जब मंदिर के एक कुछ कर्मचारियों ने मंगला आरती के नाम पर दर्शनार्थियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करा दिया।
मंगला आरती होती नहीं, टिकट बेचे गए
काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर में दो सदी से अधिक पुरानी परंपरा टूटने के पीछे मंदिर प्रबंधन की छोटी सी चूक बड़ा कारण बन गई। महानिशा के बाद सुबह मंगला आरती नहीं होती। इसके बाद भी मंदिर प्रबंधन ने मंगला आरती के लिए टिकट बेच दिए।
मंदिर कार्यालय का कोई भी कर्मचारी यह बताने को तैयार नहीं कि 14 फरवरी की तारीख में मंगला आरती के लिए कितने टिकट बेचे गए थे। सूत्रों की मानें तो मंगला आरती के नाम पर दो सौ से अधिक लोगों को मंदिर में प्रवेश दिया गया।
मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में किसी भी तरह से परंपराओं का अवरोध नहीं होना चाहिए। मंदिर के प्रशासकों को सोचना चाहिए कि बाबा धन के नहीं धर्म के देवता हैं।
यहां लोग धर्म के नाम पर आते हैं और उनके साथ अगर दुर्व्यवहार होता तो यह गलत है। मंदिर प्रशासन के लिए प्राचीन नियमावली का पालन करना जरूरी है।
मंदिर कार्यालय का कोई भी कर्मचारी यह बताने को तैयार नहीं कि 14 फरवरी की तारीख में मंगला आरती के लिए कितने टिकट बेचे गए थे। सूत्रों की मानें तो मंगला आरती के नाम पर दो सौ से अधिक लोगों को मंदिर में प्रवेश दिया गया।
मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में किसी भी तरह से परंपराओं का अवरोध नहीं होना चाहिए। मंदिर के प्रशासकों को सोचना चाहिए कि बाबा धन के नहीं धर्म के देवता हैं।
यहां लोग धर्म के नाम पर आते हैं और उनके साथ अगर दुर्व्यवहार होता तो यह गलत है। मंदिर प्रशासन के लिए प्राचीन नियमावली का पालन करना जरूरी है।
काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : amarujala
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने कहा कि चारों प्रहर की आरती के दौरान कोई वीवीआईपी नहीं था। सभी अधिकारी मौके पर मौजूद थे लेकिन महंत परिवार की तरफ से कोई शिकायत नहीं की गई है। आरती कराने की जिम्मेदारी महंत परिवार की है। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट है कि आरती के लिए रात 10 बजे गर्भगृह को साफ-सफाई कर उपलब्ध करा दिया गया था।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यासी प्रदीप कुमार बजाज ने कहा कि महंत परिवार के अर्चकों ने ही यजमानों को दर्शन कराने के लिए मंदिर की परंपरा के साथ खिलवाड़ किया है। समय से सफाई के बाद गर्भगृह को उपलब्ध करा दिया गया था। बावजूद इसके महंत परिवार के अर्चकों ने आरती के बजाय अपने यजमानों को दर्शन-पूजन कराना शुरू कर दिया था। इससे ही अव्यवस्था हुई।
प्रधान अर्चक पं. शशिभूषण तिवारी ने कहा कि महाशिवरात्रि की निशा में बाबा के विवाह की प्रक्रिया से लेकर चारों प्रहर की आरती तक की व्यवस्था सप्तऋषि आरती के अर्चकों के जिम्मे होती है। इसमें मंदिर प्रबंधन का हस्तक्षेप नहीं होता लेकिन बीती रात हर बार आरती के बाद वीआईपी के नाम पर लोगों को पुलिस और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग दर्शन करा रहे थे।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यासी प्रदीप कुमार बजाज ने कहा कि महंत परिवार के अर्चकों ने ही यजमानों को दर्शन कराने के लिए मंदिर की परंपरा के साथ खिलवाड़ किया है। समय से सफाई के बाद गर्भगृह को उपलब्ध करा दिया गया था। बावजूद इसके महंत परिवार के अर्चकों ने आरती के बजाय अपने यजमानों को दर्शन-पूजन कराना शुरू कर दिया था। इससे ही अव्यवस्था हुई।
प्रधान अर्चक पं. शशिभूषण तिवारी ने कहा कि महाशिवरात्रि की निशा में बाबा के विवाह की प्रक्रिया से लेकर चारों प्रहर की आरती तक की व्यवस्था सप्तऋषि आरती के अर्चकों के जिम्मे होती है। इसमें मंदिर प्रबंधन का हस्तक्षेप नहीं होता लेकिन बीती रात हर बार आरती के बाद वीआईपी के नाम पर लोगों को पुलिस और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग दर्शन करा रहे थे।