देश में बंद हो गोहत्या: हिंदूवादी नेता ने सरकार से की मांग, बोले- करपात्री महाराज ने कांग्रेस को दिया था श्राप
Varanasi News: बीफ निर्यात के मामले में भारत की बढ़ती रैंकिंग पर हिंदू नेता अरुण पाठक ने चिंता जताई। कहा कि संतों-संन्यासियों के देश में यह कारोबार समझ से परे हैं। सरकार को इसके लिए सख्त कानून बनाना चाहिए।
विस्तार
हिन्दू बहुल भारत से बीफ का बड़े पैमाने पर निर्यात हो रहा है, यह काफी चौंकाने वाली बात है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बीफ के निर्यातकों में से एक भारत भी हो गया है, जो ब्राजील के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। उक्त बातें अखिल भारत हिन्दू महासभा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष और विश्व हिन्दू सेना प्रमुख फायरब्रांड हिन्दूवादी नेता अरुण पाठक ने कही।
उन्होंने कहा कि करपात्री महाराज ने गाय-वध रोकने और गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से वचन लिया था। उन्होंने इंदिरा गांधी को गो-हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रेरित किया था। वचनबद्ध कराया, इसके बाद 1976 में गौ-हत्या प्रतिबंध कानून बना।
इंदिरा गांधी सभी जगह से चुनाव हार गई थीं, इसके बाद स्वामी करपात्री महाराज के शरण में गईं। उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद मांगा, तब महाराजजी ने उन्हें गो-हत्या रोकने का वचन लिया। पद पर आसीन होने के तुरंत बाद यह निर्णय लेना होगा।
सख्त कानून बनाने की मांग
इंदिरा को पीएम का पद तो मिल गया, लेकिन उन्होंने गो-हत्या पर रोक नहीं लगाया। इससे नाराज होकर करपात्री महाराज के नेतृत्व में हजारों साधु-संतों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। इसमें सैकड़ों संत भी मारे गए। तब महाराजजी ने कांग्रेस को इंदिरा को श्राप दिया कि इंद्रा गाँधी के ब्लड का कोई भी शख्स अगर प्रधानमंत्री बना तो उसकी मृत्यु अकाल होगी। इसके बाद इंदिरा फिर राजीव गांधी की अकाल मृत्यु महाराजजी के श्राप के दो प्रमाण हैं।
अरुण पाठक ने कहा कि गो-हत्या को लेकर भाजपा को भी कड़े फैसले लेने चाहिए। ताकि हिन्दू बहुल राष्ट्र में यह कृत्य रोका जाए। गोहत्या पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, जिसमें गाय, बैल, बछड़ा और सांड़ सभी शामिल हों। कहा कि गोहत्या और गोमांस के परिवहन पर सख्त कानून बने, उनका सख्ती से पालन कराया जाए, जैसा कि मध्य प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों में है।