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Varanasi News: जहां कोई नहीं जाएगा वहां भी रोशनी बनकर शिव का नाम होगा साथ, भक्ति संदेश में बोले सुधांशु महाराज
Sun, 17 Mar 2024 05:32 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sun, 17 Mar 2024 05:32 PM IST
सार
Varanasi News: विश्व जागृति मिशन के संस्थापक अध्यक्ष सुधांशु महाराज ने बातचीत के दौरान कहा कि गो माता की रक्षा व संरक्षण का प्रयास तो धर्म का काम है। आने वाले भविष्य में तो हमारी धरर्ती की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होगी। ऐसे में हम गोवंश के संरक्षण के जरिये ही इसे बचा सकते हैं। वर्तमान माहौल पर सुधांशु महाराज ने कहा कि बच्चों में तो प्रेम का भाव होता है, कट्टरता तो बाद में आती है।
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कार्यक्रम में मौजूद लोग।
- फोटो : Sudhanshu Maharaj
विस्तार
विश्व जागृति मिशन के संस्थापक अध्यक्ष सुधांशु महाराज ने कहा कि भगवान शिव की आराधना के लिए व्यक्ति को धर्म की शरण में जाना होगा। भगवान शिव बिना मांगे अपने भक्तों को देने वाले हैं। उनकी कृपा पाने के लिए आपको धर्मी बनना होगा। धर्म का मूल है दया। धर्म जब आपके जीवन में होगा तो शिवजी आपसे दूर नहीं हैं। धर्म भगवान को आपके पास लेकर आता है। धर्म वाले जहां बसते हैं वहां भगवान का वास होता है और उनकी कृपा बरसती है।
वह शनिवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय शिव भक्ति संदेश के दौरान प्रवचन दे रहे थे। सुधांशु महाराज ने कहा कि जहां कोई नहीं जाएगा वहां भी रोशनी बनकर शिवजी का नाम आपके साथ रहेगा। जब हमने कर्मों की अंधी सुरंग के पार जाने की कोशिश करते हैं तो उस समय हमारे मुंह से निकला हुआ शिव नाम रोशनी बनकर दुख से पार ले जाने के लिए हमारा सहारा बनता है। जो मुक्ति दे, सभी तरह के डर को खत्म कर सके, जो पुण्य की शक्ति बन जाता है ऐसे ये दो अक्षर हैं शिव।
उन्होंने कहा कि धर्म, अर्थ, उत्तम स्वास्थ्य का चिंतक वेद आदि शास्त्रों के स्वाध्याय के लिए अपने जीवन में नियम अवश्य बनाएं और उसका पालन करें। कहा कि पूजन के पश्चात भगवान शिव के सामने मंदिर के किसी कोने में बैठकर विग्रह को आंखों से देखते हुए भगवान की करुणा को महसूस करें। महसूस करें कि आपके आज्ञा चक्र पर शांति, प्रेम और आनंद की किरणें पड़ रही हैं और भगवान से शांति की प्रार्थना करें। शनिवार को दो दिवसीय सत्संग का शुभारंभ सुधांशु महाराज ने दीप जलाकर किया। स्वागत आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, इंद्रदेव दुबे और अशोक तिवारी ने किया।
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गोवंश के संरक्षण से ही होगी प्रकृति की रक्षा
गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पहल स्वागत योग्य है। मैं उनके इस अभियान का समर्थन करता हूं। उनकी इस पदयात्रा का हम हर तरह से समर्थन कर रहे हैं। उनकी पदयात्रा हमारे जिस-जिस शहर से गुजरेगी हमारे प्रतिनिधि उनका साथ देंगे।
विश्व जागृति मिशन के संस्थापक अध्यक्ष सुधांशु महाराज ने बातचीत के दौरान कहा कि गो माता की रक्षा व संरक्षण का प्रयास तो धर्म का काम है। आने वाले भविष्य में तो हमारी धरर्ती की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होगी। ऐसे में हम गोवंश के संरक्षण के जरिये ही इसे बचा सकते हैं। वर्तमान माहौल पर सुधांशु महाराज ने कहा कि बच्चों में तो प्रेम का भाव होता है, कट्टरता तो बाद में आती है। इसलिए जरूरी है कि बचपन से ही राष्ट्रभक्ति, मानव प्रेम और अच्छा इंसान बनने के लिए उन्हें प्रेरित करें।
