आत्महत्या रोकथाम दिवस: काशी में हर 30 घंटे में मौत को गले लगा रही है एक जिंदगी, एक साल में 197 ने की खुदकुशी
काशी में हर 30 घंटे में एक जिंदगी मौत को गले लगा रही है। यहां पिछले एक साल में 197 लोगों ने आत्महत्या की। मनोचिकित्सकों के अनुसार, वाराणसी में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच लोग अपनों के करीब होकर भी अकेले पड़ रहे हैं।
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मोक्ष और जीवन के उत्सव के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध काशी से एक ऐसा गणितीय आंकड़ा सामने आया है, जो हर शहरवासी और प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर देगा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में एक साल में 197 आत्महत्याएं हुई हैं। इसका सीधा मतलब है कि शहर में हर 30 घंटे में एक व्यक्ति अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहा है। साल में 8760 घंटे होते हैं और इस हिसाब से लगभग हर डेढ़ दिन में काशी की किसी न किसी गली या मोहल्ले में एक चिराग बुझ रहा है।
सालाना आंकड़ों के तौर पर देखा जाए तो 197 मामले अब तक सामने आए। हर महीने औसत 16 आत्महत्याएं और हर सप्ताह 3 से 4 लोग जिंदगी से हार रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार, वाराणसी में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच लोग अपनों के करीब होकर भी अकेले पड़ रहे हैं।
18 से 35 वर्ष के युवाओं में प्रतिस्पर्धा, नौकरी छूटने का डर, पढ़ाई का तनाव और वित्तीय लेन-देन में विफलता सबसे बड़ा कारण बन रही है। संयुक्त परिवारों के टूटने और बिखरते रिश्तों के कारण संकट के समय भावनात्मक संबल नहीं मिल पा रहा है।
खूब बातें करें और हौसला दें
आईएमएस बीएचयू के मनोचिकित्सक डॉ. संजय गुप्ता बताते है कि इस 30 घंटे के चक्र को तोड़ सकते हैं। कोई परिचित अचानक चुप रहने लगे, सोशल मीडिया से दूरी बना ले या निराशावादी बातें करे तो तुरंत संवाद साधें। डिप्रेशन को छिपाने के बजाय मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लें। काशी के मोहल्ला स्तर और शिक्षण संस्थानों में परामर्श केंद्र की आवश्यकता है। आप या आपका कोई प्रियजन मानसिक तनाव से गुजर रहा है तो उस पर ध्यान दें। खूब बातें करें और हौसला दें कि यह कठिन दिन भी गुजर जाएगा।
महिलाओं में आत्महत्या के विचार अधिक पाए जाते हैं
बीएचयू आईएमएस एसएस हॉस्पिटल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि आत्महत्या ऐसा व्यवहार है, जिसमें प्राणी स्वयं का जीवन समाप्त कर लेता है। पहले व्यक्ति में बार-बार आत्महत्या के विचार आते हैं फिर वह आत्महत्या का प्रयास करता है, आत्महत्या के सभी प्रयास सफल नहीं होते हैं। 25 व्यक्तियों के आत्महत्या का प्रयास करने पर एक व्यक्ति की मौत होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में आत्महत्या के विचार अधिक पाए जाते हैं किंतु एक महिला के सापेक्ष तीन पुरुष आत्महत्या करते हैं। 18-24 वर्ष के लोगों के मृत्यु का आत्महत्या दूसरा सबसे बड़ा कारण है। 81 प्रतिशत लोग आत्महत्या करने से पूर्व इसका संकेत देते हैं। किसी से इसके बारे में चर्चा करते हैं या लिखते हैं।
आत्महत्या के कारण
आर्थिक तनाव, सामाजिक अलगाव की स्थिति, प्रियजनों से मुलाकात न होना, स्वस्थ मनोरंजन की कमी, नौकरी छूट जाना,
सामाज में शामिल न होना, धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता न करना, घरेलू कलह, समायोजन की समस्याएं भय, मानसिक विकार, भावनाओं पर नियंत्रण न रख पाना, समायोजन कौशल की कमी, आनुवंशिकता, साजिश कर आत्महत्या के लिए वातावरण तैयार किया जाना और आत्महत्या के संसाधनों की आसान उपलब्धता भी है।
क्या बोले विशेषज्ञ
युवाओं में अपेक्षाओं का बोझ बहुत अधिक बढ़ गया है। असफलता को स्वीकार करने की क्षमता कम हो रही है। पढ़ाई या वित्तीय घाटे में थोड़ी सी भी नाकामी मिलने पर उन्हें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है। आत्मघाती कदम अकसर किसी एक तात्कालिक घटना का नतीजा नहीं होता, बल्कि यह महीनों से जमा हो रहे अवसाद का अंतिम विस्फोट होता है। -डाॅ. बनानी घोष, मंडलीय मनोवैज्ञानिक
साल दर साल आत्महत्या के आंकड़ें
- 2021 में 90 आत्महत्या
- 2022 में 163 आत्महत्या
- 2023 में 197 आत्महत्या
- 2024 में 195 आत्महत्या
- 2025 में 197 आत्महत्या