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जयंती विशेष: स्वामी दयानंद सरस्वती ने काशी के विद्वानों से किया था शास्त्रार्थ, आज कई कार्यक्रम आयोजित

Sat, 26 Feb 2022 11:21 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 26 Feb 2022 11:21 AM IST
सार

हिंदी कैलेंडर के अनुसार स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती आज है। स्वामी दयानंद आर्य समाज के संस्थापक, महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे। 

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Swami Dayanand Saraswati Jayanti 2022 Special story he debates with scholars of Kashi varanasi on murti puja
दयानंद सरस्वती - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने काशी के विद्वानों से दुर्गाकुंड स्थित आनंद पार्क में शास्त्रार्थ किया था। बीएचयू प्राचीन इतिहास विभाग के डॉ. विनोद कुमार जायसवाल के मुताबिक, स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म हिंदी कैलेंडर के अनुसार जन्म 26 फरवरी को हुआ था।

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मूर्ति पूजा के विरोध में उन्होंने काशी में शास्त्रार्थ किया था। इसकी अध्यक्षता काशी नरेश ईश्वरी नारायण सिंह ने की। पंडित विशुद्धानंद सरस्वती और पं. बालशास्त्री ने काशी का प्रतिनिधित्व किया था। गोपीनाथ पाठक ने शास्त्रार्थ का प्रकाशन 1926 ईस्वी में 24 पृष्ठों में बनारस लाइट प्रेस से कराया।
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शास्त्रार्थ का पुन: प्रकाशन 1870 ईस्वी में काशी के स्टार प्रेस और 1880 ईस्वी में आर्य दर्पण पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। दुर्गाकुंड से पद्मश्री जाने वाले मार्ग के दाहिने आनंद पार्क है। स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती के अवसर पर आर्य समाज प्रतिनिधि सभा वाराणसी-चंदौली की ओर से विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत 26 फरवरी को होगी। इसमें यज्ञ, भजन, प्रवचन आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

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सात बार काशी यात्रा पर आए थे स्वामी दयानंद

स्वामी दयानंद सरस्वती का काशी से गहरा जुड़ाव है। अपने पूरे जीवन काल में स्वामी जी सात बार काशी यात्रा पर आए थे। दूसरी यात्रा 16 नवंबर 1869 में उन्होंने दुर्गाकुंड स्थित आनंद पार्क में विश्व प्रसिद्ध शास्त्रार्थ किया। अध्यक्षता तत्कालीन काशी नरेश ईश्वरी नारायण सिंह ने की थी। इसके बाद स्वामी दयानंद की ख्याति देश-विदेश में फैल गई। इस स्थल को विद्वत समाज बड़े ही आदर के साथ देखता है। लोग यहां पर शीश नवाने आते हैं।

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