Education : ग्रेजुएशन में तीन सेमेस्टर तक होगी प्रवासी भारतीय पर पढ़ाई, फैकल्टी मीटिंग में 9 क्रेडिट मिले
Varanasi News : इस कोर्स से छात्रों के पास कई स्कोप होंगे। विदेशों में युवाओं को रोजगार की संभावना तलाशने में मदद मिलेगी।
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बीएचयू में ग्रेजुएशन के छात्र अब तीन सेमेस्टर तक प्रवासी भारतीय की पढ़ाई करेंगे। इसी सत्र से कोर्स की शुरुआत हो रही है। बीएचयू के छात्र इसे ऑप्शनल के तौर पर चुन सकते हैं। फिलहाल इसे अनिवार्य नहीं किया गया है। पांच नवंबर को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।
कुलपति की मुहर के बाद कोर्स की शुरुआत होगी। आर्ट फैकल्टी की मीटिंग से कोर्स को पास करा लिया गया है। इसे नौ क्रेडिट मिले हैं। कोर्स को स्नातक के साथ मल्टी डिसीप्लीनेरी कोर्स के तौर पर शामिल किया गया है। प्रस्तावक बीएचयू का भारत अध्ययन केंद्र है।
समन्वयक प्रो. सदाशिव द्विवेदी ने बताया कि पूरी दुनिया में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा प्रवासी भारतीय रहते हैं। इनकी इतनी बड़ी आबादी ने भारत को विदेशों में मजबूती दी है। इससे भारत के युवाओं को जोड़ना है।
प्रो. द्विवेदी ने बताया कि ये एक मल्टी डिसीप्लेनरी कोर्स है, जिसे छात्र और छात्राएं ग्रेजुएशन कोर्स के साथ पढ़ सकेंगे।
कोर्स कोऑर्डिनेटर यूएसए त्रिनिदाद की डॉ. इंद्राणी राम प्रसाद को बनाया गया है। वह भारत अध्ययन केंद्र में विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं। डॉ. इंद्राणी ने कहा कि भारत के अंदर और बाहर रहने वाले प्रवासी एक ही हैं। प्रवासी क्यों और कैसे उन देशों में गए, इसकी पढ़ाई कराई जाएगी। भारत की दृश्य और अदृश्य संस्कृति को लेकर प्रवासी भारतीयों के दृष्टिकोण पर भी बात होगी।
मातृभूमि में बसने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई
सिलेबस में इस कोर्स के चार प्रमुख उद्देश्य बताए गए हैं। पहला, प्रवासी अध्ययन में प्रमुख शब्दावली और अवधारणाओं से परिचित कराना। दूसरा, प्रवासी समुदायों द्वारा अपनी नई मातृभूमि में बसने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई जाती है। तीसरा, ग्लोबल प्रवासियों का वर्गीकरण और चौथा भारतीय प्रवासी के गठन की प्रमुख वजह और उनकी व्याख्या।
चार यूनिट में बंटा कोर्स
- प्रवासी भारतीय अध्ययन, ट्रांस-नेशनलिज्म, राष्ट्रवाद, मातृभूमि, उपनिवेश और सॉफ्ट पावर।
- प्रवासी भारतीय दूसरे देशों में कैसे खुद को एडजस्ट करते हैं।बाहरी लोगों से कैसे घुल-मिलकर रहते हैं।
- भारत के अलग-अलग तरह के प्रवासियों की पहचान।
- समय के साथ भारतीयों का प्रसार।