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विश्वविद्यालय के विकास में साझेदार बनें शिक्षक : कुलपति
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बीएचयू के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने बृहस्पतिवार को शिक्षकों के साथ संवाद कर उनसे विश्वविद्यालय के विकास में साझेदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महामना के सपनों को साकार करने और उनकी विरासत को संभालने के लिए हम सभी को खुद को उसके योग्य बनाना होगा। विद्यार्थी हम सभी की प्राथमिकता में हैैं, ऐसे में उनके सर्वांगीण विकास के लिए हमें अपनी पूरी ऊर्जा लगानी होगी।
स्वतंत्रता भवन में आयोजित संवाद में कुलपति ने कहा कि बीएचयू के संकाय सदस्य विश्वविद्यालय की रीढ़ हैं और उनका ये धर्म है कि वे अपने विद्यार्थियों में आकांक्षाओं तथा क्षमताओं का निर्माण करते हुए समाज और राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव की जो भी बातें हम देखते हैं, वे वहीं हैं जिन्हें केन्द्र में रख कर महामना जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व ने 106 वर्ष पूर्व इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। महामना चाहते थे कि बीएचयू अच्छे नागरिक तैयार करे, न कि सिर्फ विषय विशेषज्ञ। किसी भी शैक्षणिक संस्थान की उन्नति के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं। इसमें प्रतिभावान लोगों का संस्थान से जुड़ना, उन्हें प्रगति व उन्नति के लिए संसाधन उपलब्ध कराना तथा उनके उत्साहवर्धन व प्रोत्साहन के लिए स्वस्थ वातावरण देना। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यपद्धति को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाए जाने के लिए उठाए गए कदमों, छात्रों के लिए योजनाओं आदि की चर्चा करते हुए शिक्षण और शोध पर विशेष ध्यान देने को जरूरी बताया। विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के बीच पारस्परिक विश्वास को और मज़बूत कर हम ये लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
सुविधाएं बढ़ाने पर दिया जा रहा विशेष जोर
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए संकायों, पुस्तकालयों व छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें खाना, छात्राओं की सुरक्षा, महिला छात्रावासों में अध्ययन की सुविधा, खेल कूद की सुविधा के साथ ही बेहतर माहौल बनाना शामिल है। इस दौरान प्रो. पद्मिनी रविन्द्रनाथ, प्रो. वीके शुक्ला, प्रो. एके सिंह आदि मौजूद रहे।
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स्वतंत्रता भवन में आयोजित संवाद में कुलपति ने कहा कि बीएचयू के संकाय सदस्य विश्वविद्यालय की रीढ़ हैं और उनका ये धर्म है कि वे अपने विद्यार्थियों में आकांक्षाओं तथा क्षमताओं का निर्माण करते हुए समाज और राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव की जो भी बातें हम देखते हैं, वे वहीं हैं जिन्हें केन्द्र में रख कर महामना जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व ने 106 वर्ष पूर्व इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। महामना चाहते थे कि बीएचयू अच्छे नागरिक तैयार करे, न कि सिर्फ विषय विशेषज्ञ। किसी भी शैक्षणिक संस्थान की उन्नति के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं। इसमें प्रतिभावान लोगों का संस्थान से जुड़ना, उन्हें प्रगति व उन्नति के लिए संसाधन उपलब्ध कराना तथा उनके उत्साहवर्धन व प्रोत्साहन के लिए स्वस्थ वातावरण देना। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यपद्धति को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाए जाने के लिए उठाए गए कदमों, छात्रों के लिए योजनाओं आदि की चर्चा करते हुए शिक्षण और शोध पर विशेष ध्यान देने को जरूरी बताया। विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के बीच पारस्परिक विश्वास को और मज़बूत कर हम ये लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
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सुविधाएं बढ़ाने पर दिया जा रहा विशेष जोर
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए संकायों, पुस्तकालयों व छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें खाना, छात्राओं की सुरक्षा, महिला छात्रावासों में अध्ययन की सुविधा, खेल कूद की सुविधा के साथ ही बेहतर माहौल बनाना शामिल है। इस दौरान प्रो. पद्मिनी रविन्द्रनाथ, प्रो. वीके शुक्ला, प्रो. एके सिंह आदि मौजूद रहे।
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