वाराणसी: स्वामी अद्भुत वल्लभदास ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग छोड़ संस्कृत में हासिल किए 10 स्वर्ण पदक
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कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री और कुछ सालों तक बतौर कंप्यूटर इंजीनियर काम करने के बाद अचानक संसार से मोहभंग हो गया। गुरु दीक्षा ली और नए सिरे से शुरू की संस्कृत की पढ़ाई। संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सबसे अधिक 10 गोल्ड मेडल हासिल करने वाले स्वामी अद्भुत वल्लभ दास की जीवन यात्रा भी अद्भुत है।
पांच दिसंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के हाथों स्वामी वल्लभ को आचार्य की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए 10 गोल्ड मेडल हासिल होंगे। स्वामी अद्भुत वल्लभ दास स्वामीनारायण मंदीर, लोया धाम गुजरात से संबध रखते हैं। उनके गुरु स्वामी घनश्याम प्रकाश दास जी हैं।
स्वामी अद्भुत ने बताया कि दुनिया में गुरू के बिना हर इंसान अधूरा है, गुरु की सान्निध्यता से मनुष्य ऊर्जावान, प्रकाशवान बनता है। आज जो कुछ भी प्रयास कर सका हूं गुरू की कृपा और अशीष का प्रतिफल है। स्वामी जी ने कहा कि एक सच्चा शिक्षक, एक सच्चा गुरु का मार्ग दर्शन, सच्चा प्रोत्साहन और सच्चे साथ से ही संस्कृत के क्षेत्र में प्रवेश कर पाया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी से कहना चाहता हूं कि भारत एक संस्कृत, संस्कृति और संस्कार की देव भूमि है। जो भारत का संस्कार है वह हम सबका संस्कार है। देश का सम्मान हमारा सम्मान है। देश की गरिमा का आजीवन पालन करूंगा। हम सभी राष्ट्र के आदर के साथ सदैव समर्पित हैं।
कुलपति प्रो राजाराम शुक्ल ने स्वामी अद्भूत वल्लभ दास को हृदय से बधाई देते हुये कहा कि स्वामी जी संस्कृत और आधुनिक तकनीकी के क्षेत्र में समन्वय स्थापित कर एक नया अन्वेषण करेंगे।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 37वें दीक्षांत महोत्सव मे 32 मेधावियों को सुवर्ण पदक द्दिये जाएंगे, जिसमें सर्वाधिक मेडल आचार्य के वेदांत विषय मे सर्वाधिक अंक पाने वाले स्वामी अद्भुत वल्लभ दास जी को 10 सुवर्ण पदक दिये जाएंगे।