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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Syndicate of over 200 illegal ambulances in Banaras vehicles operating as far as Karnataka without permits

मरीजों की मजबूरी पर मुनाफा: बनारस में 200 से ज्यादा अवैध एंबुलेंस का सिंडिकेट, बिना परमिट कर्नाटक तक दौड़ रहीं

Wed, 22 Jul 2026 05:53 PM IST
Pragati Chand अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी
अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी Published by: Pragati Chand Updated Wed, 22 Jul 2026 05:53 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में 200 से ज्यादा अवैध एंबुलेंस का सिंडिकेट सक्रिय हैं। पूरे शहर में प्राइवेट एंबुलेंस नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। शहर में लंका, सुंदरपुर, महमूरगंज, अर्दली बाजार, शिवपुर और अन्य सीएचसी-पीएचसी के पास एंबुलेंस खड़े रहते हैं।  

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Syndicate of over 200 illegal ambulances in Banaras vehicles operating as far as Karnataka without permits
एंबुलेंस में बैठा चालक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी जिले में मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर निजी एंबुलेंस संचालक चांदी काट रहे हैं। एक ओर जहां गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचना होता है, वहीं जिले में चल रहीं 200 से अधिक प्राइवेट एंबुलेंस नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनका सिंडिकेट है। 

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बिना परमिट एंबुलेंस कर्नाटक तक दौड़ रहीं। इन एंबुलेंसों पर न तो परिवहन विभाग और न ही स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण है। नतीजतन, ये गाड़ियां मनमाना किराया वसूल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन गाड़ियों की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है या जो कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर हैं, उन पर केवल एंबुलेंस लिखवाकर धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इन वाहनों के पास न तो कोई फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही जरूरी दस्तावेज। 
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नियमों के मुताबिक, एक एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और प्राथमिक चिकित्सा किट अनिवार्य है, लेकिन इनमें केवल स्ट्रेचर के अलावा कुछ नहीं होता। स्ट्रेचर के भी गद्दे फटे हुए हैं। शहर में लंका, सुंदरपुर, महमूरगंज, अर्दली बाजार, शिवपुर और अन्य सीएचसी-पीएचसी के पास एंबुलेंस खड़े रहते हैं।  

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सीन – 1 (अर्दली बाजार क्षेत्र में एक प्राइवेट अस्पताल के बाहर)
रिपोर्टर –
एक एंबुलेंस चाहिए। मरीज को अस्पताल ले आना है।
एजेंट – मिल जाएगा। सामने अंदर महेश भैया हैं, उनसे बात कर लीजिए।
रिपोर्टर (भीतर जाने पर) – यहां महेश भैया कौन है? एंबुलेंस से मरीज लाना है।
एजेंट – कहां से लाना है?
रिपोर्टर – चोलापुर के आगे धरसौना से। इमरजेंसी है थोड़ी।
एजेंट – दूर है थोड़ा, एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा।
रिपोर्टर – कितना एक्स्ट्रा देना होगा?
एजेंट (फोन पर बात करने के बाद) – मिल जाएगी एंबुलेंस, थोड़ी देर वेट करिए। पैसा ड्राइवर आएंगे तो बताएंगे।

सीन – 2 (लंका क्षेत्र)
रिपोर्टर –
एंबुलेंस मिल जाएगी? मरीज को लाकर भर्ती कराना है।
ड्राइवर – कहां से लाना है?
रिपोर्टर – मैदागिन से लाना है। डिलीवरी केस है, ऑक्सीजन भी चाहिए।
ड्राइवर – 1800 रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर – अरे, मैदागिन कितना दूर है ! कुछ कम करिए। 10 किमी ही तो है।
ड्राइवर – उससे कम नहीं होगा। शहर में जाम है।

सीन -3 (नरिया क्षेत्र)
रिपोर्टर –
मरीज को अस्पताल ले आना है। एंबुलेंस मिल जाएगी?
ड्राइवर – हमारी एंबुलेंस तो खाली नहीं है। अभी हमें कर्नाटक जाना है।
रिपोर्टर – ये एंबुलेंस कर्नाटक कैसे जाएगी? शहर से बाहर जाने की परमिशन होती है क्या?
ड्राइवर – हमलोग प्राइवेट गाड़ी चलाते हैं, जा सकते हैं।

मनमाना किराया: 10 किलोमीटर के 1800 रुपये
मरीजों और उनके तीमारदारों की जेब पर डाका डालने का आलम यह है कि प्रशासन की तरफ से किराया फिक्स नहीं है। एंबुलेंस संचालक दूरी के हिसाब से नहीं बल्कि मरीज की गंभीर स्थिति देखकर रेट तय करते हैं। महज 10 किलोमीटर के लिए मरीजों से 1800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। रात को या आपातकालीन स्थिति में यह रकम और भी ज्यादा बढ़ा दी जाती है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज के जाल में फंसने को मजबूर हैं। वाराणसी के प्रमुख अस्पतालों और मेडिकल हब के आसपास इन अवैध एंबुलेंसों का सबसे बड़ा जाल फैला हुआ है। निजी अस्पतालों और कबाड़ एंबुलेंस संचालकों के बीच साठगांठ इतनी मजबूत है कि तीमारदारों को सरकारी या सही एंबुलेंस बुलाने का मौका ही नहीं दिया जाता।

एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन आरटीओ से होता है। स्वास्थ्य विभाग में जो भी एंबुलेंस चलाने के लिए आवेदन आते हैं, वह आरटीओ के माध्यम से आते हैं। सभी की जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें मंजूरी दी जाती है। -डॉ. मुकेश कुमार, सीएमओ 

सभी एंबुलेंस की जांच की जाती है। रजिस्ट्रेशन और मानक के खिलाफ मिलने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाती है। -मनोज वर्मा, संभागीय परिवहन अधिकारी, वाराणसी

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