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गंगा पार रेती पर अव्यवस्थाओं से जूझते रहे शिक्षक
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देव दीपावली पर जहां घाटों पर दीपों का अलौकिक नजारा दिखा, वहीं तेल, दिया और बाती की कमी से गंगा पार रेती पर कम दीपक जलाए गए। हालात यह हो गए कि दीयों की कमी के चलते सेक्टर 18 व 19 में दीपदान का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
शुक्रवार को सुबह नौ बजे से ही शिक्षक गंगा पार रेती पर जुटने लगे थे। लेकिन दोपहर दो बजे तक कई सेक्टरों को दीया, बाती व तेल नहीं उपलब्ध हो सका था। दोपहर बाद प्रशासन की ओर से दीया तो उपलब्ध कराया गया, लेकिन कई सेक्टरों को आखिरी वक्त तक बाती नहीं मिल सकी। शिक्षकों ने अपने खर्चे से बाती, दीया और तेल का इंतजाम करके देव दीपावली के आयोजन को पूर्ण किया। वहीं रेत पर गंदगी व बदबू के कारण दीपदान की ड्यूटी में लगे शिक्षक परेशान रहे। प्रशासन द्वारा तैयार कराए गए मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था नाकाफी रही।
35 हजार दीपों के लिए मिला एक टीन तेल
गंगा पार रेत पर 11 से 20 सेक्टर में बेसिक शिक्षा विभाग को साढ़े तीन का लाख दीप जलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें एक सेक्टर में 35 हजार दीप जलाने थे। इनको जलाने के लिए किसी सेक्टर को तीन तो किसी सेक्टर को एक टीन तेल दिया गया।
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वहीं शिक्षकों को वापस आने के लिए काफी फजीहत उठानी पड़ी। पर्यटन विभाग की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग को अलॉट की गई नाव का इंतजाम न किया गया। नाव न मिलने के कारण कुछ तो पैदल ही रामनगर की ओर चल पड़े।
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शुक्रवार को सुबह नौ बजे से ही शिक्षक गंगा पार रेती पर जुटने लगे थे। लेकिन दोपहर दो बजे तक कई सेक्टरों को दीया, बाती व तेल नहीं उपलब्ध हो सका था। दोपहर बाद प्रशासन की ओर से दीया तो उपलब्ध कराया गया, लेकिन कई सेक्टरों को आखिरी वक्त तक बाती नहीं मिल सकी। शिक्षकों ने अपने खर्चे से बाती, दीया और तेल का इंतजाम करके देव दीपावली के आयोजन को पूर्ण किया। वहीं रेत पर गंदगी व बदबू के कारण दीपदान की ड्यूटी में लगे शिक्षक परेशान रहे। प्रशासन द्वारा तैयार कराए गए मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था नाकाफी रही।
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35 हजार दीपों के लिए मिला एक टीन तेल
गंगा पार रेत पर 11 से 20 सेक्टर में बेसिक शिक्षा विभाग को साढ़े तीन का लाख दीप जलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें एक सेक्टर में 35 हजार दीप जलाने थे। इनको जलाने के लिए किसी सेक्टर को तीन तो किसी सेक्टर को एक टीन तेल दिया गया।
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वहीं शिक्षकों को वापस आने के लिए काफी फजीहत उठानी पड़ी। पर्यटन विभाग की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग को अलॉट की गई नाव का इंतजाम न किया गया। नाव न मिलने के कारण कुछ तो पैदल ही रामनगर की ओर चल पड़े।