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UP: ज्योतिर्लिंगों की आभा से रोशन हुआ तमिल संगमम, पार्श्वगायक ने कर्नाटक शैली में काशी से रामेश्वरम को जोड़ा
Mon, 18 Dec 2023 10:11 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 18 Dec 2023 10:11 AM IST
सार
नमो घाट पर रविवार शाम दक्षिण के सुप्रसिद्ध गायक सिड श्रीराम ने कर्नाटक शैली में काशी विश्वनाथ और रामेश्वर की संगीतमय आभा में प्रस्तुति दी। उन्होंने गायन का आगाज गणपति वंदना से किया। उन्होंने गंगा पद पंकज, संकट हरण नीलकंठ सुनाकर काशी और तमिल संस्कृति के सुमधुर मिलन और इसके महात्म्य का वर्णन किया।
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नमो घाट पर आयोजित काशी तमिल संगमम के उद्घाटन समारोह सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।
- फोटो : उज्जवल गुप्ता
विस्तार
काशी तमिल संगमम का दूसरा चरण ज्योतिर्लिंगों की आभा से जगमम हो उठा। गंगा तट पर काशी और तमिल की परंपरा, संस्कृति और कला एकाकार हुई। इसके साथ ही दूसरे चरण ने नया अध्याय भी रच दिया गया। तमिलनाडु से आया गंगा दल गंगा तट पर अपने स्वागत से अभिभूत नजर आ रहा था।
हर किसी के होठों पर यही बात थी कि काशी आकर ऐसा लगा कि जैसे कोई मनचाहा सपना साकार हो गया हो। नमो घाट पर रविवार शाम दक्षिण के सुप्रसिद्ध गायक सिड श्रीराम ने कर्नाटक शैली में काशी विश्वनाथ और रामेश्वर की संगीतमय आभा में प्रस्तुति दी।
उन्होंने गायन का आगाज गणपति वंदना से किया। उन्होंने गंगा पद पंकज, संकट हरण नीलकंठ सुनाकर काशी और तमिल संस्कृति के सुमधुर मिलन और इसके महात्म्य का वर्णन किया। दक्षिण के जाने माने कलाकार के मंच पर पहुंचते ही दक्षिण भारत से आए युवाओं ने हर्ष ध्वनि से उनका स्वागत किया।
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सिड श्रीराम ने एक-एक कर चार गीत सुनाए। उन्होंने रंगपुर विहारा से दक्षिण भारत के त्रिची और सापश्य के जरिये राम को समर्पित प्रस्तुति दी। इसके बाद रामनाथम भजेगम के जरिये रामेश्वरम और काशी की महिमा का बखान किया।
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हर किसी के होठों पर यही बात थी कि काशी आकर ऐसा लगा कि जैसे कोई मनचाहा सपना साकार हो गया हो। नमो घाट पर रविवार शाम दक्षिण के सुप्रसिद्ध गायक सिड श्रीराम ने कर्नाटक शैली में काशी विश्वनाथ और रामेश्वर की संगीतमय आभा में प्रस्तुति दी।
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उन्होंने गायन का आगाज गणपति वंदना से किया। उन्होंने गंगा पद पंकज, संकट हरण नीलकंठ सुनाकर काशी और तमिल संस्कृति के सुमधुर मिलन और इसके महात्म्य का वर्णन किया। दक्षिण के जाने माने कलाकार के मंच पर पहुंचते ही दक्षिण भारत से आए युवाओं ने हर्ष ध्वनि से उनका स्वागत किया।
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सिड श्रीराम ने एक-एक कर चार गीत सुनाए। उन्होंने रंगपुर विहारा से दक्षिण भारत के त्रिची और सापश्य के जरिये राम को समर्पित प्रस्तुति दी। इसके बाद रामनाथम भजेगम के जरिये रामेश्वरम और काशी की महिमा का बखान किया।
काशी विश्वनाथ के धाम आना सौभाग्य
