{"_id":"698b94039067ed9e710505fb","slug":"storage-is-the-biggest-concern-in-the-world-the-main-reason-behind-the-energy-crisis-varanasi-news-c-20-vns1056-1285880-2026-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: विश्व की सबसे बड़ी चिंता, ऊर्जा संकट के पीछे की बड़ी वजह है भंडारण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: विश्व की सबसे बड़ी चिंता, ऊर्जा संकट के पीछे की बड़ी वजह है भंडारण
विज्ञापन
बीएचयू में ताइवानी प्रोफेसर ने मंगलवार को ऊर्जा संकट के पीछे मुख्य वजह भंडारण को बताया। ताइवान के बैटरी रिसर्च सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी से बीएचयू में आए प्रो. राजन जोस ने ऊर्जा सामग्रियों और उपकरणों को लेकर बीएचयू में शुरू हुए तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि ऊर्जा समस्याओं का समाधान विश्व की सबसे तात्कालिक चिंताओं में से एक हैं। इनके केंद्र में ऊर्जा सामग्री और उपकरण हैं। ऊर्जा भंडारण और उसके इस्तेमाल से किसी देश का विकास जुड़ा होता है। खासकर के ऊर्जा विकास तो भंडारण की क्षमता पर ही आधारित है। बीएचयू के भौतिकी विभाग की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर ताइवान के प्रोफेसर ने कहा कि
शोधकर्ताओं और छात्रों के विचार देश की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान करने में सहायक होंगे।
ऊर्जा भंडारण और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सामग्रियों और उपकरणों पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक चर्चाओं को समाहित करेगा। सम्मेलन का उद्देश्य देश में समकालीन तकनीकी प्रगति में सार्थक योगदान देना है। अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद से आए मुख्य अतिथि डॉ. रवि कुमार वर्मा ने कहा कि शैक्षणिक विमर्श से खनिजों और ऊर्जा संचयन में अनुसंधान के साथ ही नवाचार किए जाए। ऐसे नवाचारी समाधान, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती होने चाहिए। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ऊर्जा भंडारण ही पृथ्वी के दुर्लभ खनिजों की खोज के पीछे की एक प्रमुख प्रेरक शक्ति है।
विज्ञापन
शोधकर्ताओं और छात्रों के विचार देश की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान करने में सहायक होंगे।
ऊर्जा भंडारण और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सामग्रियों और उपकरणों पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक चर्चाओं को समाहित करेगा। सम्मेलन का उद्देश्य देश में समकालीन तकनीकी प्रगति में सार्थक योगदान देना है। अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद से आए मुख्य अतिथि डॉ. रवि कुमार वर्मा ने कहा कि शैक्षणिक विमर्श से खनिजों और ऊर्जा संचयन में अनुसंधान के साथ ही नवाचार किए जाए। ऐसे नवाचारी समाधान, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती होने चाहिए। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ऊर्जा भंडारण ही पृथ्वी के दुर्लभ खनिजों की खोज के पीछे की एक प्रमुख प्रेरक शक्ति है।
विज्ञापन