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Varanasi News: मोटे अनाज की वैश्विक मान्यता पर जी-20 देशों का समर्थन

Wed, 19 Apr 2023 12:41 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Apr 2023 12:41 AM IST
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Support of G-20 countries on global recognition of millets
मोटे अनाज की वैश्विक मान्यता पर जी-20 देशों का समर्थन
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- बोले विशेषज्ञ... वैश्विक स्तर पर होगा शोध
- पोषक तत्वों से भरपूर अनाज खाद्य संकट की चुनौतियों से निजात दिलाने में सक्षम
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज (श्री अन्न) को वैश्विक मान्यता देने पर जी-20 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन मिला है। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि मोटे अनाज जलवायु के अनुकूल हैं। वैश्विक स्तर पर शोध किया जा सकता है। अनाज वैश्विक खाद्य संकट को दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं। इनकी उत्पादन क्षमता अच्छी होती है।
जी-20 देशों के कृषि वैज्ञानिकों की तीन दिवसीय (17, 18, 19 अप्रैल) बैठक के दूसरे दिन किसानों की आय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। कहा गया कि फसल व खाद्य की क्षति कम की जानी चाहिए। इसमें डिजिटल कृषि तकनीक मददगार साबित हो सकती है। पारिवारिक खेती को भी बढ़ावा देना होगा। एग्री टेक स्टार्टअप व इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की जरूरत है। भूमि की उर्वरा शक्ति को मजबूत बनाने की दिशा में काम करना है। प्रयोगशाला की मदद से शोध को आगे बढ़ाना है। वैश्विक सहयोग से ही कृषि चुनौतियों से निजात पाया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने महर्षि अभियान की सराहना की है। उनका कहना है कि मोटा और प्राचीन अनाज पोषक तत्वों से भरपूर हैं। कम क्षेत्रफल में फसलों की ज्यादा पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इससे पहले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डाॅ. हिमांशु पाठक की अध्यक्षता में डिजिटल कृषि तकनीक को बढ़ावा देने पर बात हुई। इसमें जी-20 देशों के 80 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय संगठन व विशेष आमंत्रित सदस्यों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी राय दी है।
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भारत-फ्रांस के बीच द्विपक्षीय बैठक, चुनौतियों से मिलकर निपटेंगे
जी-20 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। इसमें दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, फसल विविधीकरण, मिट्टी, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और बायोफोर्टिफाइड फसलों से संबंधित मामलों में एक दूसरे का सहयोग करने पर प्रतिबद्धता जताई है। भारत की ओर से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डाॅ. हिमांशु पाठक और राष्ट्रीय कृषि, खाद्य एवं पर्यावरण अनुसंधान संस्थान फ्रांस के अध्यक्ष फिलिप माउगिन ने बैठक में हिस्सा लिया।
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कृषि विकास की नई राहें खुलेंगीअंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के महानिदेशक जीन बैले ने सार्वजनिक-निजी कृषि अनुसंधान एवं विकास पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया-भर से आए बुद्धिजीवी कृषि वैज्ञानिकों के विचारों से प्रभावित हैं। इससे कृषि अनुसंधान व कृषि विकास की नई राहें खुलेंगी। कृषि से जुड़ी चुनौतियों का समाधान होगा। सार्वजनिक और निजी भागीदारी भी तय हो जाएगी।



आज के आयोजन
जी-20 देशों के सम्मेलन का समापन बुधवार को होगा। इसमें कृषि वैज्ञानिक खाद्य संकट और उसकी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद सदस्य देशों के प्रतिनिधि बड़ालालपुर स्थित हस्तकला संकुल जाएंगे। हस्तकला संकुल के बारे में जानकारी लेंगे।
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