Varanasi: देश में सबसे पहले बीएचयू में शुरू हुई थी मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई, पूरे होने वाले हैं 100 साल
देश में सबसे पहले मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की शुरुआत काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हुई थी। 1916 में बीएचयू की स्थापना के करीब चार साल बाद महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने यहां इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत की।
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देश में सबसे पहले मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की शुरुआत काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हुई थी। 1916 में बीएचयू की स्थापना के करीब चार साल बाद ही राष्ट्र निर्माण में तकनीकी की उपयोगिता को समझते हुए महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने यहां इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत की। बेनको से इंजीनियरिंग की कॉलेज की शुरुआत 1921 में हुई और 1923 में मेटलर्जी की पढ़ाई शुरू हुई। पहले कॉलेज, फिर आई और अब ये आईआईटी है।
1923 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग का सफर जो शुरू हुआ था उसने अब 100 साल पूरे कर लिए हैं। विभाग के शताब्दी वर्ष पर पर 26 से 29 अक्तूबर तक शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया है। इसके मुख्य अतिथि मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के ही 1982 बैच के छात्र रहे रमेश श्रीनिवासन मुख्य अतिथि होंगे।
रमेश श्रीनिवासन एजलिसिस के अध्यक्ष और सीईओ हैं। उन्होंने संस्थान 30 सितंबर को 1.3 मिलियन डॉलर का सहयोग किया था। इससे आईआईटी बीएचयू में स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का निर्माण हुआ है। जिसका रमेश श्रीनिवासन स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर है। इसमें छात्रों के लिए जिम से लेकर खेलने के साथ ही अन्य सुविधाएं हैं।
100 साल में हासिल की ये उपलब्धियां
100 सालों में विभाग ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। विभाग में स्नातक कोर्स की शुरुआत 1923 में हुई। इसके पहले प्रमुख प्रो. नागरदास पुरुषोत्तम गांधी थे। परास्नातक और पीएचडी की शुरुआत 1955 में हुई। आईआईटी बीएचयू के मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के छात्र दुनिया में नाम कर रहे हैं। डॉ. पुलिकेल अजयेन (दो गिनीज रिकॉर्ड्स धारक और नैनोटेक्नोलॉजी में एक अग्रणी) और डॉ. दीप जरीवाला (विज्ञान में फोर्ब्स 30 अंडर 30), डॉ. सी. सूर्यनारायण, प्रधानमंत्री के पूर्व राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. पल्ले रामाराव सभी इसी विभाग के पुरातन छात्र हैं।
कब कौन से कोर्स की हुई शुरुआत
- 1923 - बैचलर डिग्री कोर्स
- 1927 - पहली बार मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की डिग्री मिली
- 1955 - मास्टर्स डिग्री कोर्स
- 1955 - पीएचडी कोर्स
- 1957 - मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में पहली बार मास्टर्स और पीएचडी में डिग्री दी गई