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बनारस की स्वाती को मिलेगा काका साहेब कालेलकर सम्मान
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Fri, 22 Dec 2017 05:57 PM IST
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स्वाती शाकम्भरी
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महिला हितों के लिए काम करने वाली बनारस की स्वाती शाकम्भरी को काका साहेब कालेलकर साहित्य सम्मान 2017 मिलेगा। स्वाती को 23 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा की ओर से काका साहेब कालेलकर की 132वीं जयंती के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा के मंत्री कुसुम साह, संयोजक प्रसून लतोत एवं विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री अतुल प्रभाकर ने पत्र भेजकर गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा की ओर से स्वाती को आमांत्रित किया है। इससे पहले भी स्वाती शाकम्भरी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
काका साहेब कालेलकर पुरस्कार साहित्य, पत्रकारिता, खेल, समाज-सुधार और राजनीति में हर साल दिया जाता है। स्वाती भदोही की मूल निवासी हैं। उन्होंने बीएचयू से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी की पढ़ाई की।
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स्वाती शाकम्भरी का कहना है कि साहित्य संस्कृति का ही रूप है। जिसे संजोने की जरूरत है। स्वाती ने पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही महिला हितों के काम करना शुरू कर दिया। स्वाती ने महिला स्वास्थ्य पर बहुत काम किया।
स्वाती ने बताया कि पढ़े लिखे युवा वर्ग मसिक धर्म को लेकर बात करने से कतराते हैं तो गांव आदि क्षेत्रों में क्या हाल होगा। इसी बात को लेकर आगे बढ़ी स्वाती ने महिलाओं को जागरुक करने पर काम शुरू किया। उन्होंने महिला समाज में मासिक धर्म जैसे विषयों पर जागरुक करना तथा उससे होने वाली परेशानी से बचने को लेकर अभियान चलाया।
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गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा के मंत्री कुसुम साह, संयोजक प्रसून लतोत एवं विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री अतुल प्रभाकर ने पत्र भेजकर गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा की ओर से स्वाती को आमांत्रित किया है। इससे पहले भी स्वाती शाकम्भरी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
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काका साहेब कालेलकर पुरस्कार साहित्य, पत्रकारिता, खेल, समाज-सुधार और राजनीति में हर साल दिया जाता है। स्वाती भदोही की मूल निवासी हैं। उन्होंने बीएचयू से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी की पढ़ाई की।
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स्वाती शाकम्भरी का कहना है कि साहित्य संस्कृति का ही रूप है। जिसे संजोने की जरूरत है। स्वाती ने पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही महिला हितों के काम करना शुरू कर दिया। स्वाती ने महिला स्वास्थ्य पर बहुत काम किया।
स्वाती ने बताया कि पढ़े लिखे युवा वर्ग मसिक धर्म को लेकर बात करने से कतराते हैं तो गांव आदि क्षेत्रों में क्या हाल होगा। इसी बात को लेकर आगे बढ़ी स्वाती ने महिलाओं को जागरुक करने पर काम शुरू किया। उन्होंने महिला समाज में मासिक धर्म जैसे विषयों पर जागरुक करना तथा उससे होने वाली परेशानी से बचने को लेकर अभियान चलाया।