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यूपीः भदोही में सप्लाई इंस्पेक्टर ने फांसी लगाकर दी जान, ढाई साल से नहीं मिल रहा था वेतन

Fri, 28 Sep 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही Updated Fri, 28 Sep 2018 09:09 AM IST
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supply inspector committed suicide at bhadohi at uttar pradesh
ज्ञानपुर स्थित किराए के कमरे में फंदे से लटका मिला शव - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में तैनात सप्लाई इंस्पेक्टर की खुदकुशी का सनसनीखेज मामला सामने आया है।  भदोही तहसील में तैनात आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप यादव (58) ने बुधवार देर रात फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। ज्ञानपुर स्थित किराए के कमरे में सुबह उनका शव पंखे के सहारे लटकता मिला। परिजनों के आने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को उतारा। विजय प्रताप यादव को ढाई साल से वेतन नहीं मिल रहा था। सर्विस बुक अब तक कार्यालय नहीं आई थी। 
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प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र के भगुवा चुंगी निवासी विजय प्रताप ढाई वर्ष पहले आपूर्ति निरीक्षक के पद पर स्थानांतरित होकर भदोही आए थे। इससे पहले वह प्रतापगढ़ जिला आपूर्ति कार्यालय में बाबू थे।
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यहां ज्ञानपुर के राजा बाजार मोहल्ले में कुंवर अनंत नारायण इंटर कालेज के समीप किराए पर कमरा लेकर अकेले रहते थे। बृहस्पतिवार सुबह वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकले तो पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने पानी भरने के लिए उन्हें जगाने का प्रयास किया।
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 अंदर कोई गतिविधि नहीं होने पर उसने पड़ोस के मकान पर जाकर खिड़की से अंदर झांका तो विजय प्रताप गमछे के फंदे से लटके हुए थे। तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी गई। कुछ देर बाद ज्ञानपुर कोतवाली पुलिस के अलावा एडीएम, एसडीएम और डीएसओ समेत आपूर्ति विभाग के अधिकारी व कर्मचारी पहुंच गए।

ढाई साल से नहीं मिल रहा था वेतन

supply inspector committed suicide at bhadohi at uttar pradesh
ज्ञानपुर स्थित किराए के कमरे में फंदे से लटका मिला शव - फोटो : अमर उजाला
आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप यादव को ढाई साल से वेतन नहीं मिल रहा था। प्रमोशन के बाद प्रतापगढ़ से स्थानांतरित होकर भदोही आए आपूर्ति निरीक्षक की सर्विस बुक अब तक कार्यालय नहीं आई थी। न तो उसे मंगवाने के लिए विभाग की ओर से कोई प्रयास किया गया।

जिला आपूर्ति अधिकारी तीर्थराज यादव ने कहा कि यहां उनकी सर्विस बुक नहीं आई है। वहीं, प्रतापगढ़ के जिलापूर्ति अधिकारी ने टेलीफोन पर बातचीत में बताया कि यहां पर उनका कोई कागजात लंबित नहीं है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर उनकी सर्विस बुक कहां है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सर्विस बुक नहीं होने के कारण उन्हें ढाई साल से वेतन नहीं मिल रहा था।

प्रतापगढ़ से दोपहर बाद उनके परिजनों के आने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों ने बताया कि विजय प्रताप एक दिन पहले ही घर से लौटे थे। उन्होंने किन हालातों में यह कदम उठाया, समझ से परे है। पुलिस अधीक्षक राजेश एस ने कहा कि इस मामले में ज्ञानपुर इंस्पेक्टर से रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
 

विभाग के पास निरीक्षक का रिकॉर्ड नहीं

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आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप की रहस्यमय हालात में फांसी लगाकर हुई मौत के मामले में आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली की कलई भी खुल गई है। दो साल से वेतन और सर्विस बुक के लिए परेशान आपूर्ति निरीक्षक के घर का पता भी विभाग के पास नहीं था। बाद में विभाग के लोगों ने प्रतापगढ़ आपूर्ति विभाग के कार्यालय में फोन कर उसके घर के पते की जानकारी ली।