देश के धार्मिक स्थलों पर बढ़ रहे पर्यटन और बदलाव पर कहा कि पर्यटन से अर्थनीति सशक्त होगी। दुनिया भर से लोग भारत की संस्कृति, सभ्यता और मान्यताओं का अध्ययन करने के लिए भारत आएंगे। उत्तर और दक्षिण के बीच धार्मिक सेतु बनाने के लिए वहां के संतों के प्रवचन को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
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वह शनिवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय शिव भक्ति संदेश के दौरान प्रवचन दे रहे थे। सुधांशु महाराज ने कहा कि जहां कोई नहीं जाएगा वहां भी रोशनी बनकर शिवजी का नाम आपके साथ रहेगा। जब हमने कर्मों की अंधी सुरंग के पार जाने की कोशिश करते हैं तो उस समय हमारे मुंह से निकला हुआ शिव नाम रोशनी बनकर दुख से पार ले जाने के लिए हमारा सहारा बनता है। जो मुक्ति दे, सभी तरह के डर को खत्म कर सके, जो पुण्य की शक्ति बन जाता है ऐसे ये दो अक्षर हैं शिव।
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उन्होंने कहा कि धर्म, अर्थ, उत्तम स्वास्थ्य का चिंतक वेद आदि शास्त्रों के स्वाध्याय के लिए अपने जीवन में नियम अवश्य बनाएं और उसका पालन करें। कहा कि पूजन के पश्चात भगवान शिव के सामने मंदिर के किसी कोने में बैठकर विग्रह को आंखों से देखते हुए भगवान की करुणा को महसूस करें। महसूस करें कि आपके आज्ञा चक्र पर शांति, प्रेम और आनंद की किरणें पड़ रही हैं और भगवान से शांति की प्रार्थना करें। शनिवार को दो दिवसीय सत्संग का शुभारंभ सुधांशु महाराज ने दीप जलाकर किया। स्वागत आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, इंद्रदेव दुबे और अशोक तिवारी ने किया।
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गोवंश के संरक्षण से ही होगी प्रकृति की रक्षा
गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पहल स्वागत योग्य है। मैं उनके इस अभियान का समर्थन करता हूं। उनकी इस पदयात्रा का हम हर तरह से समर्थन कर रहे हैं। उनकी पदयात्रा हमारे जिस-जिस शहर से गुजरेगी हमारे प्रतिनिधि उनका साथ देंगे।
विश्व जागृति मिशन के संस्थापक अध्यक्ष सुधांशु महाराज ने बातचीत के दौरान कहा कि गो माता की रक्षा व संरक्षण का प्रयास तो धर्म का काम है। आने वाले भविष्य में तो हमारी धरर्ती की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होगी। ऐसे में हम गोवंश के संरक्षण के जरिये ही इसे बचा सकते हैं। वर्तमान माहौल पर सुधांशु महाराज ने कहा कि बच्चों में तो प्रेम का भाव होता है, कट्टरता तो बाद में आती है। इसलिए जरूरी है कि बचपन से ही राष्ट्रभक्ति, मानव प्रेम और अच्छा इंसान बनने के लिए उन्हें प्रेरित करें।
देश के धार्मिक स्थलों पर बढ़ रहे पर्यटन और बदलाव पर कहा कि पर्यटन से अर्थनीति सशक्त होगी। दुनिया भर से लोग भारत की संस्कृति, सभ्यता और मान्यताओं का अध्ययन करने के लिए भारत आएंगे। उत्तर और दक्षिण के बीच धार्मिक सेतु बनाने के लिए वहां के संतों के प्रवचन को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।