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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Startup Day 2025 95% of startups worldwide fail but 98% from BHU succeed within seven years

Startup Day 2025: दुनिया के 95% स्टार्टअप फेल, सात साल में बीएचयू के 98% पास; 160 में से पांच हुए बंद

Fri, 16 Jan 2026 04:22 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 16 Jan 2026 04:22 PM IST
सार

Varanasi News:  बीएचयू के 98% स्टार्टअप पास हुए। यहां के 160 स्टार्टअप में से पांच बंद हुए। वहीं बाकियों को चार करोड़ मिले। जिन युवाओं का नुकसान हुआ उन्होंने धैर्य करते हुए खुद को टिकाए रखा।

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Startup Day 2025 95% of startups worldwide fail but 98% from BHU succeed within seven years
Startup - फोटो : Freepik

विस्तार

आज दुनियाभर के 95 फीसदी स्टार्टअप फेल हो रहे हैं जबकि पिछले सात साल में बीएचयू का स्टार्टअप स्कोर 98 फीसदी हो गया है। यहां के केवल दो फीसदी स्टार्टअप ही बंद हुए हैं। बनारस में उत्पाद नहीं चला तो बीएचयू के कई स्टार्टअप ने शहर बदल लिया लेकिन बाजार नहीं छोड़ा। नुकसान हुआ तो धैर्य करते हुए खुद को टिकाए रखा। 

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शुक्रवार को इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में शुरू हो रहे स्टार्टअप रीबूट कार्यक्रम में आने वाले विशेषज्ञ इस पर युवा उद्यमियों को टिके रहने का मंत्र देंगे। बाजार में असफल होने वाली वजहों की एसओपी युवा उद्यमियों तक पहुंचाई जाएगी। 
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बीएचयू के अटल इन्क्यूबेशन सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. पीवी राजीव के अनुसार बीएचयू में फेल होने वाले स्टार्टअप का आंकड़ा ग्लोबल स्तर का दो ही फीसदी है। वर्ष 2018 के बाद करीब 160 स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए। इनमें से सिर्फ पांच ही स्टार्टअप बंद हुए या मार्केट से बाहर हो गए। बीएचयू के इन स्टार्टअप को अब तक करीब चार करोड़ रुपये तक दिए जा चुके हैं। फंड की व्यवस्था सरकार, प्राइवेट कंपनियों और एनजीओ की ओर से की गई है। 

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प्रो. पीवी राजीव के अनुसार स्टार्टअप के फेल होने के पीछे कई वजह हैं। युवा उद्यमियों को पता ही नहीं है कि स्टार्टअप के लिए लोन लेना है या इक्विटी, वे इसमें ही भ्रमित रहते हैं। दूसरी बात कि जब आपने आइडिया दिया तो तब वह यूनिक था लेकिन उसके उत्पाद की शक्ल में आते-आते पुराना पड़ गया।

कई उत्पादों के बाजार बनारस में नहीं है लेकिन बंगलूरू में हैं। इसके लिए उनकी सेवाओं और उत्पादों को काशी के बजाय उन शहरों से जोड़ा गया। युवा अभी भी बिजनेस शुरू तो कर देते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता कि बिजनेस को कैसे आगे बढ़ाया जाए। वे उत्पाद की जरूरतों को पूरी तरह से नहीं समझ पा रहे। कई स्टार्टअप को टिकने में 3-4 साल तक लग गए। बाजार के अनुसार बदलने पर ही आय जुटा पा रहे हैं। इन सभी बिंदुओं पर बीएचयू में युवाओं और विशेषज्ञों के बीच संवाद होगा।

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