काशी को पद्म पुरस्कार: 126 साल की उम्र में बाबा शिवानंद को मिला पद्मश्री, राधेश्याम खेमका को मरणोपरांत पद्मविभूषण सम्मान
सोमवार को जब राष्ट्रपति भवन में स्वामी शिवानंद के नाम की घोषणा हुई तो वह बड़ी ही फुर्ती के साथ अपनी कुर्सी से उठे और नंगे पैर तेज चलते हुए मंच की तरफ बढ़े और तीन बार अपना शीश नवाया। सबसे पहले बनारस के सांसद व पीएम मोदी के सामने उन्होंने शीश झुकाया।
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योग गुरु बाबा शिवानंद को पद्मश्री सम्मान मिलने का क्षण हर काशीवासी के लिए यादगार बन गया। सम्मान मिलने से पहले योग गुरु ने राष्ट्रपति भवन में तीन बार शीश नवाया। जब वह प्रधानमंत्री के सामने प्रणाम करने के लिए झुके तो पीएम ने भी योग साधक की साधना को प्रणाम किया।
वहीं गीता प्रेस से प्रकाशित कल्याण पत्रिका के संपादक राधेश्याम खेमका को सोमवार को मरणोपरांत देश का दूसरा सबसे बड़ा पद्म विभूषण सम्मान मिला। राधेश्याम के बेटे कृष्ण कुमार खेमका ने दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों सम्मान प्राप्त किया।
सोमवार को जब राष्ट्रपति भवन में स्वामी शिवानंद के नाम की घोषणा हुई तो वह बड़ी ही फुर्ती के साथ अपनी कुर्सी से उठे और नंगे पैर तेज चलते हुए मंच की तरफ बढ़े और तीन बार अपना शीश नवाया। सबसे पहले बनारस के सांसद व पीएम मोदी के सामने उन्होंने शीश झुकाया।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने भी कुर्सी से उठकर स्वामी शिवानंद को प्रणाम किया। इस दौरान उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और गृहमंत्री अमित शाह समेत कई नेता अपनी कुर्सी छोड़कर उठ गए। तालियों से उनका अभिवादन किया गया।
इसके बाद वह रेड कार्पेट और मंच के पास दो बार झुककर राष्ट्रपति को दंडवत प्रणाम किए। यह दृश्य देख राष्ट्रपति कोविंद भी अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए और आगे बढ़कर शिवानंद बाबा को उठाया और पद्मश्री अलंकार से सम्मानित किया। राष्ट्रपति कोविंद ने मुस्कुराते हुए बाबा से बातचीत भी की।
रोजाना तीसरे तल पर चढ़ते-उतरते हैं
दुर्गाकुंड-कबीरनगर इलाके के रहने वाले बाबा शिवानंद की उम्र 126 साल है। शिवानंद बाबा तीसरे तल पर रहते हैं और रोजाना सीढ़ियों से ही चढ़ते उतरते हैं। बाबा शिवानंद को योग करते हुए 120 साल से ऊपर हो गए हैं। शिवानंद बाबा शाकाहारी हैं। वे रोज सुबह 3 बजे उठ जाते हैं। इसके बाद एक घंटे योग का अभ्यास करते हैं। इसके बाद पूजा-पाठ करते हैं। वे उबला खाना और सेंधा नमक खाते हैं।
1896 में हुआ था जन्म
शिवानंद बाबा के आधार कार्ड पर जन्मतिथि 8 अगस्त 1896 दर्ज है। उनका जन्म बंगाल के श्रीहट्टी जिले में हुआ था। भूख की वजह से उनके माता-पिता की मौत हो गई थी, जिसके बाद से बाबा आधा पेट भोजन ही करते हैं। माता-पिता की मौत के बाद बाबा बंगाल से काशी आ गए और यहां पर गुरु ओंकारानंद से दीक्षा ली। 1925 में अपने गुरु के आदेश पर वह दुनिया भ्रमण पर निकले और करीब 34 साल तक देश-विदेश घूमते रहे।
लोक गायिका अजीता श्रीवास्तव को मिला पद्मश्री सम्मान
मिर्जापुर जिले की लोक गायिका अजीता श्रीवास्तव को सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान प्रदान किया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में शाम पांच बजे एक भव्य समारोह में उनको यह सम्मान दिया गया। अजीता श्रीवास्तव ने लोक गायन की विविध विधाओं में गायन किया है। आम जीवन की खुशी, दुख व उत्सव की झांकी उनके गीतों में मिलती है। इसके पहले भी उनको कई सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
राधेश्याम खेमका प्राथमिक शिक्षा के बाद बस गए बनारस में
मूलरूप से बिहार के मुंगेर में 1935 में जन्मे राधेश्याम खेमका प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद सपरिवार वाराणसी में आकर बस गए। यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए किया। लेकिन, अपनी कर्मभूमि गोरखपुर के गीता प्रेस को बनाई।
राधेश्याम खेमका ने 40 वर्षों से गीता प्रेस में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए अनेक धार्मिक पत्रिकाओं का संपादन किया। इनमें कल्याण प्रमुख है। साथ ही वह मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट सहित विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े थे।
मेडिसिन में प्रो. केके त्रिपाठी को मिला पद्मश्री
बीएचयू से सेवानिवृत्त प्रो. केके त्रिपाठी को भी सोमवार को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने के बाद प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि बाबा विश्वनाथ और महामना के आशीर्वाद से यह सम्मान मिला है। 2016 में बीएचयू से सेवानिवृत्त होने के बाद नियमित मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं।