Varanasi: ज्ञानवापी के साथ मस्जिद शब्द का प्रयोग हो बंद, काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष का बयान
बीएचयू के कामधेनु सभागार में शनिवार को ज्ञानवापी मुद्दा प्रमुख पहलू संवाद श्रृंखला का आय़ोजन हुआ। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि ज्ञानवापी शब्द का वर्णन स्कंद पुराण में आता है, अतः ज्ञानवापी के साथ मस्जिद शब्द का प्रयोग बंद किया जाए। काशी में बाबा विश्वनाथ द्रव्य रूप में विराजमान हैं, अतः ज्ञानवापी कूप ही साक्षात ज्ञान का कुआं है। हिंदू समाज को जीत के लिए त्याग और तपबल जागृत करना होगा। इस दौरान अभियान में प्रतिभाग करने का संकल्प दिलाया गया। वह शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कामधेनु सभागार में ज्ञानवापी मुद्दा प्रमुख पहलू संवाद श्रृंखला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय धर्म जागरण प्रमुख अभय कुमार ने कहा कि ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद को केवल ज्ञानवापी ही नहीं आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त किए सभी स्थानों के गौरव को पुनः लौटाने के प्रयास करने होंगे।
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आस्था के केंद्रों के अपमान की शर्त पर मैत्री संभव नहीं
ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के संस्थापक अध्यक्ष प. शिव कुमार शुक्ल ने कहा कि मुस्लिम समाज ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अब हठ छोड़कर हिंदू समाज के सभी ऐतिहासिक महत्व के स्थान वापस कर दे। हिंदू समाज मुस्लिमों के साथ सौहार्द चाहता है परंतु आस्था के केंद्रों के अपमान की शर्त पर यह मैत्री संभव नहीं है।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा श्री काशी विश्वनाथ के चित्र पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ। डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने कहा कि ज्ञानवापी मुद्दा शुरू से केवल मंदिर मस्जिद विवाद की तरह देखा जाता रहा है जबकि वस्तुतः यह विषय सहिष्णु समाज के ऊपर आक्रांता मानसिकता द्वारा किए गए सांस्कृतिक हमले के रूप में देखा जाना चाहिए। ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद इसके लिए संघर्ष कर रही है।
अधिवक्ता मान बहादुर सिंह एवं अनुपम द्विवेदी ने कहा कि ज्ञानवापी का मुकदमा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है अतः सभी पक्षकारों को हिंदू समाज के हित में एकता के भाव से इस मुकदमे में सहयोग करना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक राजा आनंद ज्योति सिंह ने किया। संचालन सह संयोजक पतंजलि पांडेय ने किया। अतिथियों का सम्मान अभिषेक निगम ने किया। इस दौरान बाला लखेंद्र जय प्रकाश, अश्विनी कुमार, सत्यम मिश्र, डॉ. उपेंद्र विनायक सहस्रबुद्धे आदि उपस्थित थे।