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स्कूल-अस्पताल भाड़ में, सिर्फ तनख्वाह से मतलब
संवाददाता, लोहता।
Updated Fri, 15 Jan 2016 01:08 AM IST
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नौनिहालों का भविष्य संवारने का जिन कंधों पर दारोमदार है, वही प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने पर तुले हैं। शिक्षक तनख्वाह तो ले रहे हैं लेकिन स्कूल जाने की जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं करते। वह बिना अवकाश के ही स्कूल छोड़कर घूम रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों की हकीकत तो और भी चिंताजनक है। बच्चे हैं नहीं, केंद्रों को कागज पर ही चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का भी ग्रामीण इलाकों में हाल ऐसा ही है।
गुरुवार को काशी विद्यापीठ विकास खंङ के दो प्राथमिक विद्यालयों और आंगन बाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के दौरान एसडीएम राजा तालाब को ऐसे ही सच से रूबरू होना पड़ा। बंद मिले आंगनबाङ़ी केंद्र और प्राइमरी स्कूल से नदारद रहीं दो सहायक अध्यापिकाओं समेत कई कर्मियों का वेतन काटने के साथ ही विभागीय कार्यवाई करने के लिए उन्होंने संबंधित विभागों को पत्र लिखा है।
राजा तालाब के एसडीएम त्रिभुवन राम गुरुवार की सुबह बिशुनपुर गांव के प्राइमरी स्कूल पहुंचे तो वहां पर आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत 59 बच्चों की जगह एक भी नहीं थे। बच्चों को नियमित दिया जाने वाला पुष्टाहार भी वहां नहीं था। प्राइमरी स्कूल के किचन में ताला बंद मिला। एक सहायक अध्यापिका भी अनुपस्थित थीं। रसोईयां और सहायक अध्यापिका का वेतन काटने के साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाई के लिए उन्होंने बेसिक शिक्षाधिकारी को पत्र लिखा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी को भी पत्र लिखा गया। इसी तरह पिलखिनी में जब वह आगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचे है तो वहां भी ताला बंद था।
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गांव के लोगों ने बताया कि वह केंद्र कभी -कभार ही खुलता है। वहां की भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उन्होंने डीपीओ को पत्र लिखा। पिलखिनी प्राइमरी स्कूल में मिड डे मिल नहीं बनाए जाने की शिकायत मिली। इसके बाद जब वह कोरौता प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तब वहां भी एक सहायक अध्यापिका अनुपस्थित थीं। यहां के आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ताला बंद मिला। पता चला कि इस स्वास्थ्य उप केंद्र पर काफी दिनों से ताला बंद पड़ा है। सहायक अध्यापिका, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रा के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की उन्होंने संस्तुति की।
शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है। शिक्षक सिर्फ तनख्वाह ले रहे हैं, स्कूल में पढ़ाने की बजाए वह दूसरे कार्यों में मस्त हैं। यही हाल ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा का भी है। आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन तो कागज पर ही हो रहा है। अब यह सब नहीं चलेगा। जल्द ही इस बेपटरी व्यवस्था को सुधारने का अभियान चलाउंगा। त्रिभुवन राम- एसडीएम राजातालाब।
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गुरुवार को काशी विद्यापीठ विकास खंङ के दो प्राथमिक विद्यालयों और आंगन बाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के दौरान एसडीएम राजा तालाब को ऐसे ही सच से रूबरू होना पड़ा। बंद मिले आंगनबाङ़ी केंद्र और प्राइमरी स्कूल से नदारद रहीं दो सहायक अध्यापिकाओं समेत कई कर्मियों का वेतन काटने के साथ ही विभागीय कार्यवाई करने के लिए उन्होंने संबंधित विभागों को पत्र लिखा है।
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राजा तालाब के एसडीएम त्रिभुवन राम गुरुवार की सुबह बिशुनपुर गांव के प्राइमरी स्कूल पहुंचे तो वहां पर आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत 59 बच्चों की जगह एक भी नहीं थे। बच्चों को नियमित दिया जाने वाला पुष्टाहार भी वहां नहीं था। प्राइमरी स्कूल के किचन में ताला बंद मिला। एक सहायक अध्यापिका भी अनुपस्थित थीं। रसोईयां और सहायक अध्यापिका का वेतन काटने के साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाई के लिए उन्होंने बेसिक शिक्षाधिकारी को पत्र लिखा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी को भी पत्र लिखा गया। इसी तरह पिलखिनी में जब वह आगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचे है तो वहां भी ताला बंद था।
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गांव के लोगों ने बताया कि वह केंद्र कभी -कभार ही खुलता है। वहां की भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उन्होंने डीपीओ को पत्र लिखा। पिलखिनी प्राइमरी स्कूल में मिड डे मिल नहीं बनाए जाने की शिकायत मिली। इसके बाद जब वह कोरौता प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तब वहां भी एक सहायक अध्यापिका अनुपस्थित थीं। यहां के आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ताला बंद मिला। पता चला कि इस स्वास्थ्य उप केंद्र पर काफी दिनों से ताला बंद पड़ा है। सहायक अध्यापिका, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रा के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की उन्होंने संस्तुति की।
शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है। शिक्षक सिर्फ तनख्वाह ले रहे हैं, स्कूल में पढ़ाने की बजाए वह दूसरे कार्यों में मस्त हैं। यही हाल ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा का भी है। आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन तो कागज पर ही हो रहा है। अब यह सब नहीं चलेगा। जल्द ही इस बेपटरी व्यवस्था को सुधारने का अभियान चलाउंगा। त्रिभुवन राम- एसडीएम राजातालाब।