पार्श्व गायक सिड श्रीराम ने कहा कि काशी में आकर सुखद अहसास हुआ है। काशी के बारे में काफी सुना था। यहां गंगा व काशी विश्वनाथ को स्वरांजलि अर्पित करना बेहद खास है। उन्होंने कहा कि वे काशी से काशी विश्वनाथ की सुंदर अनुकृति लेकर जाएंगे। काशी और तमिलनाडु को समर्पित संगीत को छह माह में तैयार किया। संगीत के जरिये उत्तर और दक्षिण को एक सूत्र में पिरोना कठिन था लेकिन काशी विश्वनाथ के आशीर्वाद से ये संभव हो गया। शास्त्रीय संगीत सभी संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोता है।
पार्श्व गायक सिड श्रीराम ने कहा कि काशी में आकर सुखद अहसास हुआ है। काशी के बारे में काफी सुना था। यहां गंगा व काशी विश्वनाथ को स्वरांजलि अर्पित करना बेहद खास है। उन्होंने कहा कि वे काशी से काशी विश्वनाथ की सुंदर अनुकृति लेकर जाएंगे। काशी और तमिलनाडु को समर्पित संगीत को छह माह में तैयार किया। संगीत के जरिये उत्तर और दक्षिण को एक सूत्र में पिरोना कठिन था लेकिन काशी विश्वनाथ के आशीर्वाद से ये संभव हो गया। शास्त्रीय संगीत सभी संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोता है।
शिव-शक्ति की आराधना ने मन मोहा
पीएम के आगमन से पूर्व दक्षिण भारतीय कलाकारों ने शिव शक्ति की आराधना को समर्पित प्रस्तुति दी। इसमें शिव के साथ शक्ति स्वरूपा काली के दो रूप और पार्वती के स्वरूपों ने प्रस्तुति दी। इसके बाद कलाअट्टम, नाद अट्टम, पंबई, उकाई वाद्य यंत्रों पर कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आठ घनपाठियों ने घनपाठ किया। इसमें वेंकट रमण घनपाठी के नेतृत्व में कृष्ण, अरूप प्रसाद, सतीश, गणेश, श्रीराम, प्रणव, शंकर रावण, रामचंद्रम शामिल रहे।
पीएम के आगमन से पूर्व दक्षिण भारतीय कलाकारों ने शिव शक्ति की आराधना को समर्पित प्रस्तुति दी। इसमें शिव के साथ शक्ति स्वरूपा काली के दो रूप और पार्वती के स्वरूपों ने प्रस्तुति दी। इसके बाद कलाअट्टम, नाद अट्टम, पंबई, उकाई वाद्य यंत्रों पर कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आठ घनपाठियों ने घनपाठ किया। इसमें वेंकट रमण घनपाठी के नेतृत्व में कृष्ण, अरूप प्रसाद, सतीश, गणेश, श्रीराम, प्रणव, शंकर रावण, रामचंद्रम शामिल रहे।
पुडुचेरी से आए दल का नमो घाट पर स्वागत
पुडुचेरी से काशी आए चार सौ महिला पुरुषों के दल का रविवार शाम नमो घाट पर स्वागत हुआ। मद्रास विश्वविद्यालय के छात्र एस कुमारवेल ने बताया कि काशी में उन्हें अपनी संस्कृति जैसी लगी। कहा कि काशी आना और काशी विश्वनाथ दर्शन करना अच्छा लगा। अश्विन टीएन ने कहा कि वे बीएससी बायो के छात्र हैं। काशी तमिल संगमम आने की बात आई तो उन्हें बेहद खुशी हुई। हमारे यहां जिस प्रकार शिव की प्रधानता है वैसे ही काशी विश्वनाथ दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण भारतीय युवाओं के दल का नेतृत्व विद्याश्री और श्रीनिवासन कर रहे हैं।
पुडुचेरी से काशी आए चार सौ महिला पुरुषों के दल का रविवार शाम नमो घाट पर स्वागत हुआ। मद्रास विश्वविद्यालय के छात्र एस कुमारवेल ने बताया कि काशी में उन्हें अपनी संस्कृति जैसी लगी। कहा कि काशी आना और काशी विश्वनाथ दर्शन करना अच्छा लगा। अश्विन टीएन ने कहा कि वे बीएससी बायो के छात्र हैं। काशी तमिल संगमम आने की बात आई तो उन्हें बेहद खुशी हुई। हमारे यहां जिस प्रकार शिव की प्रधानता है वैसे ही काशी विश्वनाथ दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण भारतीय युवाओं के दल का नेतृत्व विद्याश्री और श्रीनिवासन कर रहे हैं।