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Varanasi News: बीएचयू में तापस और अरबाज को मिला युवा कविता पुरस्कार
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युवा कवि डॉ. रविशंकर उपाध्याय की स्मृति में तापस शुक्ल और अरबाज खान को युवा कविता पुरस्कार से नवाजा गया। बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र में आयोजित समारोह में 2023 सत्र के लिए मध्य प्रदेश अशोकनगर के युवा कवि अरबाज खान और 2024 के लिए काशी के युवा कवि तापस शुक्ल को ये सम्मान दिया गया।
दोनों युवा कवियों को दस हजार रुपये की नकद राशि, अंगवस्त्रम और प्रमाणपत्र दिया गया। मुख्य अतिथि आलोचक प्रो. अरुण होता ने कहा कि दोनों कवियों की कविताओं में अनुभव, घटनाएं और स्मृतियां प्रधान है। घटना केवल घटना नहीं होती बल्कि उसके पीछे पूरा इतिहास होता है। गजलकार प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि अरबाज की कविताएं अपने आकार में बड़ी हैं और उनमें व्याप्त कथात्मकता जीवन से बाहर नहीं बल्कि जीवन गतियों का ही वर्णन करती है।
वहीं, तापस की कविताएं बेहद ही स्वाभाविक हैं। कवि ने जो देखा है, महसूस किया है, उसे ही लिखा है। प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि अरबाज और तापस शुक्ल निश्चित रूप से समृद्ध हिंदी कविता परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। कार्यक्रम में आलोचक कमलेश वर्मा, प्रो. बलिराज पांडेय, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. शैलेंद्र सिंह, व्योमेश शुक्ल, डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, डाॅ. वंशीधर उपाध्याय आदि मौजूद रहे। बीएचयू हिंदी विभाग के छात्र रहे डॉ. रविशंकर उपाध्याय की स्मृति में हर साल 12 जनवरी को उभरते हुए कवि को ये पुरस्कार दिया जाता है। डॉ. रविशंकर का निधन 19 मई 2014 में ब्रेन हैमरेज की वजह से हुआ था।
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दोनों युवा कवियों को दस हजार रुपये की नकद राशि, अंगवस्त्रम और प्रमाणपत्र दिया गया। मुख्य अतिथि आलोचक प्रो. अरुण होता ने कहा कि दोनों कवियों की कविताओं में अनुभव, घटनाएं और स्मृतियां प्रधान है। घटना केवल घटना नहीं होती बल्कि उसके पीछे पूरा इतिहास होता है। गजलकार प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि अरबाज की कविताएं अपने आकार में बड़ी हैं और उनमें व्याप्त कथात्मकता जीवन से बाहर नहीं बल्कि जीवन गतियों का ही वर्णन करती है।
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वहीं, तापस की कविताएं बेहद ही स्वाभाविक हैं। कवि ने जो देखा है, महसूस किया है, उसे ही लिखा है। प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि अरबाज और तापस शुक्ल निश्चित रूप से समृद्ध हिंदी कविता परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। कार्यक्रम में आलोचक कमलेश वर्मा, प्रो. बलिराज पांडेय, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. शैलेंद्र सिंह, व्योमेश शुक्ल, डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, डाॅ. वंशीधर उपाध्याय आदि मौजूद रहे। बीएचयू हिंदी विभाग के छात्र रहे डॉ. रविशंकर उपाध्याय की स्मृति में हर साल 12 जनवरी को उभरते हुए कवि को ये पुरस्कार दिया जाता है। डॉ. रविशंकर का निधन 19 मई 2014 में ब्रेन हैमरेज की वजह से हुआ था।
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