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चुनौती को लक्ष्य मान शिक्षकों ने बदल डाली विद्यालय की सूरत
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कुछ महीने पहले चिरईगांव ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय पचरांव की पहचान जर्जर दीवारें और टूटी फर्श से थी, लेकिन आज उनकी पहचान चमचमाती फर्श, दीवारों पर शानदार पेंटिंग, अत्याधुनिक लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब और मिड डे मील के लिए बनाए गए डाइनिंग हॉल से है। यह सब मुमकिन हो पाया है, प्रधानाध्यापक और वहां के शिक्षकों की एक महीने की कड़ी मेहनत की वजह से। एक दिन बीएसए ने इस स्कूल का निरीक्षण किया और शिक्षकों को इसे ब्लॉक का प्रेरक विद्यालय बनाने की चुनौती दी। प्रधानाध्यापक व शिक्षकों ने बीएसए की इस चुनौती को लक्ष्य मानकर विद्यालय की तस्वीर ही बदल दी है। आज यह विद्यालय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रधानाध्यापक ने खर्च किए एक लाख 70 हजार रुपये
विद्यालय का कायाकल्प करने के लिए जब प्रधानाध्यापक छोटू राम के पास सरकारी बजट की कमी हुई तो उन्होंने अपने वेतन से एक लाख 70 हजार रुपये लगा दिए। प्रधानाध्यापक ने सबसे पहले विद्यालय भवन की मरम्मत कराई। इसके बाद बाला पेंटिंग के साथ बच्चों को काशी की कला, संस्कृति और इतिहास से रूबरू कराने के लिए दीवारों पर घाट, गंगा आरती, एतिहासिक इमारतें आदि बनवाईं।
शिक्षकों ने लगाया दो लाख तीस हजार
प्रधानाध्यापक की पहल को मूर्त रूप देने के लिए शिक्षकों ने भी सहयोग दिया। शिक्षकों ने दो लाख तीस हजार की धनराशि दान कर विद्यालय में ग्रीन पार्क, टाइल्स, रंगरोगन, लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें सहित डेस्क व बेंच की व्यवस्था कराई है।
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एनिमेशन के जरिए हो रही बच्चों पढ़ाई
इस विद्यालय के जो बच्चे अब तक सिर्फ किताबों के जरिए पढ़ाई करते थे। अब वह तकनीकी के सहारे शिक्षा ले रहे हैं। इसमें बच्चों के सिलेबस से जुड़े पाठ्यक्रम को कार्टून कैरेक्टर के जरिये पढ़ाया जा रहा है।
लगती थी मस्ती की पाठशाला
कोरोना काल में बच्चे स्कूल तो नहीं आए, लेकिन शिक्षक उन्हें पढ़ाने गांव तक जाते थे। कंपोजिट विद्यालय पंचराव के प्रधानाध्यापक व शिक्षकों ने बच्चों के मन से पढ़ाई का डर निकालने के लिए हर शनिवार को बस्ता मुक्त शिक्षा प्रदान करने की पहल की। शनिवार को मोहल्ला पाठशाला में मस्ती होती थी। खेल के माध्यम से गणित, हिंदी, अंग्रेजी की शिक्षा दी जाती थी।
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प्रधानाध्यापक ने खर्च किए एक लाख 70 हजार रुपये
विद्यालय का कायाकल्प करने के लिए जब प्रधानाध्यापक छोटू राम के पास सरकारी बजट की कमी हुई तो उन्होंने अपने वेतन से एक लाख 70 हजार रुपये लगा दिए। प्रधानाध्यापक ने सबसे पहले विद्यालय भवन की मरम्मत कराई। इसके बाद बाला पेंटिंग के साथ बच्चों को काशी की कला, संस्कृति और इतिहास से रूबरू कराने के लिए दीवारों पर घाट, गंगा आरती, एतिहासिक इमारतें आदि बनवाईं।
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शिक्षकों ने लगाया दो लाख तीस हजार
प्रधानाध्यापक की पहल को मूर्त रूप देने के लिए शिक्षकों ने भी सहयोग दिया। शिक्षकों ने दो लाख तीस हजार की धनराशि दान कर विद्यालय में ग्रीन पार्क, टाइल्स, रंगरोगन, लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें सहित डेस्क व बेंच की व्यवस्था कराई है।
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एनिमेशन के जरिए हो रही बच्चों पढ़ाई
इस विद्यालय के जो बच्चे अब तक सिर्फ किताबों के जरिए पढ़ाई करते थे। अब वह तकनीकी के सहारे शिक्षा ले रहे हैं। इसमें बच्चों के सिलेबस से जुड़े पाठ्यक्रम को कार्टून कैरेक्टर के जरिये पढ़ाया जा रहा है।
लगती थी मस्ती की पाठशाला
कोरोना काल में बच्चे स्कूल तो नहीं आए, लेकिन शिक्षक उन्हें पढ़ाने गांव तक जाते थे। कंपोजिट विद्यालय पंचराव के प्रधानाध्यापक व शिक्षकों ने बच्चों के मन से पढ़ाई का डर निकालने के लिए हर शनिवार को बस्ता मुक्त शिक्षा प्रदान करने की पहल की। शनिवार को मोहल्ला पाठशाला में मस्ती होती थी। खेल के माध्यम से गणित, हिंदी, अंग्रेजी की शिक्षा दी जाती थी।