प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना क्षेत्र के भगुवा चुंगी निवासी आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप यादव प्रतापगढ़ डीएसओ कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक थे। प्रमोशन होने के बाद आपूर्ति निरीक्षक हुए तो उन्हें भदोही भेजा गया। गत ढाई साल से वह नौकरी कर रहे थे, लेकिन आपूर्ति कार्यालय के पास उनकी सर्विस बुक नहीं थी और न ही मंगाया गया। इससे आपूर्ति कार्यालय की बड़ी लापरवाही सामने आई।

डीएसओ तीर्थराज यादव ने कहा कि प्रतापगढ़ कार्यालय से सर्विस बुक नहीं भेजी गई जबकि प्रतापगढ़ के जिलापूर्ति विभाग का कहना है कि सर्विस बुक उनके यहां से भेजी जा चुकी है। अब झूठ कौन बोल रहा है, यह जांच का विषय है। ढाई साल से एक अधिकारी जिले में काम करता रहा और उसकी सर्विस बुक को लेकर विभाग बेपरवाह बना रहा।

विजय प्रताप का सरल स्वभाव था और कोटेदारों से भी अच्छे संबंध थे। यही वजह है कि घटना से उनके जानने वाले भी सन्न हो गए थे। घटना की खबर लगते ही 300 से अधिक कोटेदार मौके पर पहुंच गए। कोटेदारों का कहना था कि विजय प्रताप का स्वभाव काफी अलग था। वह कभी कोटेदारों को परेशान नहीं करते। 
 

आखिर ऐसा क्या था उस कागज में

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राजा बाजार में आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप के कमरे से कोतवाली पुलिस के हाथ एक कागज लगा, जिसको लोग सुसाइड नोट मान रहे हैं लेकिन पुलिस ने उसे दबा लिया। पुलिस ने उस कागज को सार्वजनिक क्यों नहीं किया, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं। एएसपी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि मामले की विवेचना कोतवाली पुलिस को करनी है। कागज में क्या था, कोतवाली पुलिस ही बताएगी। वहीं, ज्ञानपुर कोतवाल भैया छविनाथ सिंह ने उस कागज को अपने पास रखते हुए मीडिया को कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। आखिर उस कागज में ऐसा क्या लिया है, जो पुलिस सार्वजनिक नहीं करना चाहती। 

 विजय प्रताप एक दिन पूर्व बुधवार को अपने घर प्रतापगढ़ से लौटे थे। इस दौरान ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने इतना बड़ा कदम उठा लिया। घटना के पीछे घरेलू कलह भी एक वजह के रूप में मानी जा रही है लेकिन घर वाले इससे इनकार कर रहे हैं। घर वालों का कहना था कि वह जब घर से आए तो सब कुछ ठीक था।             

आपूर्ति निरीक्षक की आत्महत्या की सूचना की खबर पाकर दोपहर बाद मौके पर पहुंचे उनके चचेरे भाई सूर्य प्रताप सिंह यादव ने कहा कि मंगलवार को रात 11 बजे तक हम लोगों ने बात की। उसके बाद मैंने खुद कहा कि सुबह चार बजे ट्रेन पकड़नी है, जाकर सो जाएं। सुबह इंटरसिटी एक्सप्रेस से वह भदोही चले आए।

अचानक क्या बात हो गई, जिससे उन्होंने ऐसा कदम उठा लिया। उन्होंने कहा कि जिस फंदे से उनके भाई का शव लटका था, वह ढीला दिख रहा था। उन्होंने आत्महत्या करने की बात से इंकार किया। पूर्ति निरीक्षक के बड़े बेटे कमलेश और छोटे बेटे कौशलेंद्र का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों अचानक हुई घटना से जैसे सुध-बुध खो बैठे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके पिता ने आत्महत्या कर ली।
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