जयंती विशेष: स्वामी दयानंद सरस्वती का दूसरा काशी दौरा है यादगार, आनंदबाग में किया था ऐतिहासिक शास्त्रार्थ
स्वामी दयानंद आर्य समाज के संस्थापक, महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे। अपने पूरे जीवन काल में स्वामी जी सात बार काशी यात्रा पर आए थे। दूसरी यात्रा 16 नवंबर 1869 में उन्होंने दुर्गाकुंड स्थित आनंद पार्क में विश्व प्रसिद्ध शास्त्रार्थ किया।
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आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का काशी से गहरा जुड़ाव है। खासकर दुर्गाकुंड स्थित आनंद बाग से स्वामी दयानंद सरस्वती की स्मृतियां ऐसी जुड़ी हुई हैं कि यह स्थल सभी के लिए वंदनीय है। इसी बाग में उन्होंने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए ऐतिहासिक शास्त्रार्थ किया और हर एक सवाल का जवाब दिया।
अंग्रेजी तिथि के अनुसार, 12 फरवरी को स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती मनाई जाएगी। आर्य समाज के मंत्री प्रमोद आर्य ने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन की घटनाओं से संबंधित प्रमुख पांच स्थानों में आनंद बाग का स्थान सर्वोपरि है।
सात बार काशी यात्रा पर आए
अपने पूरे जीवन काल में स्वामी जी सात बार काशी यात्रा पर आए थे। दूसरी यात्रा 16 नवंबर 1869 में उन्होंने दुर्गाकुंड स्थित आनंद पार्क में विश्व प्रसिद्ध शास्त्रार्थ किया। अध्यक्षता तत्कालीन काशी नरेश ईश्वरी नारायण सिंह ने की थी। इसके बाद स्वामी दयानंद की ख्याति देश-विदेश में फैल गई। इस स्थल को विद्वत समाज बड़े ही आदर के साथ देखता है। लोग यहां पर शीश नवाने आते हैं।
स्थल की महत्ता को देखते हुए कई दशक पूर्व नगर निगम द्वारा दुर्गाकुंड से आनंद बाग तक जाने वाले रास्ते का नाम महर्षि दयानंद काशी शास्त्रार्थ मार्ग रखा गया। पार्क में एक यज्ञशाला का निर्माण कराकर आर्य उप प्रतिनिधि सभा को सौंपा गया। एक नवंबर 1977 को तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री नरसिंह यादव ने इसका उद्घाटन किया था। उस समय से यहां सत्संग, यज्ञ तथा शास्त्रार्थ की स्मृति में वैदिक महोत्सव मनाया जाता है।